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आषाढ़ में दगा दे गये बादल, अब सावन से उम्मीद
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श्रावस्ती। तराई में आषाढ़ मास के मेघ किसानों से रूठे रहे। इससे धान की रोपाई का कार्य पूरी तरह बाधित है। बरसात न होने से व्याप्त उमस भरी गर्मी ने सभी का जीना मुहाल कर रखा है। सभी को अब गुरुवार से शुरू हो रहे सावन में झमाझम होने की उम्मीद है।
आषाढ़ के दौरान भी जिले में मौसम का पारा 40 डिग्री सेल्सियस पर कायम बना रहा। इस दौरान तेज धूप के बीच होती रही बादलों की आवाजाही के सभी को उमस भरी भीषण गर्मी से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में अघोषित तौर पर हो रही बिजली की कटौती सभी की परेशानी को दो गुना बढ़ा रही है। आषाढ़ मास में भी सुबह से ही आग उगल रही सूरज की तपिश से सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को उठानी पड़ रही है। आषाढ़ मास खत्म होने के बाद भी खेत खलिहान तो दूर ताल तलैया तक में पानी नजर नहीं आ रहा। इस कारण खेतों में लगी धान की नर्सरी व अन्य फसलें भी मुरझा रही है।
धान की नर्सरी को बचाने के लिए किसानों को सिंचाई का सहारा भी नहीं मिल पा रहा। धान की फसल बचाने के लिए नलकूपों से होने वाली सिंचाई का कार्य भी बिजली की अघोषित कटौती के कारण भगवान भरोसे है। इससे फसल के खराब होने के साथ ही लागत बढ़ने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। तराई क्षेत्र में सिंचाई के संसाधनों के अभाव से खेतों में लगी धान की नर्सरी सहित मक्का, मेंथा, लौकी तरोई व कद्दू की फसलें भी बर्बाद होने की कगार पर है।
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आषाढ़ के दौरान भी जिले में मौसम का पारा 40 डिग्री सेल्सियस पर कायम बना रहा। इस दौरान तेज धूप के बीच होती रही बादलों की आवाजाही के सभी को उमस भरी भीषण गर्मी से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में अघोषित तौर पर हो रही बिजली की कटौती सभी की परेशानी को दो गुना बढ़ा रही है। आषाढ़ मास में भी सुबह से ही आग उगल रही सूरज की तपिश से सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को उठानी पड़ रही है। आषाढ़ मास खत्म होने के बाद भी खेत खलिहान तो दूर ताल तलैया तक में पानी नजर नहीं आ रहा। इस कारण खेतों में लगी धान की नर्सरी व अन्य फसलें भी मुरझा रही है।
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धान की नर्सरी को बचाने के लिए किसानों को सिंचाई का सहारा भी नहीं मिल पा रहा। धान की फसल बचाने के लिए नलकूपों से होने वाली सिंचाई का कार्य भी बिजली की अघोषित कटौती के कारण भगवान भरोसे है। इससे फसल के खराब होने के साथ ही लागत बढ़ने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। तराई क्षेत्र में सिंचाई के संसाधनों के अभाव से खेतों में लगी धान की नर्सरी सहित मक्का, मेंथा, लौकी तरोई व कद्दू की फसलें भी बर्बाद होने की कगार पर है।
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