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Shravasti News: जेहन में उभरी एक के बाद अंजाम दी गईं दरिंदगी की कई वारदात
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श्रावस्ती। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने इकौना क्षेत्र में वर्ष 2025 में दुष्कर्म के आरोपी छोटकऊ उर्फ अलाउद्दीन के साथ हुई पुलिस मुठभेड़ की जांच सीबीआई से करवाने का आदेश दिया है। 19 अगस्त 2026 को वेबसाइट पर अपलोड ओपन कोर्ट के इस आदेश ने जहां पुलिस मुठभेड़ पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं अलाउद्दीन की एक के बाद एक अंजाम दी गई दरिंदगी की वारदात भी लोगों के जेहन में उभर आई हैं।
रिक्शा चलाकर गुजर-बसर करने वाला 36 वर्षीय इकौना निवासी अलाउद्दीन का फूस का घर है। उसने पहली घटना को 16 जुलाई 2011 में अंजाम दिया था। वह 10 वर्षीय बच्ची को गन्ने के खेत में खींचकर ले गया था और दुष्कर्म का प्रयास किया था। विरोध पर गाल काट दिया था और धमकी देकर भाग गया था।
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पीड़िता की मां की तहरीर पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी और 17 अक्तूबर 2025 को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इस मामले में उसे चार वर्ष के साधारण कारावास और 2,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके बाद अलाउद्दीन ने आठ मार्च 2012 को दूसरी घटना को अंजाम दिया और छह साल की मासूम के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी। सत्र न्यायालय ने वर्ष 2014 में उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई। हाईकोर्ट में अपील पर हाईकोर्ट ने भी फांसी की सजा को बरकरार रखा। इस दौरान सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2024 में उसे बरी कर दिया। (संवाद)
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छूटते ही छह वर्षीय मासूम को बनाया शिकार
जेल से वर्ष 2024 में रिहा होने के कुछ ही माह बाद अलाउद्दीन ने नौ मई 2025 को फिर एक छह वर्षीय मासूम को अपना शिकार बनाया। मासूम से दुष्कर्म के बाद उसे लहूलुहान हालत में छोड़कर भाग गया। मासूम की केजीएमयू लखनऊ में सर्जरी की गई और 22 दिन वह ट्रॉमा सेंटर में भर्ती रही। पुलिस जांच के दौरान अलाउद्दीन का नाम सामने आने पर पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की थी।
नेपाल भागने के दौरान हुई मुठभेड़
पुलिस के मुताबिक अलाउद्दीन नेपाल भागने की फिराक में था और 12 मई को पुलिस टीम ने उसकी घेराबंदी की। तत्कालीन थाना प्रभारी अश्विनी कुमार दुबे व एसओजी प्रभारी नितिन यादव सहित 22 पुलिस कर्मियों से घिरे अलाउद्दीन ने पुलिस टीम पर फायर झोंक दिया। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अलाउद्दीन के दोनों पैर में गोली लगी और मुठभेड़ के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने फिर एक प्राथमिकी 113/2025 दर्ज किया। प्राथमिकी दर्ज करने के बाद दुष्कर्म के मुकदमे में डीएनए परीक्षण, शिनाख्त परेड व अन्य साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने तीन अक्तूबर को अलाउद्दीन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
इनसेट-
पीड़िता की मां व क्षेत्र में धार्मिक फंडिंग की चर्चा
क्षेत्र में चर्चा है कि सीरियल रेपिस्ट अलाउद्दीन की पैरवी हाईकोर्ट के अधिवक्ता तबरेज आलम, उच्चतम न्यायालय की अधिवक्ता व कपिल सिब्बल की जूनियर श्रेया रस्तोगी व उच्च न्यायालय के अधिवक्ता नदीम मुर्तजा कर रहे हैं। जिनकी फीस लाखों में है। ऐसे में पीड़ित बच्ची की मां व स्थानीय लोगों में चर्चा है कि अलाउद्दीन के लिए फंडिंग नालसार यूनिवर्सिटी व देश-विदेश के धार्मिक एनजीओ कर रहे हैं।
सीबीआई जांच के घेरे में हैं ये पुलिस कर्मी
हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के घेरे में तत्कालीन इकौना थाना प्रभारी अश्विनी कुमार दुबे, उपनिरीक्षक विवेक पांडेय, सिपाही संदीप यादव, शेषराम वर्मा, उपनिरीक्षक अफजल सलीम, प्रेम चंद्र, आरक्षी राम सिंह, अतुल सिंह, अजय कुमार चौधरी, चंद्रेश सिंह, प्रिंस चौधरी, उपनिरीक्षक विशाल यादव, अवनीश यादव, संदीप यादव, एसओजी प्रभारी नितिन यादव व उनकी टीम के आरक्षी रणविजय सिंह, तौसिफ खान, अवनीश विक्रम, सर्विलांस सेल से अमित कुमार आदि आ गए हैं।