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थाईलैंड से आई बौद्ध अनुयायियों ने तपोस्थली में की पूजा
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आनंद बोधि पर प्रार्थना करते थाईलैंड से आए उपासक।
- फोटो : SRAWASTI
कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती मंगलवार को बौद्ध अनुयायियों से गुलजार रही। थाईलैंड से आए अनुयायियों ने आनंद बोधि पर थाई रीति रिवाज से विशेष प्रार्थना की। इस दौरान बौद्ध भिक्षु दीपालोक महाथेरो ने उन्हें बौद्ध संदेश भी सुनाया।
आनंद बोधि पर विशेष प्रार्थना के दौरान बौद्ध भिक्षु दीपालोक महाथेरो ने कहाकि भगवान बुद्ध ने मन की शांति के लिए कई बातें कही थी। उनके अनुसार जब हम किसी बात को लेकर जैसे ही क्रोधित होते हैं, तब हम सत्य का मार्ग छोड़कर अपने लिए प्रयास करने लगते है। क्रोधित व्यक्ति स्वार्थी हो जाता है। वह सिर्फ अपनी बात मनवाने की कोशिश करता है। इससे बचना चाहिए।
ईर्ष्या और नफरत की भावना की वजह से हम जीवन में कोई भी खुशी हासिल नहीं कर सकते हैं। यह भावनाएं हमारे मन की शांति खत्म कर देती हैं। पूरे जीवन बिना ध्यान और समझदारी से जीने की अपेक्षा सिर्फ एक दिन समझदारी से जीना अच्छा है। हम अपने गुस्से के लिए दंडित नहीं होते, बल्कि हमारे गुस्से से ही दंड पाते हैं।
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जिस प्रकार तूफान एक मजबूत पत्थर को हिला नहीं पाता है, उसी प्रकार बुद्धिमान व्यक्ति प्रशंसा या आलोचना से प्रभावित नहीं होते हैं। दीपक बिना आग के नहीं जल सकता, ठीक उसी प्रकार मनुष्य भी बिना आध्यात्मिक जीवन के नहीं जी सकता है। जिस तरह बाढ़ में नींद में डूबे हुए लोग बह जाते हैं, ठीक उसी प्रकार मृत्यु विचलित मन वाले व्यक्ति को बहा ले जाती है।
पूजन के उपरांत सभी उपासकों ने शिवली स्तूप, कौशांबी कुटी, सभामंडप, संघाराम बिहार, अंगुलिमाल स्तूप, कच्ची कुटी, पक्की कुटी, पूर्वाराम बिहार आदि का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त की। इस मौके पर बौद्ध भिक्षु आनंद सागर, धम्म सागर, नाग सागर, सुख सागर आदि मौजूद रहे।
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आनंद बोधि पर विशेष प्रार्थना के दौरान बौद्ध भिक्षु दीपालोक महाथेरो ने कहाकि भगवान बुद्ध ने मन की शांति के लिए कई बातें कही थी। उनके अनुसार जब हम किसी बात को लेकर जैसे ही क्रोधित होते हैं, तब हम सत्य का मार्ग छोड़कर अपने लिए प्रयास करने लगते है। क्रोधित व्यक्ति स्वार्थी हो जाता है। वह सिर्फ अपनी बात मनवाने की कोशिश करता है। इससे बचना चाहिए।
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ईर्ष्या और नफरत की भावना की वजह से हम जीवन में कोई भी खुशी हासिल नहीं कर सकते हैं। यह भावनाएं हमारे मन की शांति खत्म कर देती हैं। पूरे जीवन बिना ध्यान और समझदारी से जीने की अपेक्षा सिर्फ एक दिन समझदारी से जीना अच्छा है। हम अपने गुस्से के लिए दंडित नहीं होते, बल्कि हमारे गुस्से से ही दंड पाते हैं।
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जिस प्रकार तूफान एक मजबूत पत्थर को हिला नहीं पाता है, उसी प्रकार बुद्धिमान व्यक्ति प्रशंसा या आलोचना से प्रभावित नहीं होते हैं। दीपक बिना आग के नहीं जल सकता, ठीक उसी प्रकार मनुष्य भी बिना आध्यात्मिक जीवन के नहीं जी सकता है। जिस तरह बाढ़ में नींद में डूबे हुए लोग बह जाते हैं, ठीक उसी प्रकार मृत्यु विचलित मन वाले व्यक्ति को बहा ले जाती है।
पूजन के उपरांत सभी उपासकों ने शिवली स्तूप, कौशांबी कुटी, सभामंडप, संघाराम बिहार, अंगुलिमाल स्तूप, कच्ची कुटी, पक्की कुटी, पूर्वाराम बिहार आदि का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त की। इस मौके पर बौद्ध भिक्षु आनंद सागर, धम्म सागर, नाग सागर, सुख सागर आदि मौजूद रहे।