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Shravasti News: आधार के चक्रव्यूह में फंसे 13,046 बच्चों के स्वेटर
Tue, 12 Dec 2023 11:49 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Tue, 12 Dec 2023 11:49 PM IST
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गलौला के एकघरवा दर्जीपुरवा में बिना स्वेटर पढ़ाई करते बच्चे
श्रावस्ती। आधार के फेर में जिले के 1,3046 बच्चों का स्वेटर, जूता व मोजा फंस गया है। स्वेटर के अभाव में कुछ बच्चे अपना खुद का इंतजाम कर रहे हैं तो कुछ ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचते हैं। कुछ बच्चे ऐसे भी हैं अभिभावकों के खातों में धनराशि तो आई लेकिन उन्होंने यह पैसा गेहूं की बोआई पर खर्च कर दिया है।
परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का ड्रेस, स्वेटर व जूता मोजा नियमों के जाल में फंस गया है। अभिभावकों के खाते में डीबीटी के तहत जमा कराई जाने वाली धनराशि की राह में आधार सबसे बड़ा बाधक बन रहा है। परिषदीय विद्यालयों में 1,70,764 छात्र पंजीकृत हैं। इनमें से 1,57,220 बच्चों का आधार कार्ड बना है। जबकि 4,644 बच्चों के आधार का वेरिफिकेशन नहीं पाया है। वहीं, 8,402 बच्चे ऐसे हैं, जिनका अभी तक आधार कार्ड ही नहीं बना है। ऐसे में जिले में 13,046 बच्चों के अभिभावकों के खाते में डीबीटी के माध्यम से ड्रेस, स्वेटर आदि का पैसा नहीं पहुंचा है।
वहीं, दूसरी ओर जिन अभिभावकों के खाते में धनराशि पहुंची है उनमें से अधिकांश ने पैसा निकाल कर गेहूं की बोआई व अन्य दूसरे कामों में खर्च दिया, ऐसे में जब जिले में कड़ाके की ठंड पड़नी शुरू हो गई है तब बच्चे बगैर बगैर स्वेटर व ड्रेस के विद्यालय पहुंच रहे हैं।
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नहीं मिला पैसा तो कैसे पहने ड्रेस
प्राथमिक विद्यालय एकघरवा दर्जी पुरवा में काफी संख्या में बच्चे बिना स्वेटर व ड्रेस के रोजाना पहुंच रहे हैं। पारुल, दिलाशान, इबरार व समीर सहित अन्य बच्चों ने बताया कि उन्हें ड्रेस का पैसा अभी तक नहीं मिला है। शिक्षामित्र मीरा यादव व सोना पांडे ने बताया कि कई बच्चों के आधार व बैंक खाते में खामियां होने के कारण उनके खातों में पैसा नहीं भेजा जा सका है। अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे आधार को बैंक खाते से लिंक कराएं।
सिरसिया के एक विद्यालय के प्रधान शिक्षक ने बताया कि अभिभावकों के खातों में पैसा भेजा जा चुका है, लेकिन वे बच्चें के लिए ड्रेस व स्वेटर नहीं खरीद रहे हैं। यदि इन बच्चों को विद्यालय आने से मना कर दिया जाए तो हम पर कार्रवाई हो सकती है। इसी विद्यालय के एक बच्चे के अभिभावक ने बताया कि उनके तीन बच्चे यहां पढ़ते हैं। जिनका पैसा खाते में आया था। लेकिन खाद व बीज खरीदने के लिए उसे खर्च कर दिया गया। प्राथमिक विद्यालय बनकटवा के एक छात्र ने बताया कि उसकी भाभी की तबीयत खराब थी तो ड्रेस का पैसा पापा ने भाभी की दवाई कराने में खर्च कर दिया।
अभिभावकों को किया जा रहा जागरूक
बच्चों को लगातार शिक्षकों की ओर से फुल ड्रेस में विद्यालय आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही अभिभावकों को भी बैठकों में निर्देश दिए जा रहे हैं। जल्द ही बच्चे पूरी ड्रेस में विद्यालय आने लगेंगे।
- अमिता सिंह, बीएसए
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परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का ड्रेस, स्वेटर व जूता मोजा नियमों के जाल में फंस गया है। अभिभावकों के खाते में डीबीटी के तहत जमा कराई जाने वाली धनराशि की राह में आधार सबसे बड़ा बाधक बन रहा है। परिषदीय विद्यालयों में 1,70,764 छात्र पंजीकृत हैं। इनमें से 1,57,220 बच्चों का आधार कार्ड बना है। जबकि 4,644 बच्चों के आधार का वेरिफिकेशन नहीं पाया है। वहीं, 8,402 बच्चे ऐसे हैं, जिनका अभी तक आधार कार्ड ही नहीं बना है। ऐसे में जिले में 13,046 बच्चों के अभिभावकों के खाते में डीबीटी के माध्यम से ड्रेस, स्वेटर आदि का पैसा नहीं पहुंचा है।
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वहीं, दूसरी ओर जिन अभिभावकों के खाते में धनराशि पहुंची है उनमें से अधिकांश ने पैसा निकाल कर गेहूं की बोआई व अन्य दूसरे कामों में खर्च दिया, ऐसे में जब जिले में कड़ाके की ठंड पड़नी शुरू हो गई है तब बच्चे बगैर बगैर स्वेटर व ड्रेस के विद्यालय पहुंच रहे हैं।
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नहीं मिला पैसा तो कैसे पहने ड्रेस
प्राथमिक विद्यालय एकघरवा दर्जी पुरवा में काफी संख्या में बच्चे बिना स्वेटर व ड्रेस के रोजाना पहुंच रहे हैं। पारुल, दिलाशान, इबरार व समीर सहित अन्य बच्चों ने बताया कि उन्हें ड्रेस का पैसा अभी तक नहीं मिला है। शिक्षामित्र मीरा यादव व सोना पांडे ने बताया कि कई बच्चों के आधार व बैंक खाते में खामियां होने के कारण उनके खातों में पैसा नहीं भेजा जा सका है। अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे आधार को बैंक खाते से लिंक कराएं।
सिरसिया के एक विद्यालय के प्रधान शिक्षक ने बताया कि अभिभावकों के खातों में पैसा भेजा जा चुका है, लेकिन वे बच्चें के लिए ड्रेस व स्वेटर नहीं खरीद रहे हैं। यदि इन बच्चों को विद्यालय आने से मना कर दिया जाए तो हम पर कार्रवाई हो सकती है। इसी विद्यालय के एक बच्चे के अभिभावक ने बताया कि उनके तीन बच्चे यहां पढ़ते हैं। जिनका पैसा खाते में आया था। लेकिन खाद व बीज खरीदने के लिए उसे खर्च कर दिया गया। प्राथमिक विद्यालय बनकटवा के एक छात्र ने बताया कि उसकी भाभी की तबीयत खराब थी तो ड्रेस का पैसा पापा ने भाभी की दवाई कराने में खर्च कर दिया।
अभिभावकों को किया जा रहा जागरूक
बच्चों को लगातार शिक्षकों की ओर से फुल ड्रेस में विद्यालय आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही अभिभावकों को भी बैठकों में निर्देश दिए जा रहे हैं। जल्द ही बच्चे पूरी ड्रेस में विद्यालय आने लगेंगे।
- अमिता सिंह, बीएसए