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किसानों व युवाओं की समस्या को लेकर प्रदर्शन

Mon, 21 Sep 2020 10:18 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 21 Sep 2020 10:18 PM IST
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protest on the problems of farmers and youth
श्रावस्ती। किसान व युवाओं की समस्या को लेकर सोमवार को सपा ने मोर्चा खोल दिया। सभी तहसील मुख्यालय पर सपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सभी एसडीएम को सौंपा।
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सरकारी संस्थाओं के हो रहे निजीकरण व बेरोजगारी सहित कई मुद्दों को लेकर सोमवार को सपा सड़क पर उतर आई। इस दौरान सभी तहसील मुख्यालयों पर सपाइयों ने प्रदर्शन कर राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
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प्रदर्शन के दौरान इकौना तहसील में सपाइयों का नेतृत्व वरिष्ठ सपा नेता अमर यादव ने किया। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस समय अराजकता की स्थिति है। कोरोना संकट प्रदेश में बढ़ता जा रहा है। इससे हजारों मौत भी हो चुकी है।
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लेकिन अस्पताल में इलाज की सुचारु व्यवस्था नहीं है। अव्यवस्था का आलम यह है कि प्रदेश के दो मंत्री भी अपनी जान गवां चुके हें। जबकि कई अन्य संक्रमित है। वेंटीलेटर व पीपी किट का पूरे प्रदेश में अभाव है, जहां वेंटीलेटर है, वहां स्टाफ नहीं। स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई है। यही स्थिति किसानों की भी है।
किसान पूरी तरह से बदहाल है। श्रावस्ती में ही देख ले तो गन्ना किसानों का करोड़ों रुपये चिल्वरिया चीनी मिल पर बकाया है। किसानों को खाद बीज कीटनाशक भी समय पर नहीं मिल रहा है। इसके लिए उन्हें लाठियां खानी पड़ रही है।
सरकार ने जो किसानों की आय दोगुनी करने का झूठा वादा किया था, वह आज सबके सामने है। रोजगार के मुद्दे पर भी यह सरकार धराशायी हो चुकी है। रोजगार के लिए युवाओं को सड़क पर उतर कर बेरोजगारी दिवस मनाना पड़ रहा है।
लाकडाउन के नाम कर्मचारियों की छंटनी हो रही है। आज प्रदेश में विकास का पहिया पूरी तरीके से रुक चुका है। सभी जिलों में मनरेगा मजदूरों की मजदूरी बकाया है। बिजली के दामों की वृद्धि, मिलावट खोरी, महंगाई लोगों की कमर तोड़ दे रही है। जहां पूरा प्रदेश आर्थिक मंदी के कारण भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है, वहीं श्रावस्ती जिले में पुलिस व राजस्व विभाग से मास्क के नाम पर अवैध वसूली कराई जा रही है।
सरकारी संस्थाओं का बंद हो निजीकरण
राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन में मांग किया कि सरकारी संस्थाओं का निजीकरण बंद हो। बेहाल स्वास्थ्य सेवाएं अच्छी हो। पांच वर्ष का संविदा कानून पर विचार बंद हो। बदहाल बिजली व्यवस्था ठीक हो। कोरोना संकट काल में स्वास्थ्य सेवाओं में अनियमितता बंद हो। किसानों का यूरिया संकट दूर हो।

यूपी में बीएड प्रवेश परीक्षा में दलित छात्रों के निशुल्क प्रवेश पर लगाई गई रोक खत्म हो। सरकारी सेक्टर में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाये जाय। आरक्षण व्यवस्था को ठीक से लागू किया जाय। वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय दिया जाय। बिजली बिल, डीजल के दामों में बढ़ोतरी से किसानों को खेती करने में परेशानी हो रही है। संसद में पारित किसान विरोधी कानून वापस हो। 50 वर्ष पर रिटायर वाला कानून वापस लिया जाय।
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