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पीपीआईयूसीडी अपनाने में श्रावस्ती का दूसरा नंबर
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श्रावस्ती। दो बच्चों के बीच अंतर रखने के लिए पीपीआईयूसीडी (पोस्ट पार्टम इंट्रायूटेराइन कंट्रासेप्टिव डिवाइस) महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाती है। इसे प्रसव के 48 घंटे के अंदर लगता है। वहीं जरूरत होने पर इसको आसानी से निकलवाया जा सका है। अनचाहे गर्भ से लंबे समय तक मुक्ति चाहने वाली महिलाओं ने कोरोना काल में इसे सबसे अधिक पसंद किया है। जिले की 951 महिलाओं ने गर्भ निरोधक के रूप में पीपीआईयूसीडी को अपनाया है। इस पर जिले को प्रदेश में दूसरा स्थान मिला है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से संस्थागत प्रसव के लिए आनेे वाली महिलाओं को बच्चों में अंतर रखने के लिए पीपीआईयूसीडी अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिए क्षेत्र की आशा व एएनएम महिलाओं को जागरूक कर रही हैं। लॉकडाउन के दौरान 12 जून तक जिले में करीब ढाई माह में 2945 महिलाओं ने संस्थागत प्रसव कराया। इसमें से 951 ने पीपीआईयूसीडी को अपनाया। संस्थागत प्रसव के मुकाबले इसे अपनाने के मामले में श्रावस्ती को प्रदेश में दूसरा स्थान मिला।
इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एपी भार्गव ने बताया कि मातृ एवं शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिहाज से दो बच्चों के जन्म के बीच कम से कम तीन साल का अंतर अवश्य रखना चाहिए। इससे पहले दूसरे गर्भ को धारण करने योग्य महिला का शरीर नहीं बन पाता। पहले बच्चे के उचित पोषण और स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह अंतर जरूरी है। इसके लिए लोगों को जागरूक करने के साथ ही उन तक गर्भ निरोधक सामग्री पहुंचाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को दक्ष किया गया है।
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यह है पीपीआईयूसीडी
प्रसव के 48 घंटे के अंदर अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले महिला पीपीआईयूसीडी लगवा सकती है। इसके एक बार लगने के बाद इसका असर पांच से दस साल तक रहता है। बच्चों के जन्म के बीच अंतर रखने की यह लंबी अवधि की विधि बहुत ही सुरक्षित और आसान है। यह गर्भाशय के भीतर लगने वाला छोटा उपकरण है जो कि दो प्रकार का होता है। पहला कापर आईयूसीडी 380 ए- जिसका असर दस वर्षों तक रहता है। दूसरा कापर आईयूसीडी 375 जिसका असर पांच वर्षों तक रहता है। - डॉ. दीपशिखा मिश्रा, महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से संस्थागत प्रसव के लिए आनेे वाली महिलाओं को बच्चों में अंतर रखने के लिए पीपीआईयूसीडी अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिए क्षेत्र की आशा व एएनएम महिलाओं को जागरूक कर रही हैं। लॉकडाउन के दौरान 12 जून तक जिले में करीब ढाई माह में 2945 महिलाओं ने संस्थागत प्रसव कराया। इसमें से 951 ने पीपीआईयूसीडी को अपनाया। संस्थागत प्रसव के मुकाबले इसे अपनाने के मामले में श्रावस्ती को प्रदेश में दूसरा स्थान मिला।
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इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एपी भार्गव ने बताया कि मातृ एवं शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिहाज से दो बच्चों के जन्म के बीच कम से कम तीन साल का अंतर अवश्य रखना चाहिए। इससे पहले दूसरे गर्भ को धारण करने योग्य महिला का शरीर नहीं बन पाता। पहले बच्चे के उचित पोषण और स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह अंतर जरूरी है। इसके लिए लोगों को जागरूक करने के साथ ही उन तक गर्भ निरोधक सामग्री पहुंचाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को दक्ष किया गया है।
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यह है पीपीआईयूसीडी
प्रसव के 48 घंटे के अंदर अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले महिला पीपीआईयूसीडी लगवा सकती है। इसके एक बार लगने के बाद इसका असर पांच से दस साल तक रहता है। बच्चों के जन्म के बीच अंतर रखने की यह लंबी अवधि की विधि बहुत ही सुरक्षित और आसान है। यह गर्भाशय के भीतर लगने वाला छोटा उपकरण है जो कि दो प्रकार का होता है। पहला कापर आईयूसीडी 380 ए- जिसका असर दस वर्षों तक रहता है। दूसरा कापर आईयूसीडी 375 जिसका असर पांच वर्षों तक रहता है। - डॉ. दीपशिखा मिश्रा, महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