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तटबंध न हुआ पूरा तो राप्ती मचाएगी तांडव

Wed, 01 Jul 2020 10:03 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2020 10:03 PM IST
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If the embankment is not completed, there will be flood in rapti
श्रावस्ती। नेपाल के दक्षिण हिमालय से निकलने वाली राप्ती में 21 जून को हल्की बरसात के बाद बाढ़ जैसी स्थिति हो गई। यह स्थिति तब तक रहेगी जब तक तिलकपुर तटबंध का निर्माण पूरा नहीं हो जाता। राप्ती के मुहाने पर बसे लोग नदी के इतिहास को लेकर भयभीत हैं। लोगों का मानना है कि यदि नदी में एक वर्ष बाढ़ नहीं आई तो दूसरे वर्ष राप्ती का विकराल तांडव होता है। ऐसा ही वर्ष 1922 से लगातार राप्ती का इतिहास रहा है। इसका नमूना नदी ने पहले ही दिखा दिया है। नदी के तांडव को लेकर ग्रामीण तो भयभीत हैं ही, साथ ही प्रशासन भी पशोपेश की स्थिति में है।
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नेपाल में लगभग 152 किलोमीटर होकर राप्ती बहराइच के नानपारा तहसील के ग्राम गनेशपुर से देश में प्रवेश करती है। तहसील भिनगा में विकास खंड जमुनहा की सीमा पर भोजपुर गांव के पास नदी जिले में प्रवेश करती है। राप्ती अपनी पूरी लंबाई में दक्षिण की ओर बहती हुई भिनगा को पार करके तहसील इकौना के पूर्वोत्तर कोने में डिंगुराजोत के पास बलरामपुर जिले में प्रवेश करती है। श्रावस्ती गठन के पूर्व वर्ष 1922 में बाढ़ से भिनगा तहसील के ग्राम अशरफ नगर के पास राप्ती दक्षिण त्रिमुख हो गई थी। झुनझुनिया घाट के पास यह भाकला नदी में प्रवेश कर गई।
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लगभग पचास वर्ष पूर्व आई बाढ़ में राप्ती अशरफ नगर से झुनझुनिया घाट के इस मार्ग को छोड़ कर जमुनहा तथा हरिहरपुररानी की सीमा को बनाते हुए झुनझुनिया घाट से छह किलोमीटर व महादेवा के पास भाकला में प्रवेश कर गई। इस प्रकार महादेव में ही राप्ती भाकला तट में बहने लगी है। राप्ती का मुख्य जलश्रोत नेपाली क्षेत्र के पहाड़ों पर हुई बरसात ही है। बरसात का पानी जब जिले में प्रवेश करता है तो वह विकराल स्थिति बना देता है। अब तक कई बार राप्ती की बाढ़ का तांडव हुआ। इस दौरान जनधन की हानि भी हुई। सबसे बड़ा नुकासान वर्ष 2014 के आए बाढ़ में हुआ।
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तटबंध जब तक रहेगा अधूरा तब तक नदी ढाएगी कहर
राप्ती नेपाल में लगभग 152 किलोमीटर का सफर तय करके श्रावस्ती के भोजपुर गांव से जिले में प्रवेश करती है। वर्ष 1996-97 में इस नदी की विभीषिका को रोकने के लिए भारत सरकार ने जमुनहा में कलकलवा तटबंध का निर्माण कराया था। कलकलवा मार्जिनल तटबंध की लंबाई 19 किलोमीटर है। इस तटबंध में 16 स्थानों में गैप है।
जिसके चलते लगभग पचास गांव व 14870 हेक्टेअर कृषि भूमि प्रतिवर्ष जलमगभन हो जाती है। इस तटबंध में पानी आने से करीब एक लाख से अधिक जनसंख्या भी प्रभावित होती है। जब तक इस तटबंध के बीच का गैप नहीं भरा जाता है तब तक नदी का तांडव हरिहरपुररानी व जमुनहा क्षेत्र में जारी रहेगा।
2014 की बाढ़ ने रचा था नया इतिहास
