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महावीर जयंती पर निकली शोभायात्रा
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कटरा (श्रावस्ती)। भगवान महावीर की जयंती पर गुरुवार को दिगंबर जैन मंदिर से शोभायात्रा निकाली गई। कार्यक्रम का आयोजन दिगंबर जैन मंदिर समिति ने किया। शोभायात्रा संभवनाथ जन्म स्थल तक पहुंची। जगह-जगह शोभायात्रा का पूजन-अर्चन किया गया।
भगवान महावीर जयंती पर जैन मंदिर से शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा संभव नाथ जन्म स्थल पहुंची। वहां से इसे वापस जैन मंदिर लाया गया। इस दौरान कई स्थानों पर शोभायात्रा का पूजन-अर्चन किया गया। इस दौरान आचार्य सुबल सागर जी महाराज ने कहा कि जैन धर्म में विश्वास, श्रद्धा व आस्था रखने वालों के लिए यह महत्वपूर्ण दिन है। महावीर जयंती न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में जैन धर्म के अनुयायी मनाते हैं। यह जयंती ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार हर साल मार्च या अप्रैल में पड़ती है।
महावीर जयंती का इतिहास लगभग 599-527 ईसवी पूर्व का है।
इस जयंती को यूं ही नहीं मनाया जाता है। इसे मनाने के पीछे भगवान महावीर स्वामी जी का योगदान और ऐतिहासिक तथ्य जुड़े हैं जिन्हें जैनियों द्वारा महावीर जयंती के दिन याद किया जाता है। समय-समय पर जैन धर्म के तीर्थंकरों में परिवर्तन हुआ है। महावीर स्वामी जी जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर कहे जाते है। जैन धर्म में यह बताया गया है कि महावीर स्वामी ने सात तत्त्व, छह द्रव्य, समवसरण में जीव, मोक्ष के कारण और संसार आदि उपायों का वर्णन किया है। इस मौके पर संजीव जैन, प्रकाश चंद जैन, महेंद्र जैन, सुरेंद्र जैन, स्वरूप चंद जैन, रूपेश जैन व अनुराग जैन आदि जैन मुनि तथा जैन समुदाय के लोग मौजूद रहे।
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भगवान महावीर जयंती पर जैन मंदिर से शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा संभव नाथ जन्म स्थल पहुंची। वहां से इसे वापस जैन मंदिर लाया गया। इस दौरान कई स्थानों पर शोभायात्रा का पूजन-अर्चन किया गया। इस दौरान आचार्य सुबल सागर जी महाराज ने कहा कि जैन धर्म में विश्वास, श्रद्धा व आस्था रखने वालों के लिए यह महत्वपूर्ण दिन है। महावीर जयंती न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में जैन धर्म के अनुयायी मनाते हैं। यह जयंती ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार हर साल मार्च या अप्रैल में पड़ती है।
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महावीर जयंती का इतिहास लगभग 599-527 ईसवी पूर्व का है।
इस जयंती को यूं ही नहीं मनाया जाता है। इसे मनाने के पीछे भगवान महावीर स्वामी जी का योगदान और ऐतिहासिक तथ्य जुड़े हैं जिन्हें जैनियों द्वारा महावीर जयंती के दिन याद किया जाता है। समय-समय पर जैन धर्म के तीर्थंकरों में परिवर्तन हुआ है। महावीर स्वामी जी जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर कहे जाते है। जैन धर्म में यह बताया गया है कि महावीर स्वामी ने सात तत्त्व, छह द्रव्य, समवसरण में जीव, मोक्ष के कारण और संसार आदि उपायों का वर्णन किया है। इस मौके पर संजीव जैन, प्रकाश चंद जैन, महेंद्र जैन, सुरेंद्र जैन, स्वरूप चंद जैन, रूपेश जैन व अनुराग जैन आदि जैन मुनि तथा जैन समुदाय के लोग मौजूद रहे।
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