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बाल विवाह न करने की ली शपथ
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जेतवन इंटर कालेज में बाल विवाह उन्मूलन की शपथ लेते छात्र व बाल भिक्षु।
- फोटो : SRAWASTI
कटरा (श्रावस्ती)। जेतावन इंटर कॉलेज कटरा में शनिवार को बाल विवाह उन्मूलन की शपथ दिलाई गई। इसके लिए आयोजित समारोह की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य ने की। इस दौरान छात्र छात्राओं व बाल भिक्षुओं ने बाल विवाह न करने व लोगों को इसके प्रति जागरूक करने की शपथ ली।
विद्यालय के प्रधानाचार्य पवन कुमार सिंह बौद्ध ने कहा कि बाल विवाह पर रोक संबंधी कानून सर्वप्रथम सन् 1929 में पारित किया गया था। बाद में सन् 1949, 1978 और 2006 में इसमें संशोधन किए गए। इस समय विवाह की न्यूनतम आयु बालिकाओं के लिए 18 वर्ष और बालकों के लिए 21 वर्ष निर्धारित की गई है।
भारत में बाल विवाह चिंता का विषय है। बाल विवाह किसी बच्चे को अच्छे स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा के अधिकार से वंचित करता है। कम उम्र में विवाह से लड़के और लड़कियों में शारीरिक, बौद्धिक, मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक प्रभाव पड़ता है। यह एक ऐसा मुद्दा है, जिससे लड़कियां बड़ी संख्या में प्रभावित होती हैं।
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कम उम्र के विवाह के मुख्य कारणों में सांस्कृतिक चलन, सामाजिक परंपराएं और गरीबी है। केंद्र सरकार ने 1929 के बाल विवाह निषेध अधिनियम को निरस्त करके उसके स्थान पर 2006 में अधिक प्रगतिशील बाल विवाह निषेध अधिनियम लाकर इस प्रथा को रोकने की दिशा में अच्छा काम किया है। यह कानून नवंबर 2007 में प्रभावी हुआ।
इस दौरान मौजूद छात्र छात्राओं सहित बौद्ध भिक्षुओं को बाल विवाह न करने व लोगों को इसके प्रति जागरूक करने की शपथ दिलाई गई। इस मौके पर अवधेश कुमार त्रिपाठी, प्रशांत त्रिपाठी, दुष्यंत सिंह, अशोक कुमार शाक्य, काशीराम आदि शिक्षक व छात्र-छात्राएं तथा बाल भिक्षु मौजूद रहे।
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विद्यालय के प्रधानाचार्य पवन कुमार सिंह बौद्ध ने कहा कि बाल विवाह पर रोक संबंधी कानून सर्वप्रथम सन् 1929 में पारित किया गया था। बाद में सन् 1949, 1978 और 2006 में इसमें संशोधन किए गए। इस समय विवाह की न्यूनतम आयु बालिकाओं के लिए 18 वर्ष और बालकों के लिए 21 वर्ष निर्धारित की गई है।
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भारत में बाल विवाह चिंता का विषय है। बाल विवाह किसी बच्चे को अच्छे स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा के अधिकार से वंचित करता है। कम उम्र में विवाह से लड़के और लड़कियों में शारीरिक, बौद्धिक, मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक प्रभाव पड़ता है। यह एक ऐसा मुद्दा है, जिससे लड़कियां बड़ी संख्या में प्रभावित होती हैं।
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कम उम्र के विवाह के मुख्य कारणों में सांस्कृतिक चलन, सामाजिक परंपराएं और गरीबी है। केंद्र सरकार ने 1929 के बाल विवाह निषेध अधिनियम को निरस्त करके उसके स्थान पर 2006 में अधिक प्रगतिशील बाल विवाह निषेध अधिनियम लाकर इस प्रथा को रोकने की दिशा में अच्छा काम किया है। यह कानून नवंबर 2007 में प्रभावी हुआ।
इस दौरान मौजूद छात्र छात्राओं सहित बौद्ध भिक्षुओं को बाल विवाह न करने व लोगों को इसके प्रति जागरूक करने की शपथ दिलाई गई। इस मौके पर अवधेश कुमार त्रिपाठी, प्रशांत त्रिपाठी, दुष्यंत सिंह, अशोक कुमार शाक्य, काशीराम आदि शिक्षक व छात्र-छात्राएं तथा बाल भिक्षु मौजूद रहे।