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Shravasti News: सीएचसी मल्हीपुर में चिकित्सकों की कमी
Fri, 20 Feb 2026 12:36 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Fri, 20 Feb 2026 12:36 AM IST
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सीएचसी मल्हीपुर। - संवाद
तुलसीपुर। सीमावर्ती विकासखंड जमुनहा आज भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की आस देख रहा है। क्षेत्रीय ग्रामीणों के इलाज का जिम्मा उठाने वाला सीएचसी मल्हीपुर खुद चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। इसके चलते बाजारों में अवैध नर्सिंग होम व मेडिकल स्टोरों की भरमार है। मुख्यालय से दूरी अधिक होने के कारण लोग इनके चंगुल में फंस रहे हैं।
विकासखंड जमुनहा की लाखों की आबादी के इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मल्हीपुर व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जमुनहा, हरदत्त नगर गिरंट और नासिरगंज संचालित हैं।मल्हीपुर सीएचसी में सात चिकित्सकों के सापेक्ष अधीक्षक सहित सिर्फ चार चिकित्सक तैनात हैं।
अधीक्षक डॉ. रविन्द्र सोनकर के साथ ही एमडी डॉ. सिद्धेश वर्मा, एमबीबीएस डॉ. खुर्सीद अहमद व डॉ. पंकज अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं है। यही नहीं, बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन, दंत चिकित्सक आदि की भी तैनाती नहीं है, जिसके चलते स्थानीय लोग जिला मुख्यालय या फिर नर्सिंग होम का सहारा ले रहे हैं।
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नेपाल सीमा के पास स्थित पीएचसी जमुनहा में एमबीबीएस चिकित्सक डॉ. सावंत राव, बीएमएस डॉ. सुमन बाबू थारू, आयुष चिकित्सक डॉ. दीपिका, एएनएम सुषमा मिश्रा, फार्मासिस्ट देवराज लाल व लैब टेक्नीशियन अंकित श्रीवास्तव की तैनाती है।
यहां स्टाफ नर्स, वार्ड बॉय और सफाईकर्मी की कमी बनी हुई है। यही हाल पीएचसी हरदत्त नगर गिरंट और नासिरगंज का भी है, जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
सीमावर्ती गांव सागरगांव, बेलरी, गंगाभगड, लालबोझा, दर्बेश गांव, सोनपुर, श्रीनगर व बालापुर आदि की दूरी पीएचसी जमुनहा से लगभग 10 से 15 किमी है। सीएचसी मल्हीपुर से दूरी और अधिक है। यही नहीं, सीमावर्ती क्षेत्र में परिवहन सेवाओं की स्थित भी खराब है, जिसके चलते ग्रामीण मेडिकल स्टोरों व फर्जी नर्सिंग होम पर इलाज करवाते देखे जाते हैं।
बुधवार को इंडो-नेपाल सीमा स्थित दर्बेश गांव मोड़ पर मेडिकल स्टोर में महिला का इलाज होता मिला। मेडिकल स्टोर संचालक शिवम यादव से जब डिग्री के संबंध में जानकारी ली गई, तो उसने बताया कि कोई डिग्री नहीं है, काम करने के तजुर्बे से छोटी-मोटी बीमारी का इलाज कर देते हैं।
जमुनहा बजार निवासी संतोष जायसवाल, अजय कुमार वर्मा, पहलवान वर्मा, अवधेश कुमार, अमित सिंह, विकास कुमार, हेमंत कुमार आदि ने बताया कि जगह-जगह बिना मानक खुले नर्सिंगहोमों से भ्रमित होकर लोग यहां इलाज करवाने चले जाते हैं। कई बार मरीजों की जान पर बन आती है।
ऐसे में जिला प्रशासन को अभियान चलाकर फर्जी व मानक विहीन नर्सिंग होम ओर मेडिकल स्टोर पर कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही पीएचसी पर चिकित्सकों के रिक्त पदों पर तैनाती के साथ-साथ सीएचसी मल्हीपुर का उच्चीकरण करवाया जाना चाहिए।
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विकासखंड जमुनहा की लाखों की आबादी के इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मल्हीपुर व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जमुनहा, हरदत्त नगर गिरंट और नासिरगंज संचालित हैं।मल्हीपुर सीएचसी में सात चिकित्सकों के सापेक्ष अधीक्षक सहित सिर्फ चार चिकित्सक तैनात हैं।
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अधीक्षक डॉ. रविन्द्र सोनकर के साथ ही एमडी डॉ. सिद्धेश वर्मा, एमबीबीएस डॉ. खुर्सीद अहमद व डॉ. पंकज अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं है। यही नहीं, बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन, दंत चिकित्सक आदि की भी तैनाती नहीं है, जिसके चलते स्थानीय लोग जिला मुख्यालय या फिर नर्सिंग होम का सहारा ले रहे हैं।
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नेपाल सीमा के पास स्थित पीएचसी जमुनहा में एमबीबीएस चिकित्सक डॉ. सावंत राव, बीएमएस डॉ. सुमन बाबू थारू, आयुष चिकित्सक डॉ. दीपिका, एएनएम सुषमा मिश्रा, फार्मासिस्ट देवराज लाल व लैब टेक्नीशियन अंकित श्रीवास्तव की तैनाती है।
यहां स्टाफ नर्स, वार्ड बॉय और सफाईकर्मी की कमी बनी हुई है। यही हाल पीएचसी हरदत्त नगर गिरंट और नासिरगंज का भी है, जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
सीमावर्ती गांव सागरगांव, बेलरी, गंगाभगड, लालबोझा, दर्बेश गांव, सोनपुर, श्रीनगर व बालापुर आदि की दूरी पीएचसी जमुनहा से लगभग 10 से 15 किमी है। सीएचसी मल्हीपुर से दूरी और अधिक है। यही नहीं, सीमावर्ती क्षेत्र में परिवहन सेवाओं की स्थित भी खराब है, जिसके चलते ग्रामीण मेडिकल स्टोरों व फर्जी नर्सिंग होम पर इलाज करवाते देखे जाते हैं।
बुधवार को इंडो-नेपाल सीमा स्थित दर्बेश गांव मोड़ पर मेडिकल स्टोर में महिला का इलाज होता मिला। मेडिकल स्टोर संचालक शिवम यादव से जब डिग्री के संबंध में जानकारी ली गई, तो उसने बताया कि कोई डिग्री नहीं है, काम करने के तजुर्बे से छोटी-मोटी बीमारी का इलाज कर देते हैं।
जमुनहा बजार निवासी संतोष जायसवाल, अजय कुमार वर्मा, पहलवान वर्मा, अवधेश कुमार, अमित सिंह, विकास कुमार, हेमंत कुमार आदि ने बताया कि जगह-जगह बिना मानक खुले नर्सिंगहोमों से भ्रमित होकर लोग यहां इलाज करवाने चले जाते हैं। कई बार मरीजों की जान पर बन आती है।
ऐसे में जिला प्रशासन को अभियान चलाकर फर्जी व मानक विहीन नर्सिंग होम ओर मेडिकल स्टोर पर कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही पीएचसी पर चिकित्सकों के रिक्त पदों पर तैनाती के साथ-साथ सीएचसी मल्हीपुर का उच्चीकरण करवाया जाना चाहिए।