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किसान दुरुस्त कराएं बैंक खाता तो मिले धान खरीद का पैसा
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श्रावस्ती। जिले में धान खरीद केंद्रों पर अपनी उपज देने के बावजूद कई किसानों का करोड़ों रुपये उनके खाते में नहीं भेजा जा रहा है। जिसका कारण किसानों का बैंक खाता ग्रामीण बैंक में होना अथवा उनका एनपीसीआई न होना बताया जा रहा है। इसके चलते जिले में करीब 25 प्रतिशत किसानों का लगभग पांच करोड़ रुपये फंसा पड़ा है।
जिले में समर्थन मूल्य योजना के तहत 20,900 मैट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। 31 दिसंबर तक जिले में 13 हजार मैट्रिक टन धान खरीद की जा चुकी है। जो लक्ष्य का 63 प्रतिशत है। वहीं किसानों को अपनी उपज का कुल 24 करोड़ 50 लाख रुपये मिलना था। जिसके सापेक्ष किसानों को 19 करोड़ 50 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। जबकि पांच करोड़ रुपये अब भी किसानों का बकाया है। जिसका भुगतान किसानों के खाते में नहीं जा पा रहा है। यह पैसा किसानों के खाते में तभी भेजा जा सकेगा। जब किसान अपने बैंक खाते को आधार से लिंक कराने के साथ ही उसे नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) से मैच करा लें। बिना ऐसा किए उनके खाते में धान मूल्य का भुगतान नहीं हो सकता है। क्योंकि विभाग की ओर से खाते में भेजा जाने वाला पैसा इनवैलिड दिखा रहा है।
इतना ही नहीं जिन किसानों के बैंक खाते ग्रामीण बैंकों में हैं। उनका एनपीसीआई से मैच नहीं हो सकता। ऐसे में किसानों को भुगतान लेने के लिए अपना बैंक खाता किसी अन्य बैंक में खुलवाना होगा। ताकि उन्हें धान मूल्य का भुगतान किया जा सके। इस बारे में जिला खाद्य विपणन अधिकारी नरेंद्र तिवारी बताते हैं कि जिन किसानों का बैंक खाता ग्रामीण बैंकों में है। वह किसी दूसरे बैंक में अपना खाता खुलवा लें। तथा उसका एनपीसीआई करावकर धान क्रय केंद्र प्रभारी से मिल कर अपना खाता संख्या फीड करा दें। ताकि पैसा भेजा जा सके। जिन किसानों का अन्य बैंकों में खाता है उन्हें भी एनपीसीआई कराना होगा। तभी यह पैसा उनके खाते में भेजा जा सकेगा।
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जिले में समर्थन मूल्य योजना के तहत 20,900 मैट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। 31 दिसंबर तक जिले में 13 हजार मैट्रिक टन धान खरीद की जा चुकी है। जो लक्ष्य का 63 प्रतिशत है। वहीं किसानों को अपनी उपज का कुल 24 करोड़ 50 लाख रुपये मिलना था। जिसके सापेक्ष किसानों को 19 करोड़ 50 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। जबकि पांच करोड़ रुपये अब भी किसानों का बकाया है। जिसका भुगतान किसानों के खाते में नहीं जा पा रहा है। यह पैसा किसानों के खाते में तभी भेजा जा सकेगा। जब किसान अपने बैंक खाते को आधार से लिंक कराने के साथ ही उसे नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) से मैच करा लें। बिना ऐसा किए उनके खाते में धान मूल्य का भुगतान नहीं हो सकता है। क्योंकि विभाग की ओर से खाते में भेजा जाने वाला पैसा इनवैलिड दिखा रहा है।
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इतना ही नहीं जिन किसानों के बैंक खाते ग्रामीण बैंकों में हैं। उनका एनपीसीआई से मैच नहीं हो सकता। ऐसे में किसानों को भुगतान लेने के लिए अपना बैंक खाता किसी अन्य बैंक में खुलवाना होगा। ताकि उन्हें धान मूल्य का भुगतान किया जा सके। इस बारे में जिला खाद्य विपणन अधिकारी नरेंद्र तिवारी बताते हैं कि जिन किसानों का बैंक खाता ग्रामीण बैंकों में है। वह किसी दूसरे बैंक में अपना खाता खुलवा लें। तथा उसका एनपीसीआई करावकर धान क्रय केंद्र प्रभारी से मिल कर अपना खाता संख्या फीड करा दें। ताकि पैसा भेजा जा सके। जिन किसानों का अन्य बैंकों में खाता है उन्हें भी एनपीसीआई कराना होगा। तभी यह पैसा उनके खाते में भेजा जा सकेगा।
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