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उच्च शिक्षा में 25 फीसदी घटी छात्राओं की संख्या

Tue, 19 Jul 2022 11:15 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 19 Jul 2022 11:15 PM IST
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श्रावस्ती। उच्च शिक्षा में छात्राओं की संख्या में इस वर्ष 25 फीसदी की कमी आई है। इसे लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ ही विश्व विद्यालय तक परेशान है। इस समस्या के कारण और निस्तारण को लेकर अब विश्वविद्यालय स्तर पर महाविद्यालयों के साथ मंथन करने की कवायद शुरू हुई है। इसके तहत ही बीते दिनों कुल सचिव ने महिला महाविद्यालयों के प्राचार्य के साथ एक आनलाइन मीटिंग भी हुई। इसमें पांच वर्ष में औसतन स्कूल छोड़ने या फिर स्कूल में छात्राओं के कम नामांकन के प्रतिशत पर गहन चर्चा हुई।
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चर्चा के दौरान सामने आया कि श्रावस्ती में लगभग 25 फीसदी छात्राओं ने इन पांच वर्ष में उच्च शिक्षा (स्नातक) तक की पढ़ाई पूरी करने से पहले ही पढ़ाई छोड़ दी। यह आंकड़ा चौंकाने वाला था कि पांच वर्ष में छात्राएं इंटर तक पढ़ाई करके के बाद अपनी शिक्षा को विराम दे रही हैं। स्नातक कक्षाओं में इनकी संख्या लगातार घटती जा रही है। इस संबंध में बैठक में मौजूद महिला महाविद्यालयों की प्राचार्यों से भी छात्राओं की घट रही संख्या के बारे में पूछा गया।
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बताया गया कि कोविड काल के साथ ही अलग अलग विश्वविद्यालयों का अलग अलग परीक्षा शुल्क होने के कारण ही छात्राएं स्नातक तक की पढ़ाई नहीं कर रही है। मसलन जिले के सिद्धार्थ विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में स्नातक कक्षाओं की शुल्क राशि 1618 रुपया प्रति सेमेस्टर यानी सालाना 3236 रुपया देना पड़ता है जबकि समीप के गोंडा जिले के विश्वविद्यालय से संबद्ध छात्र छात्राओं को सालाना शुल्क के बतौर मात्र 1600 रुपया ही देना पड़ता है। संभवता शुल्क राशि के इस बड़े अंतर के कारण ही स्नातक कक्षाओं में छात्राओं की संख्या में 25 फीसदी की गिरावट आई है।
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श्रावस्ती व बलरामपुर जिले का आवंटन सिद्धार्थ विश्वविद्यालय को है। जबकि गोंडा के सारे महाविद्यालय अवध विश्वविद्यालय से संबद्ध है। अवध विश्वविद्यालय की फीस पहले ही कम थी। जबकि सिद्धार्थ विश्व विद्यालय की फीस वहां से लगभग दो गुना के बराबर थी। शासन स्तर से सभी विश्वविद्यालयों की फीस एक बराबर कर दिए जाने के बाद जिले में अब स्नातक कक्षाओं में छात्राओं की संख्या बढ़ने की पूरी उम्मीद है।
डॉ. शिम्मी तिवारी, प्राचार्य, स्वर्गीय श्यामता प्रसाद महिला महाविद्यालय
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