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मनरेगा में हर साल हो रहा लाखों रुपये का गबन

Fri, 02 Oct 2020 10:30 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2020 10:30 PM IST
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Embezzlement of lakhs of rupees in MNREGA every year
श्रावस्ती। मनरेगा के धन के गबन के यह कुछ मामले तो बानगी भर हैं। हरिहरपुररानी विकास खंड में मनरेगा योजना के तहत पैसों का जमकर बंदरबांट किया गया। यह सब तब हुआ जब स्थानीय ग्रामीण लगातार इसकी शिकायत करते रहे। इसके बाद भी अधिकारियों ने इन पर ध्यान नहीं दिया। यही नहीं घोटालों की पोल खुलने के बाद भी जिम्मेदारों से इसकी रिकवरी नहीं हो पाई। इसके चलते गबन करने वाले आज भी मनरेगा का पैसा दबाए बैठे हैं।
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मजदूरों को उनके गांव में ही काम देने के लिए मनरेगा योजना चलाई जा रही है। हरिहरपुररानी विकास खंड में यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। वित्तीय वर्ष 2018-19 में देखा जाए तो इस योजना के तहत करीब एक करोड़ रुपये की अनियमितता की गई। इसमें बिना काम के ही पैसे का भुगतान ले लेने के साथ प्रक्रिया उल्लंघन व काम से अधिक भुगतान लेने का मामला शामिल है। इसमें से कुछ मामले तो सोशल ऑडिट में पकड़ में आए। जबकि 2018-19 में 122 मामले आम लोगों की शिकायत पर पकड़े गए थे। इन शिकायत पर हुई जांच में घोटाले की पुष्टि भी जांच अधिकारियों ने की। जिस पर रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की गई। ऐसे ही मामले वित्तीय वर्ष 2019-20 में भी सामने आए, जहां लाखों रुपये का बंदरबांट इस ब्लॉक में हो गया।
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साल 2018-19 में हुई अनियमितता
हरिहरपुररानी ब्लॉक में वित्तीय वर्ष 2018-19 में स्टीमेट से अधिक के भुगतान के 42 मामले सामने आए थे। इसमें लगभग 35 हजार रुपये की रिकवरी जांच के बाद बनाई गई थी। इसमें से कई मामले आज भी लंबित है। वित्तीय अनियमितता के 57 मामले दर्ज किए गए थे। जांच के बाद ग्राम पंचायतों को दोषी मानते हुए करीब 40 से 45 लाख की रिकवरी बनाई गई थी। इसमें से 46 मामलों में अभी तक गबन करने वालों से पैसों की वापसी नहीं हो पाई। देखा जाए तो अभी मनरेगा का 28 लाख 454 रुपये घोटाला करने वालों के पास फंसा है। वहीं गांव में होने वाले काम में अनियमितताओं की 37 शिकायतें दर्ज हुई, जिसमें जांच के बाद रिकवरी बनाई गई। आज भी करीब 99 हजार रुपये की रिकवरी नहीं हो पाई।
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साल 2019-20 में हुई अनियमितता
हरिहरपुररानी ब्लॉक में वित्तीय वर्ष 2019-20 में स्टीमेट से अधिक भुगतान के कुल 67 मामले संज्ञान में आए थे। जिन पर हुई जांच के बाद लाखों रुपये की रिकवरी बनाई गई। इसमें तीन लोगों ने अभी तक करीब 60 हजार रुपये की वापसी नहीं की गई। वित्तीय अनियमितता के दस मामले सोशल ऑडिट के दौरान पकड़े गए। इसमें से छह लोगों ने गबन की राशि को वापस कर दिया, लेकिन चार पंचायतों ने करीब 25 हजार रुपये नहीं वापस किए। इस वर्ष मनरेगा योजना में बरती गई अनियमितता के लिए स्थानीय स्तर पर 92 लोगों ने अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। इसकी जांच के बाद करीब 42 लाख रुपये के गबन की पुष्टि भी हुई। इसमें से 34 लोगों ने आज भी गबन किए गए पैसे की वापसी नहीं की है। यही नहीं इस वर्ष प्रक्रिया उल्लंघन के 181 मामले पकड़ में आए। इसमें से अधिकांश मामले आज भी जांच होने के बाद भी पेंडिंग हैं। इस श्रेणी में काम होने के बाद सूचना बोर्ड न लगाना, किए गए पक्के निर्माण में वाल राइटिंग न होना, जबकि इसका पैसा निकालना शामिल है।
केस एक
हरिहरपुररानी ब्लॉक की ग्राम पंचायत बनकटवा में मनरेगा योजना के तहत बिकाऊ के घर से पूरब चक रोड तक खड़ंजा कार्य में 97746 रुपये की ईंट लगाई गई थी। यह कार्य क्षेत्र पंचायत की ओर से कराया गया था। इसका भुगतान हो गया था। इसी के बाद बिना कुछ काम कराए ही ग्राम पंचायत ने भी ईंट के पैसे का भुगतान ले लिया। ऑडिट में इसका खुलासा होने के बाद लगभग एक वर्ष से रिकवरी के लिए फाइल अटकी पड़ी है। वहीं ऑडिट में टीम ने पौध रोपण के नाम 89910 रुपये, उच्च दरों पर सामग्री खरीद कर 20846 रुपये व एएमबी तथा मौके पर मिले काम के अंतर से 82550 रुपये कुल 291052 रुपये का घोटाला पकड़ा था।
केस दो
हरिहरपुररानी की ग्राम पंचायत टंड़वा बनकटवा में 687017 रुपये से खड़ंजा व सड़क पटाई का कार्य मनरेगा योजना से कराया गया था। जब यह कार्य यहां कराया गया उससे पहले ही ग्राम पंचायत को समाप्त कर नगर पालिका परिषद भिनगा में हस्तांतरित कर दिया गया था। इस कार्य की वित्तीय स्वीकृति भी ब्लॉक से नहीं ली गई थी। यही नहीं इसी गांव पंचायत में कई और अनियमितताओं का खुलासा ऑडिट टीम ने किया था।

केस तीन
हरिहरपुररानी की ग्राम पंचायत गोढ़पुरवा में काम न करने वाले व्यक्तियों के नाम पर 16625, उच्च दरों में सामग्री खरीद कर 7875 रुपये, स्वीकृति राशि से अधिक व्यय मामले में 35175 रुपये व अन्य मदों में भी 3219 रुपये को मिलाकर कुल 62894 रुपये के गबन का मामला सामने आया।
सभी मामले में तथ्यों की जानकारी अभी नहीं है। तथ्यों की जानकारी करने के बाद ही इन मामलों में कुछ कहा जा सकता है। - टीके शिबु, जिलाधिकारी
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