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Shravasti News: वियतनाम से आए अनुयायियों ने गंध कुटि पर की प्रार्थना
Tue, 20 Feb 2024 01:45 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Tue, 20 Feb 2024 01:45 AM IST
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कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती सोमवार को अनुयायियों से गुलजार रही। वियतनाम से आए 48 सदस्यीय दल ने बौद्ध भिक्षु भंवरानंद के नेतृत्व में गंधकुटी पर विशेष प्रार्थना की।
इस दौरान बौद्ध भिक्षु ने कहा कि भगवान बुद्ध की पहली शिक्षा को धम्म चक्कप वत्तन सुत्त कहा जाता था। जिसका अर्थ है सत्य के चक्र का घूमना। यह प्रवचन बुद्ध ने पांच तपस्वियों को बनारस के पास इसिपटाना (जिसे अब सारनाथ कहा जाता है) में दिया था। बुद्ध ने पांच तपस्वियों को दो चरम सीमाओं को त्यागने की सलाह देकर प्रवचन शुरू किया। यह कामुक सुखों में लिप्तता और शरीर को कष्ट देना (आत्म भोग और आत्म पीड़ा) थे। बुद्ध ने तपस्वियों को चार आर्य सत्य सिखाए। उन्होंने कहा कि संसार में हर चीज दुख से भरी है। दुख का कारण तृष्णा है। दुख का अंत निर्वाण है। दुख के अंत का मार्ग आर्य अष्टांगिक मार्ग से होकर जाता है। इस अवसर पर तमाम बौद्ध अनुयायी मौजूद रहे।
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इस दौरान बौद्ध भिक्षु ने कहा कि भगवान बुद्ध की पहली शिक्षा को धम्म चक्कप वत्तन सुत्त कहा जाता था। जिसका अर्थ है सत्य के चक्र का घूमना। यह प्रवचन बुद्ध ने पांच तपस्वियों को बनारस के पास इसिपटाना (जिसे अब सारनाथ कहा जाता है) में दिया था। बुद्ध ने पांच तपस्वियों को दो चरम सीमाओं को त्यागने की सलाह देकर प्रवचन शुरू किया। यह कामुक सुखों में लिप्तता और शरीर को कष्ट देना (आत्म भोग और आत्म पीड़ा) थे। बुद्ध ने तपस्वियों को चार आर्य सत्य सिखाए। उन्होंने कहा कि संसार में हर चीज दुख से भरी है। दुख का कारण तृष्णा है। दुख का अंत निर्वाण है। दुख के अंत का मार्ग आर्य अष्टांगिक मार्ग से होकर जाता है। इस अवसर पर तमाम बौद्ध अनुयायी मौजूद रहे।
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