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हर तरफ गंदगी, डेंगू की चपेट में नगर
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प्राथमिक विद्यालय भिनगा के सामने तालाब को बना दिया कूड़ा डंपिंग घर
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। नगर में चारों तरफ गंदगी है। इसके चलते भिनगा नगर की अधिकांश आबादी डेंगू की चपेट में है। कई मरीजों का इलाज जिले में चल रहा है तो कई लखनऊ में भर्ती हैं।
बरसात व जलभराव का असर अब भिनगा नगर में दिख रहा है। पूरे भिनगा नगर में चारों तरफ गंदगी से दुर्गंध उठ रही है। ऐसा किसी एक स्थान पर नहीं बल्कि कई स्थानों पर देखा जा सकता है। भिनगा नगर के प्राथमिक विद्यालय के सामने जहां कुछ दिन पूर्व तक एक तालाब था। वहां नगर पालिका ने पूरे नगर का कूड़ा पाट कर उसे कूड़ा डंपिंग घर बना दिया है। जबकि इस स्थान के चारों तरफ सघन आबादी है।
अब जैसे-जैसे धूप निकल रही है। वहां से दुर्गंध उठ रही है। यही नहीं जलभराव व गंदगी के कारण डेंगू के मरीजों की संख्या भी नगर में बढ़ती जा रही है। औसतन देखा जाए तो प्रतिदिन डेंगू से संबंधित 10 से 15 मरीज संयुक्त जिला चिकित्सालय पहुंच रहे हैं। ऐसे ही कुछ मरीज सीधे लखनऊ जाकर अपना इलाज करा रहे हैं। इसके बावजूद न तो डेंगू से निपटने के लिए सफाई कराई जा रही है और न ही इस गंदगी से निपटने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।
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गांवों में धुएं का सहारा ले रहे लोग
जिले में बढ़े मच्छरों के प्रकोप से स्वयं व मवेशियों को बचाने के लिए ग्रामीण धुएं का सहारा ले रहे हैं। इसके लिए जहां ग्रामीणों द्वारा कंडा, पुआल, भूसा व नीम की पत्ती जलाई जा रही है। वहीं नगरीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग मच्छर अगरबत्ती, केमिकल आदि का सहारा लेने को विवश हैं।
डेंगू के लक्षण
अचानक तेज बुखार आना, सिर में आगे की और तेज दर्द, आंखों के पीछे दर्द और आंखों के हिलने से दर्द में और तेजी आना, मांसपेशियों (बदन) व जोड़ों में दर्द, स्वाद का पता न चलना व भूख न लगना, छाती व ऊपरी अंगों पर खसरे जैसे दाने निकलना, चक्कर आना, जी घबराना व पल्टी आना।
ऐसे होता है डेंगू
डेंगू मच्छर वर्षा ऋतु के दौरान बहुतायत से पाये जाते हैं। यह मच्छर प्राय: घरों व अन्य भवनों में तथा इनके आसपास एकत्रित खुले एवं साफ पानी में अंडे देते हैं। इनके शरीर पर सफेद और काली पट्टी होती है। यह ज्यादातर दिन के समय ही काटता है। डेंगू एक विषाणु से होने वाली बीमारी है। जो एडीज एजिप्टी नामक संक्रमित मादा मच्छर के काटने से फैलती है। डेंगू एक तरह का वायरल बुखार है। यह तीन प्रकार का होता है। पहला साधारण डेंगू, रक्तश्राव वाला डेंगू व डेंगू शाक सिन्ड्रोम।
मौसम में परिवर्तन के बाद मच्छरों का प्रकोप बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि वह सिर्फ मच्छरदानी का ही प्रयोग करें। जहां तक संभव हो कीटनाशक व मच्छर अगरबत्ती व धुएं आदि का उपयोग न करें। इससे उनके शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। -डॉ. मुकेश मातनहेलिया, एसीएमओ
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बरसात व जलभराव का असर अब भिनगा नगर में दिख रहा है। पूरे भिनगा नगर में चारों तरफ गंदगी से दुर्गंध उठ रही है। ऐसा किसी एक स्थान पर नहीं बल्कि कई स्थानों पर देखा जा सकता है। भिनगा नगर के प्राथमिक विद्यालय के सामने जहां कुछ दिन पूर्व तक एक तालाब था। वहां नगर पालिका ने पूरे नगर का कूड़ा पाट कर उसे कूड़ा डंपिंग घर बना दिया है। जबकि इस स्थान के चारों तरफ सघन आबादी है।
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अब जैसे-जैसे धूप निकल रही है। वहां से दुर्गंध उठ रही है। यही नहीं जलभराव व गंदगी के कारण डेंगू के मरीजों की संख्या भी नगर में बढ़ती जा रही है। औसतन देखा जाए तो प्रतिदिन डेंगू से संबंधित 10 से 15 मरीज संयुक्त जिला चिकित्सालय पहुंच रहे हैं। ऐसे ही कुछ मरीज सीधे लखनऊ जाकर अपना इलाज करा रहे हैं। इसके बावजूद न तो डेंगू से निपटने के लिए सफाई कराई जा रही है और न ही इस गंदगी से निपटने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।
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गांवों में धुएं का सहारा ले रहे लोग
जिले में बढ़े मच्छरों के प्रकोप से स्वयं व मवेशियों को बचाने के लिए ग्रामीण धुएं का सहारा ले रहे हैं। इसके लिए जहां ग्रामीणों द्वारा कंडा, पुआल, भूसा व नीम की पत्ती जलाई जा रही है। वहीं नगरीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग मच्छर अगरबत्ती, केमिकल आदि का सहारा लेने को विवश हैं।
डेंगू के लक्षण
अचानक तेज बुखार आना, सिर में आगे की और तेज दर्द, आंखों के पीछे दर्द और आंखों के हिलने से दर्द में और तेजी आना, मांसपेशियों (बदन) व जोड़ों में दर्द, स्वाद का पता न चलना व भूख न लगना, छाती व ऊपरी अंगों पर खसरे जैसे दाने निकलना, चक्कर आना, जी घबराना व पल्टी आना।
ऐसे होता है डेंगू
डेंगू मच्छर वर्षा ऋतु के दौरान बहुतायत से पाये जाते हैं। यह मच्छर प्राय: घरों व अन्य भवनों में तथा इनके आसपास एकत्रित खुले एवं साफ पानी में अंडे देते हैं। इनके शरीर पर सफेद और काली पट्टी होती है। यह ज्यादातर दिन के समय ही काटता है। डेंगू एक विषाणु से होने वाली बीमारी है। जो एडीज एजिप्टी नामक संक्रमित मादा मच्छर के काटने से फैलती है। डेंगू एक तरह का वायरल बुखार है। यह तीन प्रकार का होता है। पहला साधारण डेंगू, रक्तश्राव वाला डेंगू व डेंगू शाक सिन्ड्रोम।
मौसम में परिवर्तन के बाद मच्छरों का प्रकोप बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि वह सिर्फ मच्छरदानी का ही प्रयोग करें। जहां तक संभव हो कीटनाशक व मच्छर अगरबत्ती व धुएं आदि का उपयोग न करें। इससे उनके शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। -डॉ. मुकेश मातनहेलिया, एसीएमओ