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ग्रामीणों को आबादी की जमीन पर मिलेगा मालिकाना हक
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श्रावस्ती। आबादी में बसे गांवों का वहां के रहने वालों को मालिकाना हक मिलेगा। इसके लिए राजस्व विभाग खतौनी व नजरी नक्शा जारी करेगा। पायलेट प्रोजेक्ट के तहत जिले के पांच गांवों के नक्शे का सोमवार को अंतिम प्रकाशन हुआ। अब दो अक्टूबर तक इन गांवों की खतौनी राजस्व विभाग जारी करेगा। इसी के बाद ग्रामीण भूमि पर होम लोन सहित अन्य सुविधाएं ले सकेंगे।
जिले के सारे गांव पुरानी परती व आबादी भूमि पर बसें हैं। पूरा गांव राजस्व अभिलेखों में केवल एक ही गाटा संख्या पर बसा होता है, जिसका मालिकाना हक राजस्व विभाग के पास ही होता है। गांव की भूमि पर ग्रामीण रह तो सकते हैं लेकिन उस भूमि पर बैंक से लोन लेकर न तो मकान बना पाते हैं और न ही इस भूमि का मूल्यांकन ही राजस्व विभाग करता है।
लेकिन सरकार ने अब गांव में बसे ग्रामीण जो जितने क्षेत्र में बसे हैं, उन्हें उस भूमि का मालिकाना हक देने जा रही है। इसके लिए जिले में प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है। पायलेट प्रोजेक्ट के तहत जिले के पांच गांवों का ड्रोन से फोटो लेकर उसे अलग-अलग चौहद्दी में बांटा गया है। खुली बैठक में बनाए गए इस नक्शे का प्रकाशन भी हो चुका है। इस पर ग्रामीणों से दावा व आपत्ति भी मांगी गई है, जिसका निस्तारण कर दो अक्टूबर तक इन गांवों के नजरी नक्शा व खतौनी जारी कर दी जाएगी।
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इन गांवों का हुआ चयन
गांवों की भूमि का नजरी नक्शा व खतौनी जारी करने के लिए हरिहरपुररानी विकासखंड के वर्गावर्गी, उमायल खुर्द, गुलरा बंजारा, सलारपुर व भिट्ठी का चयन किया गया है। नक्शे का प्रकाशन भी किया जा चुका है।
खतौनी जारी होने के बाद मिलेगी सुविधा
गांव का नक्शा व खतौनी जारी होने के बाद ग्रामीण भू भाग के पूर्ण स्वामी हो जाएंगे। इसी के बाद वह इस भूमि पर भवन निर्माण के लिए हाउसिंग लोन, व्यापार के लिए इसका वैलुएशन भी करा सकेंगे। गांव में होने वाला भूमि विवाद भी समाप्त हो जाएगा। नगर व गांव के बीच की खाई भी समाप्त होगी।
पायलेट प्रोजेक्ट के तहत जिले के पांच गांवों को लिया गया है, जिसके नक्शे का प्रकाशन किया जा चुका है। दो अक्टूबर तक इन गांवों की खतौनी जारी कर ग्रामीणों को उपलब्ध करा दी जाएगी।
- राज कुमार पांडे, तहसीलदार
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जिले के सारे गांव पुरानी परती व आबादी भूमि पर बसें हैं। पूरा गांव राजस्व अभिलेखों में केवल एक ही गाटा संख्या पर बसा होता है, जिसका मालिकाना हक राजस्व विभाग के पास ही होता है। गांव की भूमि पर ग्रामीण रह तो सकते हैं लेकिन उस भूमि पर बैंक से लोन लेकर न तो मकान बना पाते हैं और न ही इस भूमि का मूल्यांकन ही राजस्व विभाग करता है।
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लेकिन सरकार ने अब गांव में बसे ग्रामीण जो जितने क्षेत्र में बसे हैं, उन्हें उस भूमि का मालिकाना हक देने जा रही है। इसके लिए जिले में प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है। पायलेट प्रोजेक्ट के तहत जिले के पांच गांवों का ड्रोन से फोटो लेकर उसे अलग-अलग चौहद्दी में बांटा गया है। खुली बैठक में बनाए गए इस नक्शे का प्रकाशन भी हो चुका है। इस पर ग्रामीणों से दावा व आपत्ति भी मांगी गई है, जिसका निस्तारण कर दो अक्टूबर तक इन गांवों के नजरी नक्शा व खतौनी जारी कर दी जाएगी।
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इन गांवों का हुआ चयन
गांवों की भूमि का नजरी नक्शा व खतौनी जारी करने के लिए हरिहरपुररानी विकासखंड के वर्गावर्गी, उमायल खुर्द, गुलरा बंजारा, सलारपुर व भिट्ठी का चयन किया गया है। नक्शे का प्रकाशन भी किया जा चुका है।
खतौनी जारी होने के बाद मिलेगी सुविधा
गांव का नक्शा व खतौनी जारी होने के बाद ग्रामीण भू भाग के पूर्ण स्वामी हो जाएंगे। इसी के बाद वह इस भूमि पर भवन निर्माण के लिए हाउसिंग लोन, व्यापार के लिए इसका वैलुएशन भी करा सकेंगे। गांव में होने वाला भूमि विवाद भी समाप्त हो जाएगा। नगर व गांव के बीच की खाई भी समाप्त होगी।
पायलेट प्रोजेक्ट के तहत जिले के पांच गांवों को लिया गया है, जिसके नक्शे का प्रकाशन किया जा चुका है। दो अक्टूबर तक इन गांवों की खतौनी जारी कर ग्रामीणों को उपलब्ध करा दी जाएगी।
- राज कुमार पांडे, तहसीलदार