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पंचायत के खाते में करोड़ों का बजट कर रहा नए प्रधान का इंतजार
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श्रावस्ती। यह पहला अवसर है जब नवगठित पंचायतों के लिए पंचायत के खातों में लाखों रुपये रखा हुआ है। यह पैसा पंद्रहवें वित्त व राज्य वित्त का है। बजट पुरानी पंचायतों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद आया था। लेकिन प्रशासकों ने इस पैसे को खर्च नहीं किया।
पंचायत चुनाव संपन्न होने के बाद अब नवनिर्वाचित प्रधान शपथ ग्रहण का इंतजार कर रहे हैं। शपथ ग्रहण की तिथि भी जल्द ही आने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायतों के विकास के लिए आया पंद्रहवां वित्त व राज्य वित्त का करोड़ों रुपये नए प्रतिनिधियों का इंतजार कर रहा है। देखा जाए तो मार्च माह में ही जिले की 397 पंचायतों में पंद्रहवें वित्त आयोग का छोटी पंचायतों में तीन से चार लाख रुपये तो बड़ी पंचायतों में पंद्रह से बीस लाख रुपये आ चुका है। जबकि राज्य वित्त के तहत मार्च माह में पंचायतों के खातें में सरकार ने चार किश्त भेजी थी। यह प्रति किश्त भी औसतन 70 से 80 हजार रुपये है। ऐसे में सभी सामान्य व छोटी पंचायतों में लगभग तीन से चार लाख रुपये मिले हैं। ऐसे में देखा जाए तो कम आबादी वाली पंचायतों में सात से आठ लाख रुपये हैं।
वहीं जिन ग्राम पंचायतों की संख्या बड़ी है। जिसमें जिले की टंड़वा महंथ व गिरंट शामिल हैं। ऐसी पंचायतों में यह धन 40 से 50 लाख रुपये है। जिसे विकास पर खर्च किया जाना है। यह पहला अवसर है जब नवगठित पंचायतों को इतनी बड़ी राशि विकास के लिए मिलेगी। इससे पहले अक्सर यह देखा गया है कि पंचायतों का कार्य काल समाप्त होते ही विकास के लिए आया पैसा भी समाप्त हो जाता था।
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नवगठित पंचायतों को फिर महीनों विकास करने के लिए राज्य व पंद्रहवें वित्त आयोग के धन का इंतजार करना पड़ता था। लेकिन इस बार पंचायतों का कार्यकाल दिसंबर माह में समाप्त हो गया। यह पैसा सरकार ने मार्च माह में भेजा। इस दौरान ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों ने इस पैसे से कोई भी विकास कार्य नहीं कराया। जिसके चलते पैसा खातों में मौजूद है। लगभग पांच माह के बाद अब जल्द ही नवगठित ग्राम सरकार शपथ ग्रहण लेकर इन पैसों से गांवों में विकास का खाका खींचेगी। इस संबंध में डीपीआरओ किरन का कहना है कि सभी पंचायतों में विकास के लिए पर्याप्त धन है। बस उन्हें गाइड लाइन के अनुसार अपनी विकासात्मक योजनाओं को कार्यरूप में देना है।
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पंचायत चुनाव संपन्न होने के बाद अब नवनिर्वाचित प्रधान शपथ ग्रहण का इंतजार कर रहे हैं। शपथ ग्रहण की तिथि भी जल्द ही आने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायतों के विकास के लिए आया पंद्रहवां वित्त व राज्य वित्त का करोड़ों रुपये नए प्रतिनिधियों का इंतजार कर रहा है। देखा जाए तो मार्च माह में ही जिले की 397 पंचायतों में पंद्रहवें वित्त आयोग का छोटी पंचायतों में तीन से चार लाख रुपये तो बड़ी पंचायतों में पंद्रह से बीस लाख रुपये आ चुका है। जबकि राज्य वित्त के तहत मार्च माह में पंचायतों के खातें में सरकार ने चार किश्त भेजी थी। यह प्रति किश्त भी औसतन 70 से 80 हजार रुपये है। ऐसे में सभी सामान्य व छोटी पंचायतों में लगभग तीन से चार लाख रुपये मिले हैं। ऐसे में देखा जाए तो कम आबादी वाली पंचायतों में सात से आठ लाख रुपये हैं।
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वहीं जिन ग्राम पंचायतों की संख्या बड़ी है। जिसमें जिले की टंड़वा महंथ व गिरंट शामिल हैं। ऐसी पंचायतों में यह धन 40 से 50 लाख रुपये है। जिसे विकास पर खर्च किया जाना है। यह पहला अवसर है जब नवगठित पंचायतों को इतनी बड़ी राशि विकास के लिए मिलेगी। इससे पहले अक्सर यह देखा गया है कि पंचायतों का कार्य काल समाप्त होते ही विकास के लिए आया पैसा भी समाप्त हो जाता था।
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नवगठित पंचायतों को फिर महीनों विकास करने के लिए राज्य व पंद्रहवें वित्त आयोग के धन का इंतजार करना पड़ता था। लेकिन इस बार पंचायतों का कार्यकाल दिसंबर माह में समाप्त हो गया। यह पैसा सरकार ने मार्च माह में भेजा। इस दौरान ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों ने इस पैसे से कोई भी विकास कार्य नहीं कराया। जिसके चलते पैसा खातों में मौजूद है। लगभग पांच माह के बाद अब जल्द ही नवगठित ग्राम सरकार शपथ ग्रहण लेकर इन पैसों से गांवों में विकास का खाका खींचेगी। इस संबंध में डीपीआरओ किरन का कहना है कि सभी पंचायतों में विकास के लिए पर्याप्त धन है। बस उन्हें गाइड लाइन के अनुसार अपनी विकासात्मक योजनाओं को कार्यरूप में देना है।