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धर्म को देखने का स्वामी विवेकानंद ने दिया नया नजरिया...
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जगतजीत इंटर कालेज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मौजूद छात्राएं
- फोटो : SRAWASTI
कटरा (श्रावस्ती)। जगतजीत इंटर कॉलेज इकौना में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद श्रावस्ती की ओर से मंगलवार से स्वामी विवेकानंद का जयंती सप्ताह मनाया जा रहा है। इसी के तहत बुधवार को आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानाचार्य ने स्वामी जी के चित्र पर माल्यार्पण कर किया।
इस दौरान प्रधानाचार्य डॉ. भूदेश्वर पांडे ने कहा कि 12 जनवरी, 1863 में जन्मे स्वामी जी का नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। उनके पिता प्रख्यात वकील थे। कॉन्वेंट में पढ़े स्वामी जी बचपन से ही काफी जिज्ञासु थे। उनकी इसी जिज्ञासा ने उन्हें ईश्वर को समझने व सनातन धर्म को जानने की दिशा में आगे बढ़ाया। शिकागो में दिया उनका भाषण आज भी सबके बीच प्रसिद्ध है। जहां उन्होंने भारत व सनातन धर्म का इतनी संवेदनशीलता व गहराई से प्रतिनिधित्व किया था कि हम सब आज भी गौरवान्वित महसूस करते हैं। स्वामी जी ने ही दुनिया को बताया था कि असली भारत यहां की संस्कृति और सभ्यता है।
रामकृष्ण परमहंस के इस प्रिय शिष्य ने हमें धर्म को देखने का एक नया व वैज्ञानिक नजरिया दिया। यही वजह है कि उनका नाम आते ही हम एक अलग ही अनुभूति से गुजरते हैं। उनके जन्मदिवस को युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है। उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य न प्राप्त हो जाए। आशुतोष पांडे ने कहा कि खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है। मत सोचिये कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है। ऐसा सोचना सबसे बड़ा अधर्म है। इस मौके पर आरबी बाजपेई, घनश्याम, श्रीनिवास तिवारी सहित काफी संख्या में छात्र छात्राएं मौजूद रहीं।
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इस दौरान प्रधानाचार्य डॉ. भूदेश्वर पांडे ने कहा कि 12 जनवरी, 1863 में जन्मे स्वामी जी का नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। उनके पिता प्रख्यात वकील थे। कॉन्वेंट में पढ़े स्वामी जी बचपन से ही काफी जिज्ञासु थे। उनकी इसी जिज्ञासा ने उन्हें ईश्वर को समझने व सनातन धर्म को जानने की दिशा में आगे बढ़ाया। शिकागो में दिया उनका भाषण आज भी सबके बीच प्रसिद्ध है। जहां उन्होंने भारत व सनातन धर्म का इतनी संवेदनशीलता व गहराई से प्रतिनिधित्व किया था कि हम सब आज भी गौरवान्वित महसूस करते हैं। स्वामी जी ने ही दुनिया को बताया था कि असली भारत यहां की संस्कृति और सभ्यता है।
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रामकृष्ण परमहंस के इस प्रिय शिष्य ने हमें धर्म को देखने का एक नया व वैज्ञानिक नजरिया दिया। यही वजह है कि उनका नाम आते ही हम एक अलग ही अनुभूति से गुजरते हैं। उनके जन्मदिवस को युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है। उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य न प्राप्त हो जाए। आशुतोष पांडे ने कहा कि खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है। मत सोचिये कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है। ऐसा सोचना सबसे बड़ा अधर्म है। इस मौके पर आरबी बाजपेई, घनश्याम, श्रीनिवास तिवारी सहित काफी संख्या में छात्र छात्राएं मौजूद रहीं।
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