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ठंड के साथ जंगलों में बढ़ी अवैध कटान
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मल्हीपुर बाजार में जंगल की लकड़ी की जलौनी बेचने के लिए सुबह से लगती बाजार।
- फोटो : SRAWASTI
मल्हीपुर (श्रावस्ती)। ठंड शुरू होते ही जंगलों से अवैध कटान करके कीमती लकड़ी को बाजार पहुंचाया जा रहा है। सबसे अधिक कटान ककरदरी रेंज के जमुनहा कानी बोझी व लक्ष्मनपुर कोठी क्षेत्र में हो रही है। इन मार्गों पर सुबह अवैध कटान करने वाले लकड़हारों की कतार लग जाती है। इस कार्य में वन विभाग के कुछ कर्मचारी भी मिले हुए हैं। इसके चलते अवैध कटान करने वालों पर कार्रवाई नहीं हो पाती।
तराई का पारा जैसे जैसे गिरता जा रहा है। वैसे वैसे लकड़ी की मांग बढ़ती जा रही है। इस मांग को पूरा करने के लिए लकड़हारों की कुल्हाड़ी जंगल के कीमती पेड़ों पर चल रही है। प्रतिदिन सैकड़ों टन लकड़ी जंगल से काट कर बाजार पहुंचाई जा रही है।
ऐसा ही कुछ नजारा शनिवार तड़के ककरदरी जंगल से सटे जमुनहा, कानी बोझी, लक्षणपुर बैराज व मल्हीपुर बाजार में देखने को मिला। यहां जंगल से लकड़ी काट कर साइकिलों से बाजार में पहुंचाई जा रही है। इसमें ज्यादातर सागौन व साखू की लकड़ी है। औसतन प्रति साइकिल पर दो से तीन क्विंटल लकड़ी लदी होती है।
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इस कार्य में लकड़हारों के साथ वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिली भगत होती है। इसी के चलते सुबह चार से पांच बजे के मध्य बैराज से यह लकड़हारे साइकिल लेकर खुलेआम गुजरते हें, जबकि बैराज पर ही वन विभाग का एक बैरियर भी है। इस संबंध में डीएफओ एपी यादव बताते हैं कि मामले की जानकारी नहीं थी। विशेष टीम भेज कर इस अवैध कटान की जांच कराई जाएगी।
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तराई का पारा जैसे जैसे गिरता जा रहा है। वैसे वैसे लकड़ी की मांग बढ़ती जा रही है। इस मांग को पूरा करने के लिए लकड़हारों की कुल्हाड़ी जंगल के कीमती पेड़ों पर चल रही है। प्रतिदिन सैकड़ों टन लकड़ी जंगल से काट कर बाजार पहुंचाई जा रही है।
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ऐसा ही कुछ नजारा शनिवार तड़के ककरदरी जंगल से सटे जमुनहा, कानी बोझी, लक्षणपुर बैराज व मल्हीपुर बाजार में देखने को मिला। यहां जंगल से लकड़ी काट कर साइकिलों से बाजार में पहुंचाई जा रही है। इसमें ज्यादातर सागौन व साखू की लकड़ी है। औसतन प्रति साइकिल पर दो से तीन क्विंटल लकड़ी लदी होती है।
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इस कार्य में लकड़हारों के साथ वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिली भगत होती है। इसी के चलते सुबह चार से पांच बजे के मध्य बैराज से यह लकड़हारे साइकिल लेकर खुलेआम गुजरते हें, जबकि बैराज पर ही वन विभाग का एक बैरियर भी है। इस संबंध में डीएफओ एपी यादव बताते हैं कि मामले की जानकारी नहीं थी। विशेष टीम भेज कर इस अवैध कटान की जांच कराई जाएगी।