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होशियारी और समानता के लिए बनी स्काउट वर्दी
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प्रशिक्षण के दौरान मौजूद स्काउट गाइड।
- फोटो : SRAWASTI
कटरा (श्रावस्ती)। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान मे पांच दिवसीय स्काउट गाइड प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दूसरे दिन की शुरुआत स्काउट प्रार्थना से की गई। प्रशिक्षण में मुख्य रूप से डायट के वरिष्ठ प्रवक्ता मौजूद रहे। इस दौरान स्काउट व गाइडों को वर्दी की महत्ता के बारे में जानकारी दी गई।
जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन की शुरुआत बुधवार को स्काउट प्रार्थना से हुई। इस दौरान प्रवक्ता गिरीश प्रसाद मिश्रा ने कहा कि स्काउट वर्दी स्काउटिंग का एक व्यापक रूप से विशेषता है। बादेपॉवेल के शब्दों में यह एक देश में सामाजिक प्रतिष्ठा को सभी मतभेदों को छुपाता है और समानता के लिए प्रेरित करता है। मूल वर्दी में एक खाकी बटन अप शर्ट, शॉर्ट्स और टोपी शामिल है। बादेपॉवेल शॉर्ट्स पहना करते थे क्योंकि उनका मानना था कि वह एक स्काउट वयस्क और युवाओं के बीच उम्र की दूरी को कम करती है। वर्दी शर्ट अब अक्सर, नीले, नारंगी, लाल या हरी होती है। शॉर्ट्स अक्सर लंबी पतलून द्वारा प्रतिस्थापित है।
प्रशिक्षक के रूप में मौजूद जिला स्काउट संगठन कमिश्नर रोहित पांडे ने कहा कि स्काउट वर्दी होशियारी और समानता के लिए बनाई गई है। जबकि वह व्यावहारिक भी है। प्रशिक्षक राजेश कुमार यादव ने कहा कि स्काउट वर्दी में सभी के लिए विशिष्ट प्रतीक चिन्ह लकड़ी बिल्ला और विश्व सदस्यता बिल्ला शामिल हैं। जो दुनिया भर में पहना जाता है। इस दौरान प्रशिक्षुओं को टोली विधि, नियम प्रतिज्ञा, प्रार्थना तथा झंडा गीत के बारे में भी जानकारी दी गई। इस मौके पर काईमा इस्लाम, डा. अमित पाठक, दिव्य प्रताप सहित प्रशिक्षु मौजूद रहे।
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जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन की शुरुआत बुधवार को स्काउट प्रार्थना से हुई। इस दौरान प्रवक्ता गिरीश प्रसाद मिश्रा ने कहा कि स्काउट वर्दी स्काउटिंग का एक व्यापक रूप से विशेषता है। बादेपॉवेल के शब्दों में यह एक देश में सामाजिक प्रतिष्ठा को सभी मतभेदों को छुपाता है और समानता के लिए प्रेरित करता है। मूल वर्दी में एक खाकी बटन अप शर्ट, शॉर्ट्स और टोपी शामिल है। बादेपॉवेल शॉर्ट्स पहना करते थे क्योंकि उनका मानना था कि वह एक स्काउट वयस्क और युवाओं के बीच उम्र की दूरी को कम करती है। वर्दी शर्ट अब अक्सर, नीले, नारंगी, लाल या हरी होती है। शॉर्ट्स अक्सर लंबी पतलून द्वारा प्रतिस्थापित है।
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प्रशिक्षक के रूप में मौजूद जिला स्काउट संगठन कमिश्नर रोहित पांडे ने कहा कि स्काउट वर्दी होशियारी और समानता के लिए बनाई गई है। जबकि वह व्यावहारिक भी है। प्रशिक्षक राजेश कुमार यादव ने कहा कि स्काउट वर्दी में सभी के लिए विशिष्ट प्रतीक चिन्ह लकड़ी बिल्ला और विश्व सदस्यता बिल्ला शामिल हैं। जो दुनिया भर में पहना जाता है। इस दौरान प्रशिक्षुओं को टोली विधि, नियम प्रतिज्ञा, प्रार्थना तथा झंडा गीत के बारे में भी जानकारी दी गई। इस मौके पर काईमा इस्लाम, डा. अमित पाठक, दिव्य प्रताप सहित प्रशिक्षु मौजूद रहे।
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