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दूसरों का दुख समझना है करुणा : आनंद सागर
Wed, 21 Jan 2026 01:12 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Wed, 21 Jan 2026 01:12 AM IST
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बोधि वृक्ष की पूजा करते थाईलैंड के अनुयायी।- संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती मंगलवार को थाईलैंड से आए अनुयायियों के 40 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु आनंद सागर के नेतृत्व में पारंपरिक तरीके से बोधि वृक्ष का दर्शन-पूजन व जेतवन परिसर की परिक्रमा की। इस दौरान बौद्ध सभा का आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु आनंद सागर ने कहा कि महात्मा बुद्ध ने करुणा को अत्यधिक महत्वपूर्ण बताया। करुणा का अर्थ है दूसरों के दुख को समझना और उनकी मदद करने की भावना रखना। जब हम किसी के दर्द या परेशानियों को महसूस करते हैं और उनकी सहायता करना चाहते हैं तो वह करुणा कहलाती है।
बुद्ध का मानना था कि हमें अपने आसपास के लोगों के दुखों में सहभागी बनकर उनकी मदद करनी चाहिए, जिससे स्वयं भी शांति और खुशी का अनुभव होता है। अहिंसा महात्मा बुद्ध के उपदेशों का एक प्रमुख अंग है। इसका तात्पर्य किसी भी जीव के प्रति हिंसा से बचना और सभी के साथ दया, प्रेम व शांतिपूर्ण व्यवहार करना है। अहिंसा केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक और वाचिक हिंसा से भी बचने का संदेश देती है। जब हम दूसरों को कष्ट नहीं पहुंचाते और अपने कर्मों, विचारों व वाणी से शांति फैलाते हैं तो हम अहिंसा का पालन करते हैं। बुद्ध के अनुसार अहिंसा से आत्मा शुद्ध होती है और जीवन में संतुलन आता है।
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बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु आनंद सागर ने कहा कि महात्मा बुद्ध ने करुणा को अत्यधिक महत्वपूर्ण बताया। करुणा का अर्थ है दूसरों के दुख को समझना और उनकी मदद करने की भावना रखना। जब हम किसी के दर्द या परेशानियों को महसूस करते हैं और उनकी सहायता करना चाहते हैं तो वह करुणा कहलाती है।
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बुद्ध का मानना था कि हमें अपने आसपास के लोगों के दुखों में सहभागी बनकर उनकी मदद करनी चाहिए, जिससे स्वयं भी शांति और खुशी का अनुभव होता है। अहिंसा महात्मा बुद्ध के उपदेशों का एक प्रमुख अंग है। इसका तात्पर्य किसी भी जीव के प्रति हिंसा से बचना और सभी के साथ दया, प्रेम व शांतिपूर्ण व्यवहार करना है। अहिंसा केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक और वाचिक हिंसा से भी बचने का संदेश देती है। जब हम दूसरों को कष्ट नहीं पहुंचाते और अपने कर्मों, विचारों व वाणी से शांति फैलाते हैं तो हम अहिंसा का पालन करते हैं। बुद्ध के अनुसार अहिंसा से आत्मा शुद्ध होती है और जीवन में संतुलन आता है।
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