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बुखार की साधारण दवा से वायरल को हराने का दावा
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संयुक्त जिला चिकित्सालय में तीमारदारों की भीड़ व वार्ड में भर्ती मरीज।
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। मौसम में आए बदलाव के बाद वायरल के साथ डेंगू बुखार इस समय चरम पर है। सीएचसी पीएचसी सहित संयुक्त जिला चिकित्सालय की ओपीडी ऐसे ही मरीजों से भरी हुई है। वहीं अस्पताल में वायरल को हराने के लिए केवल पैरासीटामॉल की टेबलेट ही उपलब्ध है। यहां पर्चे पर लिखे जाने वाले एंटीबायोटिक दवा के लिए तीमारदारों को बाजार के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
मौसम में बदलाव होने के कारण सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार यानी वायरल फीवर जैसी समस्या का सामना लोगों को करना पड़ रहा है। चिकित्सकों की मानें तो वायरल की समस्या होने पर कुछ सावधानियां बरती जाएं, तो यह 4 से 6 दिन में अपने आप ठीक हो जाता है। लेकिन इन दिनों ऐसा हो नहीं रहा है। वायरल ठीक होने में ज्यादा समय ले रहा है।
यही नहीं सामान्य कैटेगरी के एंटीबायोटिक का असर भी मरीजों पर नहीं हो पा रहा है। जबकि देखा जाए तो संयुक्त जिला चिकित्सालय में बुखार के लिए नीमोसिलाइड के साथ ही कुछ सामान्य कैटेगरी की एंटीबायोटिक दवाएं उपलब्ध हैं। जिसका असर मरीजों को नहीं हो रहा है। इसीलिए सरकारी पर्चे पर चिकित्सक ऐसी दवाएं लिख रहे हैं जो अस्पताल में न मिलकर बाहर मेडिकल स्टोर से लाई जा रही हैं। ऐसो किसी एक-दो मामले में नहीं लगभग सभी मरीजों के साथ हो रहा है। इसके चलते अस्पताल के दवा काउंटर के बजाए अस्पताल के बाहर निजी मेडिलक स्टोर पर तीमारदारों की भीड़ ज्यादा है।
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वायरल को न समझें कोविड संक्रमण
कोरोना महामारी के कारण वायरल होने पर लोग डर रहे हैं। वायरल के लक्षण दिखाई देने पर अधिकांश लोग इसे कोरोना ही समझते हैं। क्योंकि कोरोना के भी कुछ लक्षण वायरल जैसे होते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। मौसम परिवर्तन के कारण हुए फीवर में कफ, कोल्ड, फीवर, गले में खराश, खांसी, सिर में दर्द आदि समस्याएं होना एक आम बात है। लेकिन यह समस्याएं कोरोना वायरस के लक्षण नहीं हैं। -डॉ. रवी मोहन, निजी चिकित्सक
अस्पतालों में वायरल सहित अन्य समस्याओं से जुड़ी सभी दवाएं लगभग उपलब्ध हैं। ऐसे में बाहर से दवा मंगवाने का कोई मामला अभी तक सामने नहीं आया है। -डॉ. एपी भार्गव, सीएमओ
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मौसम में बदलाव होने के कारण सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार यानी वायरल फीवर जैसी समस्या का सामना लोगों को करना पड़ रहा है। चिकित्सकों की मानें तो वायरल की समस्या होने पर कुछ सावधानियां बरती जाएं, तो यह 4 से 6 दिन में अपने आप ठीक हो जाता है। लेकिन इन दिनों ऐसा हो नहीं रहा है। वायरल ठीक होने में ज्यादा समय ले रहा है।
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यही नहीं सामान्य कैटेगरी के एंटीबायोटिक का असर भी मरीजों पर नहीं हो पा रहा है। जबकि देखा जाए तो संयुक्त जिला चिकित्सालय में बुखार के लिए नीमोसिलाइड के साथ ही कुछ सामान्य कैटेगरी की एंटीबायोटिक दवाएं उपलब्ध हैं। जिसका असर मरीजों को नहीं हो रहा है। इसीलिए सरकारी पर्चे पर चिकित्सक ऐसी दवाएं लिख रहे हैं जो अस्पताल में न मिलकर बाहर मेडिकल स्टोर से लाई जा रही हैं। ऐसो किसी एक-दो मामले में नहीं लगभग सभी मरीजों के साथ हो रहा है। इसके चलते अस्पताल के दवा काउंटर के बजाए अस्पताल के बाहर निजी मेडिलक स्टोर पर तीमारदारों की भीड़ ज्यादा है।
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कोरोना महामारी के कारण वायरल होने पर लोग डर रहे हैं। वायरल के लक्षण दिखाई देने पर अधिकांश लोग इसे कोरोना ही समझते हैं। क्योंकि कोरोना के भी कुछ लक्षण वायरल जैसे होते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। मौसम परिवर्तन के कारण हुए फीवर में कफ, कोल्ड, फीवर, गले में खराश, खांसी, सिर में दर्द आदि समस्याएं होना एक आम बात है। लेकिन यह समस्याएं कोरोना वायरस के लक्षण नहीं हैं। -डॉ. रवी मोहन, निजी चिकित्सक
अस्पतालों में वायरल सहित अन्य समस्याओं से जुड़ी सभी दवाएं लगभग उपलब्ध हैं। ऐसे में बाहर से दवा मंगवाने का कोई मामला अभी तक सामने नहीं आया है। -डॉ. एपी भार्गव, सीएमओ