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वियतनाम से आए बौद्ध अनुयायियों ने की वर्षावास पूजा
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कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शनिवार को अनुयायियों से गुलजार रही। वियतनाम से आए 15 सदस्यीय दल ने गंध कुटि पर बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में वर्षावास पूजन किया।
इस दौरान बौद्ध भिक्षु देवानंद ने कहा कि महात्मा बुद्ध का उपदेश मानव जाति के हित के लिए था। उन्होंने अपना पहला उपदेश सारनाथ में दिया। उन्होंने वहां पांच मित्रों को अपना अनुयायी बनाया तथा उन्हें भी धर्म के प्रचार के लिए भेज दिया। महात्मा बुद्ध ने सभी दुखों के कारण और निवारण के लिए अष्टांगिक मार्ग बताया। महात्मा बुद्ध ने अहिंसा का समर्थन किया, पशु हत्या का विरोध भी किया।
महात्मा बुद्ध ने 483 ईसा पूर्व 80 वर्ष की आयु में अपने नश्वर शरीर को त्याग दिया और परमात्मा में विलीन हो गए। ज्ञान प्राप्ति के बाद का संपूर्ण जीवन उन्होंने मानव कल्याण के लिए लगाया। वह ज्ञान को केवल अपने तक सीमित नहीं रखना चाहते थे। इसी कारण उन्होंने अनेकों उपदेश दिए तथा अपने ज्ञान को अमर कर दिया। पूजन के बाद सभी उपासकों ने आनंद बोधि, शिवली स्तूप, कौशांबी कुटी, अंगुलिमाल स्तूप आदि का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी ली। संवाद
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इस दौरान बौद्ध भिक्षु देवानंद ने कहा कि महात्मा बुद्ध का उपदेश मानव जाति के हित के लिए था। उन्होंने अपना पहला उपदेश सारनाथ में दिया। उन्होंने वहां पांच मित्रों को अपना अनुयायी बनाया तथा उन्हें भी धर्म के प्रचार के लिए भेज दिया। महात्मा बुद्ध ने सभी दुखों के कारण और निवारण के लिए अष्टांगिक मार्ग बताया। महात्मा बुद्ध ने अहिंसा का समर्थन किया, पशु हत्या का विरोध भी किया।
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महात्मा बुद्ध ने 483 ईसा पूर्व 80 वर्ष की आयु में अपने नश्वर शरीर को त्याग दिया और परमात्मा में विलीन हो गए। ज्ञान प्राप्ति के बाद का संपूर्ण जीवन उन्होंने मानव कल्याण के लिए लगाया। वह ज्ञान को केवल अपने तक सीमित नहीं रखना चाहते थे। इसी कारण उन्होंने अनेकों उपदेश दिए तथा अपने ज्ञान को अमर कर दिया। पूजन के बाद सभी उपासकों ने आनंद बोधि, शिवली स्तूप, कौशांबी कुटी, अंगुलिमाल स्तूप आदि का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी ली। संवाद
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