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दर्शन के लिए बागेश्वरी मंदिर नहीं जा सकते
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श्रावस्ती। भारत व नेपाल के बीच तल्ख हुए रिश्ते अब लोगों की आस्था पर भी भारी पड़ रहे हैं। सीमा बंद होने के कारण पहली बार ऐसा हुआ है कि भारत में रहने वाले श्रद्धालु अपनी कुल देवी बागेश्वरी का दर्शन करने नेपालगंज नहीं जा सकते। इसके लिए श्रद्धालुओं के मन में मलाल है। वहीं कुछ श्रद्धालु सरकार से अपील कर रहे हैं कि स्थायी तौर पर ही सही लेकिन नवरात्र तक भारत-नेपाल सीमा को खोला जाए।
भारत व नेपाल की भौगोलिक स्थिति ही ऐसी है कि दोनों देश न केवल एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं बल्कि एक-दूसरे पर निर्भर भी हैं। यह निर्भरता व्यापारिक ही नहीं, सामाजिक के साथ-साथ धार्मिक स्तर पर भी रहती है। यही कारण है कि नेपाल के मुक्तिनाथ में मिलने वाले सालिगराम की पूजा भारत के कोने-कोने में होती है।
ऐसे ही भारत-नेपाल सीमा पर स्थिति नेपालगंज की बागेश्वरी देवी श्रावस्ती व बहराइच के रहने वाले लाखों श्रद्धालुओं की कुल देवी हैं। यही कारण है कि नवरात्र के पहले दिन से ही श्रावस्ती व बहराइच के श्रद्धालुओं का ताता नेपाल के बागेश्वरी मंदिर में लगा रहता है। यहां तक कि कुछ ऐसे श्रद्धालु हैं जो नौ दिन तक मां के दरबार में सीमा पार करके जाते हैं और हाजिरी लगाते हैं।
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यह परंपरा सदियों पुरानी है। इस परंपरा पर कभी भी विराम नहीं लगा। चाहे वह नेपाल के माओवादी आंदोलन का कार्यकाल ही क्यों न रहा हो। तराई क्षेत्र में सक्रिय माओवादी आंदोलनकारी कभी भी माता के दरबार में जाने वाले श्रद्धालुओं के बीच रोड़ा नहीं बने बल्कि उन्हें मंदिर तक जाने के लिए हर संभव मदद भी दिया।
लेकिन हजारों साल की ये परंपराएं कोविड-19 के नाम पर भारत-नेपाल की बंद सीमा ने तोड़ दी। इस नवरात्र में सीमा बंद होने के कारण श्रद्धालु अपनी कुल देवी बागेश्वरी का दर्शन करने के लिए नहीं जा पा रहे हैं। इसे लेकर न केवल श्रद्धालुओं के मन में मलाल है बल्कि इन तल्खी भरे रिश्तों में अपने आप को पिसा हुआ भी महसूस कर रहे हैं।
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भारत व नेपाल की भौगोलिक स्थिति ही ऐसी है कि दोनों देश न केवल एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं बल्कि एक-दूसरे पर निर्भर भी हैं। यह निर्भरता व्यापारिक ही नहीं, सामाजिक के साथ-साथ धार्मिक स्तर पर भी रहती है। यही कारण है कि नेपाल के मुक्तिनाथ में मिलने वाले सालिगराम की पूजा भारत के कोने-कोने में होती है।
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ऐसे ही भारत-नेपाल सीमा पर स्थिति नेपालगंज की बागेश्वरी देवी श्रावस्ती व बहराइच के रहने वाले लाखों श्रद्धालुओं की कुल देवी हैं। यही कारण है कि नवरात्र के पहले दिन से ही श्रावस्ती व बहराइच के श्रद्धालुओं का ताता नेपाल के बागेश्वरी मंदिर में लगा रहता है। यहां तक कि कुछ ऐसे श्रद्धालु हैं जो नौ दिन तक मां के दरबार में सीमा पार करके जाते हैं और हाजिरी लगाते हैं।
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यह परंपरा सदियों पुरानी है। इस परंपरा पर कभी भी विराम नहीं लगा। चाहे वह नेपाल के माओवादी आंदोलन का कार्यकाल ही क्यों न रहा हो। तराई क्षेत्र में सक्रिय माओवादी आंदोलनकारी कभी भी माता के दरबार में जाने वाले श्रद्धालुओं के बीच रोड़ा नहीं बने बल्कि उन्हें मंदिर तक जाने के लिए हर संभव मदद भी दिया।
लेकिन हजारों साल की ये परंपराएं कोविड-19 के नाम पर भारत-नेपाल की बंद सीमा ने तोड़ दी। इस नवरात्र में सीमा बंद होने के कारण श्रद्धालु अपनी कुल देवी बागेश्वरी का दर्शन करने के लिए नहीं जा पा रहे हैं। इसे लेकर न केवल श्रद्धालुओं के मन में मलाल है बल्कि इन तल्खी भरे रिश्तों में अपने आप को पिसा हुआ भी महसूस कर रहे हैं।