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लड़का व लड़की में न करें भेदभाव
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विधिक शिविर को संबोधित करते सिविल जज।
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। जमुनहा के उच्च प्राथमिक विद्यालय शिकारी चौड़ा में सोमवार को विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इसकी शुरूआत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव व सिविल जज ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर की। शिविर में महिला सशक्तीकरण, भ्रूण हत्या निषेध, बालिका शिक्षा, संविधानिक अधिकार तथा शासन की ओर से संचालित योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने, लड़का व लड़की में भेदभाव न करने की अपील की।
शिविर में सचिव व सिविल जज प्रशांत कुमार सिंह ने घरेलू हिंसा, पारिवारिक वाद और महिला प्रताड़ना झेल रही महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या व बाल विवाह रोके बिना महिला सशक्तीकरण का सपना अधूरा है। जो लोग लिंग की जांच कराकर बेटी होने पर उन्हें गर्भ में मार देते हैं वह कानून की नजर में तो अपराध कर ही रहे हैं, सामाजिक रूप से वह पाप के भागी हैं।
कन्या को गर्भ में ही मार देने से देश में महिला लिंग अनुपात बिगड़ रहा है। लिंग जांच व भ्रूण हत्या करने वाले दोनों को ही जेल भेजा जा सकता है। उन्होंने लोगों को जागरूक कर लड़का व लड़की में भेद मिटाने, बालिका शिक्षा को बढ़ावा देकर उन्हें सशक्त बनाने तथा अच्छी परवरिश देने की बात कही। अधिवक्ता विष्णुदत्त अस्थाना ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार तमाम योजनाएं चला रही है। इसका लाभ लेने के लिए जागरूक होना पड़ेगा।
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कन्या भ्रूण हत्या हर हाल में रुकनी चाहिए। आज की बालिका ही आगे चलकर किसी की बहू, पत्नी और मां बनती है। अगर लड़की ही नहीं रहेगी तो हम बहू, पत्नी व मां कहां से लाएंगे। तहसीलदार नारायन सिंह ने राजस्व संबंधित विधियों व कानूनों के बारे में बताया। उन्होंने लोगों को महिलाओं के प्रति सम्मान रखने, तथा उनके बिना मानव समाज को अस्तित्व विहीन बताया। शिविर को मल्हीपुर थाने के एसआई अमित कुमार सिंह, ओंकार चौधरी, प्रेमचंद्र जायसवाल, सुनील कुमार, जगतराम शुक्ला व अनूप कुमार ने भी संबोधित किया। इस मौके पर काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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शिविर में सचिव व सिविल जज प्रशांत कुमार सिंह ने घरेलू हिंसा, पारिवारिक वाद और महिला प्रताड़ना झेल रही महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या व बाल विवाह रोके बिना महिला सशक्तीकरण का सपना अधूरा है। जो लोग लिंग की जांच कराकर बेटी होने पर उन्हें गर्भ में मार देते हैं वह कानून की नजर में तो अपराध कर ही रहे हैं, सामाजिक रूप से वह पाप के भागी हैं।
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कन्या को गर्भ में ही मार देने से देश में महिला लिंग अनुपात बिगड़ रहा है। लिंग जांच व भ्रूण हत्या करने वाले दोनों को ही जेल भेजा जा सकता है। उन्होंने लोगों को जागरूक कर लड़का व लड़की में भेद मिटाने, बालिका शिक्षा को बढ़ावा देकर उन्हें सशक्त बनाने तथा अच्छी परवरिश देने की बात कही। अधिवक्ता विष्णुदत्त अस्थाना ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार तमाम योजनाएं चला रही है। इसका लाभ लेने के लिए जागरूक होना पड़ेगा।
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कन्या भ्रूण हत्या हर हाल में रुकनी चाहिए। आज की बालिका ही आगे चलकर किसी की बहू, पत्नी और मां बनती है। अगर लड़की ही नहीं रहेगी तो हम बहू, पत्नी व मां कहां से लाएंगे। तहसीलदार नारायन सिंह ने राजस्व संबंधित विधियों व कानूनों के बारे में बताया। उन्होंने लोगों को महिलाओं के प्रति सम्मान रखने, तथा उनके बिना मानव समाज को अस्तित्व विहीन बताया। शिविर को मल्हीपुर थाने के एसआई अमित कुमार सिंह, ओंकार चौधरी, प्रेमचंद्र जायसवाल, सुनील कुमार, जगतराम शुक्ला व अनूप कुमार ने भी संबोधित किया। इस मौके पर काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।