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कोरोना की ढीली हुई पकड़ तो खुल गए स्कूल
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श्रावस्ती। कोरोना संक्रमण के फैलाव पर लगी प्रभावी रोक के बाद मंगलवार से जिले के उच्च प्राथमिक विद्यालयों के बंद ताले बच्चों की पढ़ाई के लिए फिर खुल गए। हालांकि पहले दिन अभिभावकों की तरफ से बच्चों को स्कूल भेजने में बरत गयी दूरी से कक्षाओं मेें बच्चों की उपस्थिति पचास फीसदी से भी कम दर्ज हुई ।
करीब साढ़े चार माह बाद बंद जूनियर हाई स्कूलों का ताला मंगलवार को फिर से खुलने पर पहला दिन आशंका व अव्यवस्था की बीच ही बीत गया। अभिभावकों में कोरोना के प्रति व्याप्त भय कुछ इस हद तक हावी दिखा कि किसी भी स्कूल में नामांकित छात्रों के सापेक्ष पचास फीसदी बच्चे भी हाजिर नहीं हुए। शिक्षिकों ने अंदेशा जताया है कि जब तक अभिभावक का डर कोरोना के प्रति पूरी तरह समाप्त नहीं होगा इसी तरह की स्थिति बनी रहेगी। साढ़े चार माह बाद खुले स्कूलों के तालों के बावजूद साफ सफाई की बदहाल व्यवस्था से अधिकांश स्कूलों में जलभराव व घास का जंगल दिखाई दिया। शौचालय सहित स्कूल कैंपस की साफ सफाई की स्थिति काफी खराब स्थिति में दिखी। अधिकांश स्कूलों में सैनिटाइजेशन भी नही कराया गया था। स्कूल आने वाले विद्यार्थियों के चहेरे से भी मास्क गायब मिले। स्कूलों के संचालन को जरूरी कोविड हेल्प डेस्क भी गायब मिली।
जिले के अधिकांश स्कूलों में साफ सफाई का अभाव दिखा लेकिन सबसे ज्यादा बुरी स्थिति गिलौला, जमुनहा व हरिहरपुररानी विकास खंड के स्कूलों की दिखी। इन ब्लाक के साठ फीसदी स्कूलों में बरसात के कारण जल भराव व्याप्त दिखा। कुछ स्कूलों में तो जलभराव के कारण बच्चों को पहुंचना ही मुश्किल नजर आया।
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स्कूल खोलने से पहले कैंपस, सभी क्लास के फर्नीचर, उपकरण, स्टेशनरी, पानी की टंकी, किचन, वॉशरूम को सैनिटाइज किया जाना था। इसके अलावा स्कूल में थर्मामीटर, सेनेटाइजर, साबुन की व्यवस्था के साथ ही स्कूल बस या वैन को सैनिटाइज किया जाना था। प्रिंसिपल की तरफ से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विभाग के चिकित्सीय स्टाफ से समन्वय स्थापित करने के लिए मेडिकल सपोर्ट के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग के तहत छात्रों को कम से कम 6 फीट की दूरी के साथ बैठाया जाना था। इसके साथ ही यदि स्कूलों में छात्रों की संख्या सौ से अधिक है तो उपस्थिति के आधार पर क्लास दो पालियों में चलाई जाएगी। लेकिन एक पाली में चालीस बच्चों से अधिक की संख्या नही होगी।
जिले के सभी उच्च प्राथमिक विद्यालय मंगलवार से खुल गए। अधिकांश स्कूलों में पचास फीसदी से भी कम बच्चे आए। ऐसे में शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि अभिभावकों के साथ बैठक करके बच्चों को स्कूल भेजने के लिए राजी कराए । प्रभुराम चौहान बीएसए
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करीब साढ़े चार माह बाद बंद जूनियर हाई स्कूलों का ताला मंगलवार को फिर से खुलने पर पहला दिन आशंका व अव्यवस्था की बीच ही बीत गया। अभिभावकों में कोरोना के प्रति व्याप्त भय कुछ इस हद तक हावी दिखा कि किसी भी स्कूल में नामांकित छात्रों के सापेक्ष पचास फीसदी बच्चे भी हाजिर नहीं हुए। शिक्षिकों ने अंदेशा जताया है कि जब तक अभिभावक का डर कोरोना के प्रति पूरी तरह समाप्त नहीं होगा इसी तरह की स्थिति बनी रहेगी। साढ़े चार माह बाद खुले स्कूलों के तालों के बावजूद साफ सफाई की बदहाल व्यवस्था से अधिकांश स्कूलों में जलभराव व घास का जंगल दिखाई दिया। शौचालय सहित स्कूल कैंपस की साफ सफाई की स्थिति काफी खराब स्थिति में दिखी। अधिकांश स्कूलों में सैनिटाइजेशन भी नही कराया गया था। स्कूल आने वाले विद्यार्थियों के चहेरे से भी मास्क गायब मिले। स्कूलों के संचालन को जरूरी कोविड हेल्प डेस्क भी गायब मिली।
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जिले के अधिकांश स्कूलों में साफ सफाई का अभाव दिखा लेकिन सबसे ज्यादा बुरी स्थिति गिलौला, जमुनहा व हरिहरपुररानी विकास खंड के स्कूलों की दिखी। इन ब्लाक के साठ फीसदी स्कूलों में बरसात के कारण जल भराव व्याप्त दिखा। कुछ स्कूलों में तो जलभराव के कारण बच्चों को पहुंचना ही मुश्किल नजर आया।
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स्कूल खोलने से पहले कैंपस, सभी क्लास के फर्नीचर, उपकरण, स्टेशनरी, पानी की टंकी, किचन, वॉशरूम को सैनिटाइज किया जाना था। इसके अलावा स्कूल में थर्मामीटर, सेनेटाइजर, साबुन की व्यवस्था के साथ ही स्कूल बस या वैन को सैनिटाइज किया जाना था। प्रिंसिपल की तरफ से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विभाग के चिकित्सीय स्टाफ से समन्वय स्थापित करने के लिए मेडिकल सपोर्ट के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग के तहत छात्रों को कम से कम 6 फीट की दूरी के साथ बैठाया जाना था। इसके साथ ही यदि स्कूलों में छात्रों की संख्या सौ से अधिक है तो उपस्थिति के आधार पर क्लास दो पालियों में चलाई जाएगी। लेकिन एक पाली में चालीस बच्चों से अधिक की संख्या नही होगी।
जिले के सभी उच्च प्राथमिक विद्यालय मंगलवार से खुल गए। अधिकांश स्कूलों में पचास फीसदी से भी कम बच्चे आए। ऐसे में शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि अभिभावकों के साथ बैठक करके बच्चों को स्कूल भेजने के लिए राजी कराए । प्रभुराम चौहान बीएसए