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अस्पतालों में मरीजों को लिख रहे बाहर की दवाएं
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श्रावस्ती। जिला अस्पताल में मरीजों की जेब काटी जा रही है। मरीजों को सरकारी दवा देने के बजाए उन्हें मेडिकल स्टोर से दवा लाने पर मजबूर किया जा रहा है। यही नहीं मेडिकल स्टोर से दवा लाने के लिए सरकारी पर्चे का ही इस्तेमाल किया जाता है। यही स्थिति जिले की अन्य सीएचसी व पीएचसी का भी है। जहां अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर पर मरीजों की कतार लगी हुई है। वहीं जन औषधि केंद्र पर सन्नाटा पसरा हुआ है।
मरीजों को अस्पताल में ही निशुल्क दवा देने का दावा हो रहा है। वहीं दूसरी ओर जिले का संयुक्त जिला चिकित्सालय दवा के नाम पर मरीजों की जेब काट रहा है। यहां आने वाले मरीजों को चिकित्सक अस्पताल में उपलब्ध दवा या फिर जन औषधि केंद्र पर उपलब्ध दवा लिखने के बजाए मेडिकल स्टोर से दवा लाने के लिए मजबूर कर रहे है। ऐसा ही एक मामला संयुक्त जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी यूनिट में देखने को मिला।
यहां सोमवार देर शाम को अनूप नाम का एक मरीज आपात स्थिति में अस्पताल लाया गया था। यहां मौजूद चिकित्सक ने उसकी जांच करने के बाद उसे सरकारी पर्चे पर छह दवाएं लिख कर बाहर मेडिकल स्टोर से लाने को कहा। इसमें से अधिकांश दवाएं अस्पताल में ही मौजूद थी। इसके बाद भी अस्पताल से निशुल्क दवाएं दिलवाने के बजाए मेडिकल स्टोर भेजा गया। ऐसे ही एक अन्य मरीज जो पेट दर्द से पीड़ित था, उसके पर्चे के पीछे मेडिकल स्टोर से दवाएं लाने के लिए लिख दिया गया। जबकि इमरजेंसी यूनिट में लगभग सभी आवश्यक दवाएं मौजूद रहनी चाहिए।
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इस तरह का मामला केवल संयुक्त जिला चिकित्सालय में ही न होकर जिले के सभी सीएचसी व पीएचसी में है। जहां जन औषधि केंद्र के सामने सन्नाटा व मेडिकल स्टोर से सामने मरीज व तीमानदार की भीड़ देखी जा रही है।
तीस प्रतिशत तक ले रहे कमीशन
मरीजों की जेब कटाने के पीछे चिकित्सक का उद्देश्य मोटा कमीशन हथियाना है। मेडिकल स्टोर पर चिकित्सक अपने सेटिंग की दवाएं खुद ही रखवाते है। जिस पर तीस फीसदी तक कमीशन वसूल किया जाता है।
पहले भी हो चुकी शिकायत
सरकारी पर्चे पर बाहर की दवाएं लिखने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी संयुक्त जिला चिकित्सालय में कमीशन लेकर दवा लिखने की शिकायत उच्चाधिकारियों को मिली थी, लेकिन दो दिन शोर होने के बाद मामला पुराने ढर्रे पर ही चला गया।
जन औषधि केंद्र महज दिखावा
जन औषधि केंद्र जिला अस्पताल सहित कई अन्य स्थानों पर खुले हुए है। उन पर मात्र औपचारिकता के लिए ही कुछ दवाएं उपलब्ध रहती हैं। वहीं चिकित्सक भी जन औषधि केंद्र की दवाएं लिखने पर परहेज कर रहे है। जिसके चलते वहां मरीज शायद ही कभी दवा खरीदने के लिए जाते हो।
जिले के सीएचसी व पीएचसी को ड्रग कारपोरेशन व सीएमएसडी से दवाएं उपलब्ध कराई जाती है। जिसके चलते सभी सीएचसी व पीएचसी में रेबीज व एंटी स्नेक वैक्सीन के साथ अन्य जीवन रक्षक दवाएं भी उपलब्ध हैं। - डॉ एपी भार्गव, सीएमओ
