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सही उम्र में करें कन्यादान, स्वस्थ रहे माता सुखी रहे संतान

Thu, 26 Sep 2019 11:00 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 26 Sep 2019 11:00 PM IST
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Donate at the right age, keep your mother happy and your children happy
अपराजिता के तहत प्राथमिक विद्यालय बरगदहा में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद एएनएम व अन्य - फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। बेटियों आज के समय में किसी पर बोझ नहीं हैं। उन्हें प्यार दुलार के साथ बेहतर शिक्षा दिलाएं जिससे वह समाज में ऊंचा मुकाम हासिल कर सकें। सही समय पर उनका कन्यादान करें जिससे माता और संतान सुखी रहे। यह बातें गुरुवार को जमुनहा के प्राथमिक विद्यालय बरगदहा तृतीय में अमर उजाला की मुहिम 100 मिलियन स्माइल्स के तहत स्वास्थ्य व शिक्षा पर आयोजित कार्यशाला में वक्ताओं ने कहीं।
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कार्यशाला की अध्यक्षता एएनएम सुषमा मिश्रा ने की। इस दौरान उन्होंने कहा कि लड़का व लड़की एक समान हैं। उन्हें बेहतर देखभाल व उचित शिक्षा दिलाएं, और सही उम्र पर ही उनका विवाह करें।
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कार्यशाला में कन्या भ्रूण हत्या रोकने, परिवार नियोजन व स्वच्छता अपनाने, नियमित टीकाकरण कराकर अभियान को सफल बनाने, गर्भवती व बच्चों को पौष्टिक व पोषक आहार दिलाने तथा बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की बात कही गई।
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बाल विवाह अभिशाप है। कम उम्र में बच्चियों की शादी करने से वह जल्द ही मां बन जाती है। इससे जच्चा व बच्चा दोनों ही कुपोषित व कमजोर होते हैं। जो बाद विभिन्न प्रकार की बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। - सुषमा मिश्रा, एएनएम
गर्भधारण की जानकारी के बाद एएनएम व आशा के संपर्क में रह कर नियमित टीकाकरण कराएं व सलाह लें। समय समय पर चिकित्सकों से परामर्श लेने के साथ ही पौष्टिक आहार का सेवन करें। इससे जच्चा व बच्चा स्वस्थ रहेंगे। - मीना देवी
दो बच्चों के जन्म में कम से कम तीन वर्ष का अंतर जरूर रखें। जल्द गर्भधारण से जहां महिलाओं में खून की कमी हो जाती है, वहीं उनसे होने वाला बच्चा भी कुपोषित तथा कमजोर होकर बीमारियों की चपेट में आ जाता है। - सुमन देवी
बेटियां कभी अभिशाप नहीं होती हैं, इसलिए बेटे की चाह में कई कई बच्चों को जन्म देना गलत है। परिवार सुखी व समृद्ध हो इसके लिए परिवार नियोजन का सहारा लें, दो बच्चों से अधिक के बारे में न सोचें। - कृष्णावती
कुछ लोग बेटों की चाह में कन्या भ्रूण हत्या जैसा जघन्य पाप करते हैं। इससे बचना चाहिए। बेटा व बेटी में कोई फर्क नहीं है। दोनों को समान शिक्षा व संस्कार दें। बेटियां भी बेटों की तरह परिवार का नाम रोशन करेगी। - रीता देवी
मातृ व शिशु मृत्युदर का बड़ा मुख्य कारण कम उम्र में विवाह होना है। जब तक बेटियां विवाह के योग्य न हो जाएं, तब तक इस बारे में न सोचें। हम दो हमारे दो तक ही सीमित रहें, ताकि बच्चों की उचित देखभाल हो सके। - गौरीदेवी
बेटियों को शिक्षित बनाएं ताकि वह अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। सही उम्र पर उनका विवाह करें। गर्भधारण के बाद सभी प्रकार की जांच व नियमित टीकाकरण के लिए एएनएम व आशा की सलाह लेती रहें। - चंद्रकांती
बेटी के जन्म से लेकर उनके विवाह तक का सारा खर्च सरकार उठा रही है। ऐसे में बेटियों को बोझ न समझें। उन्हें बेटों से अधिक प्यार व दुलार तथा बेहतर शिक्षा दिलाएं, ताकि वह भी सम्मान जनक जीवन जी सकें। - गीता देवी
प्रत्येक माता पिता को चाहिए कि वह अपनी जिम्मेदारी निभाएं। बेटा हो या बेटी उनकी सही उम्र में शादी करें। कहा गया है कि सही उम्र में करें कन्यादान, स्वस्थ रहे माता सुखी रहे संतान। समाज के सभी लोग अपना फर्ज निभाएं। - सुमन

महिला व पुरुष के बिना सृष्टि का संचालन नहीं हो सकता। यदि हमने लड़का लड़की में भेद करना व कन्या भ्रूण हत्या करना बंद नहीं किया तो एक दिन हमें इसके घातक परिणाम भुगतने पड़ेंगे। जिसके लिए हम स्वयं जिम्मेदार होंगे। - रियाजुल
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