पंद्रह अगस्त 2014 को जब ध्वजा रोहण हो रहा था। उसी समय नेपाल सरकार ने सूचना भेजी थी कि नेपाल में बादल फटने से राप्ती में अचानक बाढ़ आ गई है। जब तक जिला प्रशासन इस सूचना पर कुछ कर पाता। कुछ ही घंटों में राप्ती में पानी भिनगा तक पहुंच गया। इस बाढ़ में कई स्थानीय लोगों की मौत हुई ही। इसके साथ ही नेपाल से भी कई लाशें बह कर आई थी। जो खेतों में इधर उधर दिखाई दी थी। सबसे खराब स्थिति भिनगा बहराइच स्टेट हाइवे पर लक्ष्मननगर के पास नजर आई।
जहां एक पुल ही नदी के थपेड़ों में बह गया। इसके चलते एक महीने तक भिनगा बहराइच मार्ग बाधित रहा। केवल आवश्यक कार्य के लिए नौकाओं से रास्ता पार कराने की व्यवस्था हुई थी। इसी प्रकार की स्थिति 2017 में देखने को मिली। जब स्टेट हाइवे की सड़क कई जगह बह गई। पूरे जिले में 215 गांव का संपर्क अन्य रास्तों से कट गया। हरिहरपुररानी, जमुनहा व इकौना के कई क्षेत्रों में यातायात के लिए नौकाओं का सहारा लेना पड़ा। इन क्षेत्रों में हालत इतने खराब थे कि एनडीआरएफ को मैदान में उतारना पड़ा।
श्रावस्ती में बाढ़ के तांडव का इतिहास
श्रावस्ती गठन के पूर्व सन 1922 से 1925 तक प्रति वर्ष बाढ़ आती रही है। इसके पश्चात वर्ष 1934, 1936 व 1948 में बाढ़ की स्थिति अत्यंत गंभीर रही। वर्ष 1954-55, 1960, 1961 तथा वर्ष 1963 में बाढ़ आई। वर्ष 1965 व 66 में भी बाढ़ की स्थिति हुई। वर्ष 1969 की बाढ़ का जिले के इतिहास में विशेष स्थान है। इसका मुकाबला विगत वर्षों में आई बाढ़ से नहीं किया जा सकता है। वर्ष 1978, 1980, 1981, 1982 तथा 1983 की बाढ़ भी अभूतपूर्व थी।
सन 1985 व 1986 में बाढ़ का प्रकोप आंशिक रहा। वर्ष 1987 में वर्षा के कारण जलभराव की स्थिति रही। 1988 में हल्की बाढ़ आई। 1989 में तीन दिनों तक वर्षा होने के कारण राप्ती का जलस्तर 16 जुलाई 1989 को हाई फ्लड लेबल तक पहुंच गया था। जिसके कारण बाढ़ की भयावह स्थिति उत्पन्न हो गई थी। वर्ष 1990 में बाढ़ से इस जिले की एक तहसील भी प्रभावित रही। 1991, 1992 में बाढ़ तो नहीं आई, लेकिन तहसील भिनगा में कटान के कारण व्यापक क्षति हुई। इसी प्रकार वर्ष 1993, 94, 95, 2001 में भी स्थिति वही रही। वर्ष 2002 - 04 में वर्षा नगण्य रही। 2005 में अतिवृष्टि के कारण जलभराव व कटान की स्थिति रही।
2006 के अगस्त में अतिवृष्टि व नेपाल राष्ट्र में भारी बरसात के कारण अचानक बाढ़ आ गई। इसके चलते जिले के 97 गांव प्रभावित हुए। इसी प्रकार 2007 की जुलाई में अतिवृष्टि से आई बाढ़ से भिनगा तहसील के 71 व इकौना तहसील के 111 ग्राम प्रभावित हुए। 2008 में स्थिति सामान्य रही तो वर्ष 2009 में अतिवृष्टि से राप्ती का जल स्तर बढ़ने से भिनगा के 33 व इकौना के 28 गांव प्रभावित रहे। वर्ष 2010, 11, 12, 13 में आंशिक बाढ़ की स्थिति रही। जबकि वर्ष 2014 में नेपाल में बादल फटने के कारण पंद्रह अगस्त को जिले में बाढ़ की भारी तबाही झेलनी पड़ी। वर्ष 2015 से 19 तक बाढ़ की स्थिति सामान्य रही।

एडीएम योगानंद पांडे ने बताया कि राप्ती की बाढ़ का इतिहास बहुत भयावह है। वर्ष 2014 व 2017 में आई बाढ़ में हुए जनधन हानि के आंकड़े प्रशासन के पास मौजूद हैं। हम उन्हीं अनुभवों के साथ भविष्य में आने वाली बाढ़ की तैयारी कर रहे हैं।
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