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Shravasti News: अभिभावकों की जेब ढीली कर रही प्राइवेट स्कूलों की महंगी किताबें
Sun, 20 Apr 2025 02:30 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Sun, 20 Apr 2025 02:30 AM IST
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श्रावस्ती। प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने के लिए अभिभावक अपने बच्चों का प्रवेश उत्साह के साथ कराते हैं। जबकि महंगी किताबों के साथ भारी-भरकम फीस अभिभावकों के लिए समस्या बनी है।
माध्यमिक व परिषदीय विद्यालयों में तो निशुल्क किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं, लेकिन निजी विद्यालयों में 200 रुपये से लेकर 650 रुपये प्रति किताब वसूले जा रहे हैं। साथ ही इन विद्यालयों में चलने वाली किताबें सिर्फ विद्यालय में ही बेची जाती है। ऐसे में अभिभावकों को किताबों के लिए 3,000 से 8,000 रुपये तक खर्च करना पड़ता है। इससे बच्चों को अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई कराने की हसरत रखने वाले अभिभावकों की मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
प्राइवेट विद्यालयों पर किताबों के संबंध में अंकुश लगाने के लिए कोई प्रावधान नहीं है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों का प्रवेश सरकारी विद्यालयों में कराएं। - अजय कुमार गुप्ता, बीएसए
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माध्यमिक व परिषदीय विद्यालयों में तो निशुल्क किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं, लेकिन निजी विद्यालयों में 200 रुपये से लेकर 650 रुपये प्रति किताब वसूले जा रहे हैं। साथ ही इन विद्यालयों में चलने वाली किताबें सिर्फ विद्यालय में ही बेची जाती है। ऐसे में अभिभावकों को किताबों के लिए 3,000 से 8,000 रुपये तक खर्च करना पड़ता है। इससे बच्चों को अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई कराने की हसरत रखने वाले अभिभावकों की मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
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प्राइवेट विद्यालयों पर किताबों के संबंध में अंकुश लगाने के लिए कोई प्रावधान नहीं है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों का प्रवेश सरकारी विद्यालयों में कराएं। - अजय कुमार गुप्ता, बीएसए
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