फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shravasti News ›   Sravasti second in adopting PPIUCD

पीपीआईयूसीडी अपनाने में श्रावस्ती का दूसरा नंबर

Sun, 21 Jun 2020 10:06 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jun 2020 10:06 PM IST
विज्ञापन
Sravasti second in adopting PPIUCD
श्रावस्ती। दो बच्चों के बीच अंतर रखने के लिए पीपीआईयूसीडी (पोस्ट पार्टम इंट्रायूटेराइन कंट्रासेप्टिव डिवाइस) महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाती है। इसे प्रसव के 48 घंटे के अंदर लगता है। वहीं जरूरत होने पर इसको आसानी से निकलवाया जा सका है। अनचाहे गर्भ से लंबे समय तक मुक्ति चाहने वाली महिलाओं ने कोरोना काल में इसे सबसे अधिक पसंद किया है। जिले की 951 महिलाओं ने गर्भ निरोधक के रूप में पीपीआईयूसीडी को अपनाया है। इस पर जिले को प्रदेश में दूसरा स्थान मिला है।
विज्ञापन

स्वास्थ्य विभाग की ओर से संस्थागत प्रसव के लिए आनेे वाली महिलाओं को बच्चों में अंतर रखने के लिए पीपीआईयूसीडी अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिए क्षेत्र की आशा व एएनएम महिलाओं को जागरूक कर रही हैं। लॉकडाउन के दौरान 12 जून तक जिले में करीब ढाई माह में 2945 महिलाओं ने संस्थागत प्रसव कराया। इसमें से 951 ने पीपीआईयूसीडी को अपनाया। संस्थागत प्रसव के मुकाबले इसे अपनाने के मामले में श्रावस्ती को प्रदेश में दूसरा स्थान मिला।
विज्ञापन

इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एपी भार्गव ने बताया कि मातृ एवं शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिहाज से दो बच्चों के जन्म के बीच कम से कम तीन साल का अंतर अवश्य रखना चाहिए। इससे पहले दूसरे गर्भ को धारण करने योग्य महिला का शरीर नहीं बन पाता। पहले बच्चे के उचित पोषण और स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह अंतर जरूरी है। इसके लिए लोगों को जागरूक करने के साथ ही उन तक गर्भ निरोधक सामग्री पहुंचाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को दक्ष किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

यह है पीपीआईयूसीडी
प्रसव के 48 घंटे के अंदर अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले महिला पीपीआईयूसीडी लगवा सकती है। इसके एक बार लगने के बाद इसका असर पांच से दस साल तक रहता है। बच्चों के जन्म के बीच अंतर रखने की यह लंबी अवधि की विधि बहुत ही सुरक्षित और आसान है। यह गर्भाशय के भीतर लगने वाला छोटा उपकरण है जो कि दो प्रकार का होता है। पहला कापर आईयूसीडी 380 ए- जिसका असर दस वर्षों तक रहता है। दूसरा कापर आईयूसीडी 375 जिसका असर पांच वर्षों तक रहता है। - डॉ. दीपशिखा मिश्रा, महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed