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अनियमितता पर शाहपुर बरगदहा के तत्कालीन सचिव को नोटिस
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श्रावस्ती। सिरसिया के ग्राम पंचायत शाहपुर बरगहा में ग्राम सचिवालय को सुविधा संपन्न बनाने में तत्कालीन सचिव द्वारा अनियमितता बरती गई। जिसकी जांच सहायक विकास अधिकारी पंचायत इकौना द्वारा की गई थी। जांच में अनियमितता की पुष्टि के बाद डीपीआरओ द्वारा तत्कालीन सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी की गई है। जिसका संतोषजनक जवाब न देने पर उनके विरुद्ध कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। मामला ग्राम सचिवालय में कुर्सी-मेज, कंप्यूटर आदि की खरीद से संबंधित है।
सहायक विकास अधिकारी की जांच में सिरसिया के ग्राम पंचायत शाहपुर बरगहा में उन्होंने देखा कि यहां बना ग्राम सचिवालय अव्यवस्थित है। जिसकी मरम्मत नहीं कराई गई और न ही यहां शौचालय ही बनाया गया। ऐसे में बैठक के दौरान लोग पास में बने सामुदायिक शौचालय का उपयोग करते हैं। निरीक्षण में एक कंप्यूटर सेट, 25 प्लास्टिक की कुर्सी, दो कंप्यूटर मेज, दो दरी, दो पंखा व दो बंद सीसीटीवी कैमरे मिले। जबकि इसके लिए एक लाख 75 हजार रुपये दिए गए थे।
सचिव द्वारा कई सामान की खरीदारी नहीं की गई। यहां सोलर पैनल, डबल बैठटरी इनवर्टर भी नहीं मिला। जबकि इसके लिए 38 हजार रुपये भुगतान किया गया है। पैसा देने के बाद भी सचिवालय में इनवर्टर व पैनल आदि नहीं मिला। इतना ही नहीं कंप्यूटर के मॉनिटर व सीपीयू पर अलग-अलग कंपनी का नाम लिखा मिला। जबकि की-बोर्ड पर कुछ भी लिखा नहीं था। ऐसे में यह प्रतीत होता था कि इसे अलग-अलग खरीदा गया है। कुर्सी आदि की गुणवत्ता बेहद खराब थी। जबकि उच्च क्वालिटी के सामान के पैसे का भुगतान किया गया है। जिसे गंभीरता से लेते हुए डीपीआरओ आनंद प्रकाश श्रीवास्तव द्वारा तत्कालीन सचिव अमरजीत यादव को कारण बताओ नोटिस जारी की गई है। जिसका संतोषजनक जवाब न देने पर उनके विरुद्ध कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है।
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सहायक विकास अधिकारी की जांच में सिरसिया के ग्राम पंचायत शाहपुर बरगहा में उन्होंने देखा कि यहां बना ग्राम सचिवालय अव्यवस्थित है। जिसकी मरम्मत नहीं कराई गई और न ही यहां शौचालय ही बनाया गया। ऐसे में बैठक के दौरान लोग पास में बने सामुदायिक शौचालय का उपयोग करते हैं। निरीक्षण में एक कंप्यूटर सेट, 25 प्लास्टिक की कुर्सी, दो कंप्यूटर मेज, दो दरी, दो पंखा व दो बंद सीसीटीवी कैमरे मिले। जबकि इसके लिए एक लाख 75 हजार रुपये दिए गए थे।
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सचिव द्वारा कई सामान की खरीदारी नहीं की गई। यहां सोलर पैनल, डबल बैठटरी इनवर्टर भी नहीं मिला। जबकि इसके लिए 38 हजार रुपये भुगतान किया गया है। पैसा देने के बाद भी सचिवालय में इनवर्टर व पैनल आदि नहीं मिला। इतना ही नहीं कंप्यूटर के मॉनिटर व सीपीयू पर अलग-अलग कंपनी का नाम लिखा मिला। जबकि की-बोर्ड पर कुछ भी लिखा नहीं था। ऐसे में यह प्रतीत होता था कि इसे अलग-अलग खरीदा गया है। कुर्सी आदि की गुणवत्ता बेहद खराब थी। जबकि उच्च क्वालिटी के सामान के पैसे का भुगतान किया गया है। जिसे गंभीरता से लेते हुए डीपीआरओ आनंद प्रकाश श्रीवास्तव द्वारा तत्कालीन सचिव अमरजीत यादव को कारण बताओ नोटिस जारी की गई है। जिसका संतोषजनक जवाब न देने पर उनके विरुद्ध कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है।
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