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Shravasti News: वियतनाम के दल ने जेतवन में किया दर्शन-पूजन
Wed, 01 Jul 2026 12:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Wed, 01 Jul 2026 12:18 AM IST
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बोधि वृक्ष की पूजा करते अनुयायी।
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती मंगलवार को वियतनाम से आए अनुयायियों के 80 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में जेतवन व बोधि वृक्ष का दर्शन पूजन किया। इस दौरान आयोजित बौद्ध सभा में भिक्षु देवानंद ने भगवान बुद्ध के जीवन और उनके सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि लगभग 2,500 वर्ष पूर्व, सिद्धार्थ का जन्म नेपाली राजपरिवार में हुआ था।
सिद्धार्थ ने सभी सुख-सुविधाओं का त्याग कर आध्यात्मिक जीवन को चुना। उन्होंने छह वर्षों तक स्वयं को ध्यान में समर्पित किया, जिसका उद्देश्य मन को दैनिक जीवन की चिंताओं से मुक्त करना था। 29 वर्ष की आयु में, वे ज्ञान प्राप्ति के लिए वन में निकल पड़े। उन्हें पूर्ण ज्ञान और असीम करुणा प्राप्त हुई और बुद्ध कहलाए। सिद्धार्थ के त्याग और गहन ध्यान से ही बौद्ध धर्म की नींव पड़ी। यह धर्म पूर्ण ज्ञान और असीम करुणा का संगम है। बौद्ध धर्म मन को शांति और मुक्ति का मार्ग दिखाता है।
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सिद्धार्थ ने सभी सुख-सुविधाओं का त्याग कर आध्यात्मिक जीवन को चुना। उन्होंने छह वर्षों तक स्वयं को ध्यान में समर्पित किया, जिसका उद्देश्य मन को दैनिक जीवन की चिंताओं से मुक्त करना था। 29 वर्ष की आयु में, वे ज्ञान प्राप्ति के लिए वन में निकल पड़े। उन्हें पूर्ण ज्ञान और असीम करुणा प्राप्त हुई और बुद्ध कहलाए। सिद्धार्थ के त्याग और गहन ध्यान से ही बौद्ध धर्म की नींव पड़ी। यह धर्म पूर्ण ज्ञान और असीम करुणा का संगम है। बौद्ध धर्म मन को शांति और मुक्ति का मार्ग दिखाता है।
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