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समुदाय में जागरूकता लाएं, उपेक्षित बीमारियों पर काबू पाएं

Sat, 29 Jan 2022 10:57 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 29 Jan 2022 10:57 PM IST
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Bring awareness to the community, overcome neglected diseases
श्रावस्ती। फाइलेरिया, कालाजार, चिकनगुनिया, कुष्ठ रोग जैसी उपेक्षित बीमारियों (नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीज) को खत्म करने को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से दृढ़ संकल्प है। आमजन को इन बीमारियों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए ही हर साल 30 जनवरी को नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीज डे मनाया जाता है।
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ट्रॉपिकल बीमारियों के विशेषज्ञ डॉ. सौरभ पांडे ने बताया कि यह बीमारियां वायरस, बैक्टीरिया, पैरासाइट, फंगस और टॉक्सिन से होती हैं। लेकिन इन्हें खत्म किया जा सकता है। इसके लिए लोगों के साथ ही डाक्टरों को भी जागरूकता दिखानी होगी। लक्षण दिखते ही मरीज का पैथोलॉजी टेस्ट कराया जाए तो बहुत से मरीजों की जल्द पहचान हो सकती है। इससे उनका इलाज जल्द शुरू हो जाएगा और वह जल्द ठीक हो जाएंगे। अगर किसी मरीज को हल्के लक्षण भी दिखें तो फौरन पास के सरकारी अस्पताल में दिखाएं। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की 16 उपेक्षित बीमारियों में से 11 भारत में पाई जाती हैं। रिपोर्ट के अनुसार देश में लिम्फैटिक फाइलेरिया के 87 लाख केस हैं। जो दुनिया का 29 प्रतिशत है। इसी तरह कालाजार के देश में 13530 केस हैं जो दुनिया का 45 प्रतिशत है। कुष्ठ रोग के 187730 केस हैं जो दुनिया का 36 फीसदी है। रैबीज के 4370 केस हैं जो विश्व का 33 प्रतिशत है।
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सतर्कता बरत कर बीमारियों से बचें
वेक्टर बोर्न डिजीज के नोडल अधिकारी डॉ. मुकेश मातनहेलिया बताते हैं कि इनमें से अधिकतर बीमारियां मच्छरों के काटने से होती हैं। इसलिए मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए घर व आस पास साफ सफाई रखें। पानी एकत्र न होने दें। सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें, पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। इसके प्रति जनजागरूकता को बढ़ावा देकर भी इन बीमारियों से बचा जा सकता है। फाइलेरिया, कालाजार, कुष्ठ रोग, चिकनगुनिया, डेंगू, रैबीज, स्कैबीज, हुकवार्म, एसकैरियासिज उपेक्षित बीमारियों में से हैं।
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जिला मलेरिया अधिकारी एसपी तिवारी ने बताया कि समय-समय पर फाइलेरिया को जड़ से खत्म करने के लिए अभियान चलाया जाता है। जिसमें स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर लोगों को अपने सामने दवा खिलाते हैं। एनटीडी पर समुदाय में भी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। मसलन किसी को फाइलेरिया हो जाए तो उसकी जिंदगी मृत समान हो जाती है। अगर वह परिवार का मुखिया है तो उसके परिवार का आर्थिक विकास भी रुक जाएगा। ऐसे में समुदाय की जागरूकता उसे और उनके जैसों को इस बीमारी से बचा सकती है। मामूली लक्षण देखें तो फौरन पास के सरकारी अस्पताल ले जाएं।
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