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Shravasti News: बैटरी की ऊर्जा दिलाएंगी दिव्यांगों को रोजगार
Wed, 28 Jun 2023 11:04 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Wed, 28 Jun 2023 11:04 PM IST
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श्रावस्ती। बैटरी चालित ट्राई साइकिल से दिव्यांगों को रोजगार अपनाने का नया रास्ता मिलेगा। राज्यपाल ने भी अपने भाषण में ट्राई साइकिल पाएं हुए दिव्यांगों को मुद्रा लोन से जोड़ने का मशवरा दिया है। दिव्यांगों को कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण देने के लिए एलिम्को कानपुर ने जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के सहयोग से मेगा कैंप का आयोजन किया था। इस कैंप में पहली बार 137 दिव्यांगों को मोटराइज्ड ट्राई साइकिल का वितरण किया गया। इसे पाकर दिव्यांगों के चेहरे खुशी से दमकते दिखे।
शिविर में आई विनीता देव निवासी राजा वीरपुर, रामनरेश निवासी खाले ककरा, बुध्धू लाल निवासी नई बाजार सहित करीब 137 दिव्यांगों को मोटराइज्ड ट्राई साइकिल का सहारा मिला है। इस पर खुशी जताते हुए इन लोगों ने कहा कि अब इसकी मदद से वह भी अपना खुद का व्यापार कर आय अर्जित कर सकेंगे।
उन्हें दूसरों पर आश्रित नहीं रहना पड़ेगा। इसी तरह साधूराम ननासी सधई पुरवा सिरसिया को दोनों आंखों से दिखाई नहीं देता है। इसलिए उन्हें कहीं आने जाने के लिए किसी का सहारा लेना पड़ता था। यहां इन्हें सुगम केन का सहारा मिला।
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यह पोर्टेवल केन पूरी तरह से आधुनिक सुविधाओं से युक्त है। इसकी मदद से आंखों से दिव्यांग भी अकेले कही भी आ जा सकेंगे। दोनों कानों से बधिर उदय राज निवास सिटकहना गिलौला को जैसे ही सुनने की मशीन मिली। उन्होने तुरंत उसे अपने कान में लगा लिया। उनके मन में बस यहीं इच्छा थी की जो वर्षों से नहीं सुना वह सब कुछ अब सुनने में कैसा लगेगा।
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शिविर में आई विनीता देव निवासी राजा वीरपुर, रामनरेश निवासी खाले ककरा, बुध्धू लाल निवासी नई बाजार सहित करीब 137 दिव्यांगों को मोटराइज्ड ट्राई साइकिल का सहारा मिला है। इस पर खुशी जताते हुए इन लोगों ने कहा कि अब इसकी मदद से वह भी अपना खुद का व्यापार कर आय अर्जित कर सकेंगे।
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उन्हें दूसरों पर आश्रित नहीं रहना पड़ेगा। इसी तरह साधूराम ननासी सधई पुरवा सिरसिया को दोनों आंखों से दिखाई नहीं देता है। इसलिए उन्हें कहीं आने जाने के लिए किसी का सहारा लेना पड़ता था। यहां इन्हें सुगम केन का सहारा मिला।
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यह पोर्टेवल केन पूरी तरह से आधुनिक सुविधाओं से युक्त है। इसकी मदद से आंखों से दिव्यांग भी अकेले कही भी आ जा सकेंगे। दोनों कानों से बधिर उदय राज निवास सिटकहना गिलौला को जैसे ही सुनने की मशीन मिली। उन्होने तुरंत उसे अपने कान में लगा लिया। उनके मन में बस यहीं इच्छा थी की जो वर्षों से नहीं सुना वह सब कुछ अब सुनने में कैसा लगेगा।