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सिद्धार्थनगर: डायलिसिस वार्ड में 10 बेड बढ़े, गुर्दे के मरीजों को होगी सहूलियत
Sun, 12 Feb 2023 05:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 12 Feb 2023 05:04 AM IST
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जिला अस्पताल का डायलिसिस वार्ड।
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सिद्धार्थनगर। डायलिसिस के सहारे जिंदगी के दिन बढ़ा रहे गुर्दा के मरीजों के लिए अच्छी खबर है। अब उन्हें डायलिसिस के लिए गोरखपुर या लखनऊ नहीं जाना पड़ेगा। शासन की ओर से जिला अस्पताल के डायलिसिस वार्ड में एकसाथ 10 बेड बढ़ाने की स्वीकृति मिल गई है। मार्च के पहले सप्ताह तक इसके चालू होने की उम्मीद है। डायलिसिस वार्ड चलाने वाली कंपनी सामान लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 10 बेड बढ़ने के बाद यह वार्ड 20 बेड का हो जाएगा। इससे प्रतीक्षा सूची के मरीजों का नंबर जल्द आ जाएगा। फिलहाल प्रतीक्षा सूची में 25 मरीज हैं।
किन्हीं कारणों से दोनों किडनी गंवा चुके मरीज आसानी से जीवन जी सकें, इसके लिए उन्हें डायलिसिस की जरूरत होती है। अगर चिकित्सक की सलाह पर वह नियमित डायलिसिस करवा रहे हैं तो सामान्य जीवन जी सकते हैं। पहले किडनी की खराबी से जूझने वाले मरीज गोरखपुर और लखनऊ डायलिसिस के लिए जाते थे। लेकिन 15 दिसंबर 2018 में माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में एक साथ 10 बेड का डायलिसिस वार्ड शुरू हुआ। इससे किडनी के मरीजों को सहूलियत होने लगी। मरीजों की संख्या बढ़ने से प्रतीक्षा सूची लंबी होने लगी। इससे निजात के लिए कई बार बेड बढ़ाने की मांग गई थी, जिसे शासन ने मंजूर कर ली है। वार्ड तैयार है, मशीनें आते ही उसे इंस्टाल कर दिया जाएगा।
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प्रतिदिन तीन शिफ्ट में हो रही 30 मरीजों की डायलिसिस
वार्ड से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा समय में 71 मरीज पंजीकृत हैं, जिनकी चिकित्सक की सलाह से सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस की जा रही है। दिन में तीन शिफ्ट में 30 मरीजों की डायलिसिस होती है। 10 बेड बढ़ने के बाद यह संख्या 60 हो जाएगी।
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निजी केंद्र में लगते हैं ढाई हजार रुपये
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, निजी केंद्र में एक बार डायलिसिस के लिए मरीज को ढाई से तीन हजार रुपये देने पड़ते हैं। जबकि माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में यह सेवा निशुल्क है। अगर मरीज को ब्लड की जरूरत पड़ती है तो उसे बाहर से लाना पड़ता है।
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बोले अधिकारी
10 बेड के डायलिसिस की स्वीकृत शासन की ओर से मिल गई है। वार्ड संचालित करने वाली कंपनी को इस संबंध में पत्राचार भी हो चुका है। अगले माह से वार्ड शुरू होने की उम्मीद है। -डॉ. एके झा, प्राचार्य, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर
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अबतक 10 बेड का वार्ड चल रहा है। 10 बेड बढ़ जाने से वार्ड 20 बेड का हो गया है। सामान लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मार्च के पहले सप्ताह तक 10 बेड और शुरू हो जाएगा। -विकास त्रिपाठी, मैनेजर डायलिसिस वार्ड, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर
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किन्हीं कारणों से दोनों किडनी गंवा चुके मरीज आसानी से जीवन जी सकें, इसके लिए उन्हें डायलिसिस की जरूरत होती है। अगर चिकित्सक की सलाह पर वह नियमित डायलिसिस करवा रहे हैं तो सामान्य जीवन जी सकते हैं। पहले किडनी की खराबी से जूझने वाले मरीज गोरखपुर और लखनऊ डायलिसिस के लिए जाते थे। लेकिन 15 दिसंबर 2018 में माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में एक साथ 10 बेड का डायलिसिस वार्ड शुरू हुआ। इससे किडनी के मरीजों को सहूलियत होने लगी। मरीजों की संख्या बढ़ने से प्रतीक्षा सूची लंबी होने लगी। इससे निजात के लिए कई बार बेड बढ़ाने की मांग गई थी, जिसे शासन ने मंजूर कर ली है। वार्ड तैयार है, मशीनें आते ही उसे इंस्टाल कर दिया जाएगा।
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प्रतिदिन तीन शिफ्ट में हो रही 30 मरीजों की डायलिसिस
वार्ड से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा समय में 71 मरीज पंजीकृत हैं, जिनकी चिकित्सक की सलाह से सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस की जा रही है। दिन में तीन शिफ्ट में 30 मरीजों की डायलिसिस होती है। 10 बेड बढ़ने के बाद यह संख्या 60 हो जाएगी।
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निजी केंद्र में लगते हैं ढाई हजार रुपये
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, निजी केंद्र में एक बार डायलिसिस के लिए मरीज को ढाई से तीन हजार रुपये देने पड़ते हैं। जबकि माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में यह सेवा निशुल्क है। अगर मरीज को ब्लड की जरूरत पड़ती है तो उसे बाहर से लाना पड़ता है।
बोले अधिकारी
10 बेड के डायलिसिस की स्वीकृत शासन की ओर से मिल गई है। वार्ड संचालित करने वाली कंपनी को इस संबंध में पत्राचार भी हो चुका है। अगले माह से वार्ड शुरू होने की उम्मीद है। -डॉ. एके झा, प्राचार्य, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर
अबतक 10 बेड का वार्ड चल रहा है। 10 बेड बढ़ जाने से वार्ड 20 बेड का हो गया है। सामान लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मार्च के पहले सप्ताह तक 10 बेड और शुरू हो जाएगा। -विकास त्रिपाठी, मैनेजर डायलिसिस वार्ड, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर