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शिकायतें दरकिनार, मनरेगा में घोटाला बार-बार
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श्रावस्ती। मनरेगा योजना भले ही गरीबों के लिए बनाई गई हो, लेकिन जिले में इसको जिम्मेदारों ने दोनों हाथों से लूटा। जमुनहा विकास खंड में एक वर्ष में कराए गए मनरेगा के कार्यों के दौरान 154 शिकायतें आई। इनको दरकिनार कर 588 मामलों में नियम के खिलाफ कार्य किए गए, तो 53 मामलों में सीधे तौर पर पैसे का गबन ही कर लिया गया।
इस दौरान 202 ऐसे मामले सोशल आडिट के दौरान पकड़े गए जिसमें अनाधिकृत रूप से वित्तीय अनियमितता करके पैसे का बंदरबांट किया गया। यह सब वह मामले हैं जो किसी न किसी जांच में पकड़े गए। इन पर रिकवरी भी बनी लेकिन उसकी वसूली की फाइल पर मनरेगा के अधिकारी ही कुंडली मारे बैठे हैं।
मनरेगा योजना मजदूरों को उनके गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई थी। इसके होते हुए भी गांवों से मजदूरों का पलायन नगरों की ओर हो रहा है। इसका कारण यह है कि मनरेगा योजना जिले में लगभग सभी विकास खंडों में घोटाले की भेंट चढ़ रही है। सबसे अधिक खराब स्थिति जमुनहा विकास खंड की है।
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ब्लॉक में वित्तीय वर्ष 2018-19 में विभिन्न माध्यमों से करीब नब्बे लाख रुपये का घोटाला प्रधान, सचिव व तकनीकी सहायकों ने मिल कर किया। यहां शिकायतों के बाद मनरेगा योजना में हो रहे घोटाले कम होने की जगह और बढ़ गए। वहीं मनरेगा में हुए घोटाले की जांच के बाद उस पर बनी रिकवरी की वसूली घोटालेबाजों से नहीं हो पाई। इसका कारण मनरेगा के जिम्मेदार ही रिकवरी की फाइल पर कुंडली मारे बैठे हैं।
घोटाले के कुछ बड़े मामले
ग्राम पंचायत अचरौरा शाहपुर में वर्ष 2019 में शीला देवी, हासिमा, रामकुमार व दुखीराम को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास आवंटित किया गया था। जांच के दौरान इनको अपात्र घोषित कर दिया गया। इसके बाद भी इन चारों के खाते में मनरेगा योजना के तहत मजदूरी का 50-50 हजार रुपये भेज दिया गया। इसकी रिकवरी नहीं हो पाई। यही नहीं इसी विकास खंड के चंदन कोटिया ग्राम पंचायत में नसीम वसीम के खेत का समतली करण करने के नाम पर 32550 रुपये का भुगतान कर दिया गया, जबकि यह काम उनके खेतों में हुआ नहीं।
ऐसे ही कलकलवा ग्राम पंचायत में छह मजदूरों को बिना काम के ही 18200 रुपये का भुगतान कर दिया गया। फर्जी तौर पर भुगतान निकालने का कार्य इसी ग्राम पंचायत में नहीं हुआ, बल्कि धूमबोझी में भी 15750 का घोटाला जांच के दौरान पकड़ में आया। ऐसे ही करीब 53 मामले सोशल आडिट के दौरान पकड़े गए। जिसमें या तो बिना काम के ही या फिर फर्जी तौर पर ही मजदूरों का काम दिखा कर भुगतान ले लिया गया।
ऐसे हुई पैसों की लूट
जमुनहा विकास खंड में केवल मजदूरों के नाम पर ही पैसों की लूट नहीं हुई। यहां 588 ऐसे मामले पकड़े गए, जिसमें नियम के खिलाफ कार्य कराने की बात सामने आई। मनरेगा के कार्यों में संकेतक के नाम पर भुगतान तो ले लिया गया, लेकिन लगाया नहीं गया। 202 ऐसे मामले पकड़े गए जिनमें वित्तीय डायवर्जन करके पैसे का गबन किया गया। 154 शिकायतों की पुष्टि हुई, जिसमें जांच के बाद रिकवरी बनाई गई। यह पैसा आज भी सरकारी खजाने तक वापस नहीं पहुंचा।
सभी मामलों में होगी रिकवरी
मनरेगा योजना में इस तरह की अनियमितताएं क्षमा योग्य नहीं है। सभी पुराने मामलों को देखा जा रहा है, जिसमें रिकवरी अभी तक नहीं हुई है। जल्द ही सभी वित्तीय अनियमितताओं में रिकवरी कराई जाएगी। - टीके शिबु डीएम
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इस दौरान 202 ऐसे मामले सोशल आडिट के दौरान पकड़े गए जिसमें अनाधिकृत रूप से वित्तीय अनियमितता करके पैसे का बंदरबांट किया गया। यह सब वह मामले हैं जो किसी न किसी जांच में पकड़े गए। इन पर रिकवरी भी बनी लेकिन उसकी वसूली की फाइल पर मनरेगा के अधिकारी ही कुंडली मारे बैठे हैं।
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मनरेगा योजना मजदूरों को उनके गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई थी। इसके होते हुए भी गांवों से मजदूरों का पलायन नगरों की ओर हो रहा है। इसका कारण यह है कि मनरेगा योजना जिले में लगभग सभी विकास खंडों में घोटाले की भेंट चढ़ रही है। सबसे अधिक खराब स्थिति जमुनहा विकास खंड की है।
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ब्लॉक में वित्तीय वर्ष 2018-19 में विभिन्न माध्यमों से करीब नब्बे लाख रुपये का घोटाला प्रधान, सचिव व तकनीकी सहायकों ने मिल कर किया। यहां शिकायतों के बाद मनरेगा योजना में हो रहे घोटाले कम होने की जगह और बढ़ गए। वहीं मनरेगा में हुए घोटाले की जांच के बाद उस पर बनी रिकवरी की वसूली घोटालेबाजों से नहीं हो पाई। इसका कारण मनरेगा के जिम्मेदार ही रिकवरी की फाइल पर कुंडली मारे बैठे हैं।
घोटाले के कुछ बड़े मामले
ग्राम पंचायत अचरौरा शाहपुर में वर्ष 2019 में शीला देवी, हासिमा, रामकुमार व दुखीराम को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास आवंटित किया गया था। जांच के दौरान इनको अपात्र घोषित कर दिया गया। इसके बाद भी इन चारों के खाते में मनरेगा योजना के तहत मजदूरी का 50-50 हजार रुपये भेज दिया गया। इसकी रिकवरी नहीं हो पाई। यही नहीं इसी विकास खंड के चंदन कोटिया ग्राम पंचायत में नसीम वसीम के खेत का समतली करण करने के नाम पर 32550 रुपये का भुगतान कर दिया गया, जबकि यह काम उनके खेतों में हुआ नहीं।
ऐसे ही कलकलवा ग्राम पंचायत में छह मजदूरों को बिना काम के ही 18200 रुपये का भुगतान कर दिया गया। फर्जी तौर पर भुगतान निकालने का कार्य इसी ग्राम पंचायत में नहीं हुआ, बल्कि धूमबोझी में भी 15750 का घोटाला जांच के दौरान पकड़ में आया। ऐसे ही करीब 53 मामले सोशल आडिट के दौरान पकड़े गए। जिसमें या तो बिना काम के ही या फिर फर्जी तौर पर ही मजदूरों का काम दिखा कर भुगतान ले लिया गया।
ऐसे हुई पैसों की लूट
जमुनहा विकास खंड में केवल मजदूरों के नाम पर ही पैसों की लूट नहीं हुई। यहां 588 ऐसे मामले पकड़े गए, जिसमें नियम के खिलाफ कार्य कराने की बात सामने आई। मनरेगा के कार्यों में संकेतक के नाम पर भुगतान तो ले लिया गया, लेकिन लगाया नहीं गया। 202 ऐसे मामले पकड़े गए जिनमें वित्तीय डायवर्जन करके पैसे का गबन किया गया। 154 शिकायतों की पुष्टि हुई, जिसमें जांच के बाद रिकवरी बनाई गई। यह पैसा आज भी सरकारी खजाने तक वापस नहीं पहुंचा।
सभी मामलों में होगी रिकवरी
मनरेगा योजना में इस तरह की अनियमितताएं क्षमा योग्य नहीं है। सभी पुराने मामलों को देखा जा रहा है, जिसमें रिकवरी अभी तक नहीं हुई है। जल्द ही सभी वित्तीय अनियमितताओं में रिकवरी कराई जाएगी। - टीके शिबु डीएम