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ईंट-भट्ठे के तीन और घोड़ों में ग्लैंडर्स फार्सी की पुष्टि
siddharthnagar
Updated Fri, 01 Jun 2018 11:28 PM IST
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सिद्धार्थनगर। अश्व प्रजाति के लिए जानलेवा कहा जाने वाला ग्लैंडर्स फार्सी बीमारी तेजी से फैल रही है। बांसी क्षेत्र के रामनगर गांव स्थित ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले तीन घोड़ों में इस बीमारी की पुष्टि हुई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि डीएम के आदेश के बाद इन घोड़ों को मारा जाएगा। पिछले माह करही के ईंट-भट्ठे के तीन घोड़ों को इस बीमारी की पुष्टि के बाद मारा गया था।
करही के ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले बहराइच जिले के हरीम के एक घोड़े और वहीं के रईस के दो घोड़ों में पिछले महीने ग्लैंडर्स फार्सी बीमारी की पुष्टि हुई थी। इसके बाद उन्हें जहर का इंजेक्शन देकर मार दिया गया था। सतर्कता के तौर पर तीन किलो मीटर के दायरे में स्थित ईंट-भट्ठों के घोड़ों के ब्लड का नमूना लेकर अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार ( हरियाणा) भेजा गया था, जहां रामपुर के ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले तीन घोड़ों में बीमारी की पुष्टि हुई थी।
पशुपालन विभाग को 24 मई को रिपोर्ट मिल गई थी, लेकिन आठ दिन बाद भी घोड़ों को नहीं मारा जा सका है। विभाग का कहना है कि डीएम के आदेश के बाद ही घोड़ों को मारा जाएगा, लेकिन अब तक आदेश नहीं मिल सका है। वैसे विभागीय जानकारों का कहना है कि बीमारी की पुष्टि के 24 घंटे के भीतर घोड़ों को मार देना चाहिए, जिससे कि यह और न फैले।
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बीमारी के लक्षण
- पशु चिकित्सकों की माने तो बीमारी होने पर अश्व प्रजाति के पशुओं के शरीर में गांठ बन जाते है। शरीर में बुखार रहता है।
बोले जिम्मेदार
रामनगर स्थिति ईंट-भट्टे पर काम करने वाले तीन घोड़ों में ग्लैंडर्स फार्सी बीमारी की पुष्टि हुई है। आदेश मिलते ही घोड़ों को मार दिया जाएगा।
डॉ. उदभान गौंड, पशु चिकित्साधिकारी मिठवल
विभाग की तरफ से अब तक मामले की जानकारी ही नहीं दी गई है। इसे पता करवाया जाएगा। अगर घोड़ों में ग्लैंडर्स फार्सीं की पुष्टि हुई है, तो उसे मारा जा सकता है।
डीएम कुणाल सिल्कू
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करही के ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले बहराइच जिले के हरीम के एक घोड़े और वहीं के रईस के दो घोड़ों में पिछले महीने ग्लैंडर्स फार्सी बीमारी की पुष्टि हुई थी। इसके बाद उन्हें जहर का इंजेक्शन देकर मार दिया गया था। सतर्कता के तौर पर तीन किलो मीटर के दायरे में स्थित ईंट-भट्ठों के घोड़ों के ब्लड का नमूना लेकर अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार ( हरियाणा) भेजा गया था, जहां रामपुर के ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले तीन घोड़ों में बीमारी की पुष्टि हुई थी।
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पशुपालन विभाग को 24 मई को रिपोर्ट मिल गई थी, लेकिन आठ दिन बाद भी घोड़ों को नहीं मारा जा सका है। विभाग का कहना है कि डीएम के आदेश के बाद ही घोड़ों को मारा जाएगा, लेकिन अब तक आदेश नहीं मिल सका है। वैसे विभागीय जानकारों का कहना है कि बीमारी की पुष्टि के 24 घंटे के भीतर घोड़ों को मार देना चाहिए, जिससे कि यह और न फैले।
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बीमारी के लक्षण
- पशु चिकित्सकों की माने तो बीमारी होने पर अश्व प्रजाति के पशुओं के शरीर में गांठ बन जाते है। शरीर में बुखार रहता है।
बोले जिम्मेदार
रामनगर स्थिति ईंट-भट्टे पर काम करने वाले तीन घोड़ों में ग्लैंडर्स फार्सी बीमारी की पुष्टि हुई है। आदेश मिलते ही घोड़ों को मार दिया जाएगा।
डॉ. उदभान गौंड, पशु चिकित्साधिकारी मिठवल
विभाग की तरफ से अब तक मामले की जानकारी ही नहीं दी गई है। इसे पता करवाया जाएगा। अगर घोड़ों में ग्लैंडर्स फार्सीं की पुष्टि हुई है, तो उसे मारा जा सकता है।
डीएम कुणाल सिल्कू