बाक्स में -
जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी यूनिट में दवा बाहर से लिखे जाने की जानकारी मिली है। यदि कोई लिखित शिकायत करें तो कार्रवाई की जाएगी। - डॉ विजय कुमार, सीएमएस
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मरीजों को अस्पताल में ही निशुल्क दवा देने का दावा हो रहा है। वहीं दूसरी ओर जिले का संयुक्त जिला चिकित्सालय दवा के नाम पर मरीजों की जेब काट रहा है। यहां आने वाले मरीजों को चिकित्सक अस्पताल में उपलब्ध दवा या फिर जन औषधि केंद्र पर उपलब्ध दवा लिखने के बजाए मेडिकल स्टोर से दवा लाने के लिए मजबूर कर रहे है। ऐसा ही एक मामला संयुक्त जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी यूनिट में देखने को मिला।
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यहां सोमवार देर शाम को अनूप नाम का एक मरीज आपात स्थिति में अस्पताल लाया गया था। यहां मौजूद चिकित्सक ने उसकी जांच करने के बाद उसे सरकारी पर्चे पर छह दवाएं लिख कर बाहर मेडिकल स्टोर से लाने को कहा। इसमें से अधिकांश दवाएं अस्पताल में ही मौजूद थी। इसके बाद भी अस्पताल से निशुल्क दवाएं दिलवाने के बजाए मेडिकल स्टोर भेजा गया। ऐसे ही एक अन्य मरीज जो पेट दर्द से पीड़ित था, उसके पर्चे के पीछे मेडिकल स्टोर से दवाएं लाने के लिए लिख दिया गया। जबकि इमरजेंसी यूनिट में लगभग सभी आवश्यक दवाएं मौजूद रहनी चाहिए।
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इस तरह का मामला केवल संयुक्त जिला चिकित्सालय में ही न होकर जिले के सभी सीएचसी व पीएचसी में है। जहां जन औषधि केंद्र के सामने सन्नाटा व मेडिकल स्टोर से सामने मरीज व तीमानदार की भीड़ देखी जा रही है।
तीस प्रतिशत तक ले रहे कमीशन
मरीजों की जेब कटाने के पीछे चिकित्सक का उद्देश्य मोटा कमीशन हथियाना है। मेडिकल स्टोर पर चिकित्सक अपने सेटिंग की दवाएं खुद ही रखवाते है। जिस पर तीस फीसदी तक कमीशन वसूल किया जाता है।
पहले भी हो चुकी शिकायत
सरकारी पर्चे पर बाहर की दवाएं लिखने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी संयुक्त जिला चिकित्सालय में कमीशन लेकर दवा लिखने की शिकायत उच्चाधिकारियों को मिली थी, लेकिन दो दिन शोर होने के बाद मामला पुराने ढर्रे पर ही चला गया।
जन औषधि केंद्र महज दिखावा
जन औषधि केंद्र जिला अस्पताल सहित कई अन्य स्थानों पर खुले हुए है। उन पर मात्र औपचारिकता के लिए ही कुछ दवाएं उपलब्ध रहती हैं। वहीं चिकित्सक भी जन औषधि केंद्र की दवाएं लिखने पर परहेज कर रहे है। जिसके चलते वहां मरीज शायद ही कभी दवा खरीदने के लिए जाते हो।
जिले के सीएचसी व पीएचसी को ड्रग कारपोरेशन व सीएमएसडी से दवाएं उपलब्ध कराई जाती है। जिसके चलते सभी सीएचसी व पीएचसी में रेबीज व एंटी स्नेक वैक्सीन के साथ अन्य जीवन रक्षक दवाएं भी उपलब्ध हैं। - डॉ एपी भार्गव, सीएमओ
बाक्स में -
जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी यूनिट में दवा बाहर से लिखे जाने की जानकारी मिली है। यदि कोई लिखित शिकायत करें तो कार्रवाई की जाएगी। - डॉ विजय कुमार, सीएमएस