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जंगल किनारे बसे गांवों पर बंदरों का कहर, पांच लोगों को किया घायल
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सिरसिया (श्रावस्ती)। सोहेलवा जंगल से सटे गांवों में बंदरों का आतंक है। जिनके हमले में बुधवार को चांद गढ़ी व अहलाद नगर में पांच लोग घायल हो गए। सभी का स्थानीय चिकित्सकों से इलाज कराया जा रहा है। वहीं भिनगा जंगल के आसपास के ग्रामीण भी बंदरों के आतंक से परेशान हैं।
पश्चिमी सोहेलवा सहित जंगलों के किनारे बसे गांवों में बंदरों का आतंक है। बुधवार को सोहेलवा जंगल से सटे सिरसिया थाना क्षेत्र के ग्राम चांद गढ़ी निवासी प्रदीप की पत्नी पर बंदर ने हमला कर उसे घायल कर दिया। उसे बचाने पहुंचे गांव के ही लल्लू पुत्र कमला पर बंदर ने हमला कर दिया।
वहीं थाना क्षेत्र के ही ग्राम अहलाद नगर निवासी भगौती प्रसाद पाठक अपने धान का खेत देखने गया था। जहां रास्ते में मौजूद बंदर ने हमला कर उसे घायल कर दिया। उसे बचाने पहुंचे गांव के ही कालिया पुत्र दाताराम व सत्यप्रकाश पुत्र सहदेव भी हमले में घायल हो गए। उनका इलाज स्थानीय चिकित्सकों से कराया जा रहा है।
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वहीं भिनगा नगर से सटे रमना, मंगलभट्ठा, कुन्नपुर, नौसहरा, कहारनपुरवा, मटखनवा, लोनियनपुरवा, टड़वा, बनकटवा, बगुरइयां, बालू पुरवा, सिसवा, वर्गीवर्गा, चहलवा, मदरहवा, खरगौरा, पूरे खैरी सहित कई अन्य गांवों में भी किसान बंदरों के आतंक से जूझ रहे हैं।
इससे कलक्ट्रेट कालोनी, विकास भवन, पुलिस लाइन सहित आसपास बने सरकारी कार्यालय व आवास भी वंचित नहीं हैं। जहां जरा सी लापरवाही पर बंदर न सिर्फ घर का सामान साफ कर देते हैं, बल्कि विरोध करने पर लोगों पर हमला भी कर रहे हैं।
इसकी कई शिकायतों के बाद भी वन विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इस संबंध में प्रभागीय वनाधिकारी एपी यादव ने बताया कि गांवों में रहने वाले यह बंदर जंगल के नहीं है। यदि इनमें से कोई बंदर लोगों को काटता है तो उसे चिह्नित कराया जाएगा।
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पश्चिमी सोहेलवा सहित जंगलों के किनारे बसे गांवों में बंदरों का आतंक है। बुधवार को सोहेलवा जंगल से सटे सिरसिया थाना क्षेत्र के ग्राम चांद गढ़ी निवासी प्रदीप की पत्नी पर बंदर ने हमला कर उसे घायल कर दिया। उसे बचाने पहुंचे गांव के ही लल्लू पुत्र कमला पर बंदर ने हमला कर दिया।
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वहीं थाना क्षेत्र के ही ग्राम अहलाद नगर निवासी भगौती प्रसाद पाठक अपने धान का खेत देखने गया था। जहां रास्ते में मौजूद बंदर ने हमला कर उसे घायल कर दिया। उसे बचाने पहुंचे गांव के ही कालिया पुत्र दाताराम व सत्यप्रकाश पुत्र सहदेव भी हमले में घायल हो गए। उनका इलाज स्थानीय चिकित्सकों से कराया जा रहा है।
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वहीं भिनगा नगर से सटे रमना, मंगलभट्ठा, कुन्नपुर, नौसहरा, कहारनपुरवा, मटखनवा, लोनियनपुरवा, टड़वा, बनकटवा, बगुरइयां, बालू पुरवा, सिसवा, वर्गीवर्गा, चहलवा, मदरहवा, खरगौरा, पूरे खैरी सहित कई अन्य गांवों में भी किसान बंदरों के आतंक से जूझ रहे हैं।
इससे कलक्ट्रेट कालोनी, विकास भवन, पुलिस लाइन सहित आसपास बने सरकारी कार्यालय व आवास भी वंचित नहीं हैं। जहां जरा सी लापरवाही पर बंदर न सिर्फ घर का सामान साफ कर देते हैं, बल्कि विरोध करने पर लोगों पर हमला भी कर रहे हैं।
इसकी कई शिकायतों के बाद भी वन विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इस संबंध में प्रभागीय वनाधिकारी एपी यादव ने बताया कि गांवों में रहने वाले यह बंदर जंगल के नहीं है। यदि इनमें से कोई बंदर लोगों को काटता है तो उसे चिह्नित कराया जाएगा।