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मुख्यमंत्री जी, ऐसा है हमारा जिला अस्पताल...
Updated Wed, 09 Aug 2017 10:59 PM IST
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सिद्धार्थनगर। जिले में आगमन पर गुरुवार को मुख्यमंत्री जिला अस्पताल का निरीक्षण करेंगे। इस दौरान उन्हें अस्पताल की तस्वीर चाहे जिस प्रकार देखने को मिले, लेकिन सीएम के निरीक्षण के 24 घंटे पहले तक जिला अस्पताल की हालत कहीं से भी दुरुस्त नहीं थी। रोजाना की तरह ही न तो साफ-सफाई के बेहतर इंतजाम थे और न ही मरीजों की सुविधाओं का खयाल रहा।
बिना चादर वाले बेड पर मरीजों को लेटाया गया था, तो इमरजेंसी वार्ड में फर्श पर इस्तेमाल हुए इंजेक्शन, खून के धब्बे, कॉटन के टुकड़े बिखरे हुए थे। अस्पताल की ऊपरी मंजिल पर गैलरी में पानी भरा हुआ था। कर्मचारी इसे बारिश का पानी बता रहे थे। इसे सही भी मान लें, को बारिश हुए कई दिन बीत चुके हैं और पानी का अब तक लगा होना जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली की पोल खोल रहा है।
वैसे तो जिला अस्पताल का अव्यवस्थाओं से पुराना नाता है। दवा-इलाज में मनमानी, ड्यूटी के प्रति लापरवाही, मरीजों को सुविधाएं उपलब्ध कराने में कोताही रोज की समस्या है। सरकार एक तरफ मरीजों को बेहतर उपचार का भरोसा दिला रही है तो दूसरी तरफ जिले के सबसे बड़े अस्पताल में ही व्यवस्थाएं बदहाल हैं। हालांकि मंत्री, अफसर के दौरे जैसे विशेष अवसरों पर अस्पताल हमेशा चकाचक दिखता है। गुरुवार को भी शायद मुख्यमंत्री के निरीक्षण में सारी व्यवस्थाएं बेहतर ही दिखाई जाएं। लेकिन एक दिन पहले बुधवार को अस्पताल का हाल था। अपराह्न पौने तीन बजे तक जनरल वार्ड में बेड पर चादर नहीं लगी थी। पॉलीथिन लगे बेड पर लेटी मरीज मसिना खास निवासी शोभा देवी, उसका की रीना देवी का कहना था कि सुबह से ही भर्ती हैं, लेकिन चादर नहीं मिला। कई बार मांगने पर भी कर्मचारी बस टालमटोल कर रहे हैं। बेड पर लगा पॉलीथिन चुभ रहा है, कोई सुनने वाला नहीं। इसी वार्ड में रखे डस्टबिन पर काली, पीली, लाल पन्नी भी नहीं लगी थी। खुले में रखे डस्टबिन से मरीजों में संक्रमण का खतरा बना हुआ है।
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इमरजेंसी वार्ड में आने वाले मरीजों के उपचार के बाद सीरिंज, रुई के टुकड़ों को फर्श पर ही छोड़ दिया गया था। अस्पताल के दूसरे तल पर बरामदे में पानी फैला हुआ है। कई दिनों से एकत्रित पानी के निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। स्वास्थ्य विभाग दूसरों को आस-पास पानी एकत्रित न होने देने की सलाह देता फिरता है, जबकि जिला अस्पताल में ही कई दिनों से लगे पानी से बेखबर रहा।
अस्पताल की छत पर मिलीं थीं शराब की बोतल
स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के निरीक्षण के दौरान जिले की उसका सीएचसी परिसर में शराब की बोतलें मिली थीं। अफसरों ने इससे भी कोई सबक नहीं लिया। जिला अस्पताल के तीसरे तल पर अंग्रेजी शराब और नमकीन के खाली पैकेट फेंके मिले। उसका सीएचसी परिसर में बोतल फेंके जाने पर अफसरों ने शरारती तत्वों की करतूत बताई थी। अब अस्पताल की छत पर बोतल कैसे पहुंच गई, कोई जवाब नहीं।
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बिना चादर वाले बेड पर मरीजों को लेटाया गया था, तो इमरजेंसी वार्ड में फर्श पर इस्तेमाल हुए इंजेक्शन, खून के धब्बे, कॉटन के टुकड़े बिखरे हुए थे। अस्पताल की ऊपरी मंजिल पर गैलरी में पानी भरा हुआ था। कर्मचारी इसे बारिश का पानी बता रहे थे। इसे सही भी मान लें, को बारिश हुए कई दिन बीत चुके हैं और पानी का अब तक लगा होना जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली की पोल खोल रहा है।
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वैसे तो जिला अस्पताल का अव्यवस्थाओं से पुराना नाता है। दवा-इलाज में मनमानी, ड्यूटी के प्रति लापरवाही, मरीजों को सुविधाएं उपलब्ध कराने में कोताही रोज की समस्या है। सरकार एक तरफ मरीजों को बेहतर उपचार का भरोसा दिला रही है तो दूसरी तरफ जिले के सबसे बड़े अस्पताल में ही व्यवस्थाएं बदहाल हैं। हालांकि मंत्री, अफसर के दौरे जैसे विशेष अवसरों पर अस्पताल हमेशा चकाचक दिखता है। गुरुवार को भी शायद मुख्यमंत्री के निरीक्षण में सारी व्यवस्थाएं बेहतर ही दिखाई जाएं। लेकिन एक दिन पहले बुधवार को अस्पताल का हाल था। अपराह्न पौने तीन बजे तक जनरल वार्ड में बेड पर चादर नहीं लगी थी। पॉलीथिन लगे बेड पर लेटी मरीज मसिना खास निवासी शोभा देवी, उसका की रीना देवी का कहना था कि सुबह से ही भर्ती हैं, लेकिन चादर नहीं मिला। कई बार मांगने पर भी कर्मचारी बस टालमटोल कर रहे हैं। बेड पर लगा पॉलीथिन चुभ रहा है, कोई सुनने वाला नहीं। इसी वार्ड में रखे डस्टबिन पर काली, पीली, लाल पन्नी भी नहीं लगी थी। खुले में रखे डस्टबिन से मरीजों में संक्रमण का खतरा बना हुआ है।
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इमरजेंसी वार्ड में आने वाले मरीजों के उपचार के बाद सीरिंज, रुई के टुकड़ों को फर्श पर ही छोड़ दिया गया था। अस्पताल के दूसरे तल पर बरामदे में पानी फैला हुआ है। कई दिनों से एकत्रित पानी के निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। स्वास्थ्य विभाग दूसरों को आस-पास पानी एकत्रित न होने देने की सलाह देता फिरता है, जबकि जिला अस्पताल में ही कई दिनों से लगे पानी से बेखबर रहा।
अस्पताल की छत पर मिलीं थीं शराब की बोतल
स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के निरीक्षण के दौरान जिले की उसका सीएचसी परिसर में शराब की बोतलें मिली थीं। अफसरों ने इससे भी कोई सबक नहीं लिया। जिला अस्पताल के तीसरे तल पर अंग्रेजी शराब और नमकीन के खाली पैकेट फेंके मिले। उसका सीएचसी परिसर में बोतल फेंके जाने पर अफसरों ने शरारती तत्वों की करतूत बताई थी। अब अस्पताल की छत पर बोतल कैसे पहुंच गई, कोई जवाब नहीं।