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शिक्षिका बनेंगी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, की जाएंगी प्रशिक्षित
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श्रावस्ती। आंगनबाड़ी केंद्र अगले सत्र से प्री प्राइमरी स्कूल के रूप में कार्य करने लगेगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए डिप्लोमा कोर्स का प्रशिक्षण जनवरी से प्रारंभ हो सकता है। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने रोस्टर भी जारी कर दिया है। इसके अनुसार जिले में 787 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को यह डिप्लोमा कोर्स कराने के लिए चयनित किया गया है। 39 बैच बनाए गए हैं।
आंगनबाड़ी केंद्र अब नए शिक्षा सत्र से प्री प्राईमरी स्कूल के रूप में कार्य करेंगे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ही इस स्कूल की शिक्षिका होंगी। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग इन कार्यकर्ताओं को डिप्लोमा कोर्स कराएगा। इसके लिए जो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हाईस्कूल उत्तीर्ण हैं, उन्हें एक वर्ष का डिप्लोमा कोर्स कराया जाना है जबकि उच्च शिक्षित कार्यकर्ताओं को छह माह का डिप्लोमा कोर्स करना होगा।
यह डिप्लोमा कोर्स करने के बाद कार्यकर्ताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण कराने की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग को दी गई है। इसी के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रशिक्षण कराने का अपना रोस्टर भी जारी कर दिया है जिसके अनुसार जिले में 787 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रशिक्षण के लिए चयनित की गई हैं। इन्हें प्रशिक्षण देने के लिए 39 बैच बनाए गए हैं।
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नई शिक्षा नीति में कई परिवर्तन हुए हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि बच्चे को पहले पांच वर्ष में तीन वर्ष प्री प्राइमरी में रहना होगा। इसके बाद बाकी दो साल वह पहली व दूसरी कक्षा के लिए निर्धारित किए गए हैं। बाल मनोवैज्ञानिक की रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के मस्तिष्क का विकास छह वर्ष की आयु में 85 प्रतिशत हो जाता है। इसी को देखते हुए विभाग ने नई नीति तय की है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा सिंह ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री प्राइमरी स्कूल के रूप में संचालित करने की तैयारी लगभग पूरी हो गई है। बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रशिक्षण माड्यूल के साथ बैच तैयार कर लिया है। पूरा प्रशिक्षण फेस टू फेस प्रणाली पर आधारित होगा।
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आंगनबाड़ी केंद्र अब नए शिक्षा सत्र से प्री प्राईमरी स्कूल के रूप में कार्य करेंगे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ही इस स्कूल की शिक्षिका होंगी। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग इन कार्यकर्ताओं को डिप्लोमा कोर्स कराएगा। इसके लिए जो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हाईस्कूल उत्तीर्ण हैं, उन्हें एक वर्ष का डिप्लोमा कोर्स कराया जाना है जबकि उच्च शिक्षित कार्यकर्ताओं को छह माह का डिप्लोमा कोर्स करना होगा।
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यह डिप्लोमा कोर्स करने के बाद कार्यकर्ताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण कराने की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग को दी गई है। इसी के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रशिक्षण कराने का अपना रोस्टर भी जारी कर दिया है जिसके अनुसार जिले में 787 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रशिक्षण के लिए चयनित की गई हैं। इन्हें प्रशिक्षण देने के लिए 39 बैच बनाए गए हैं।
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नई शिक्षा नीति में कई परिवर्तन हुए हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि बच्चे को पहले पांच वर्ष में तीन वर्ष प्री प्राइमरी में रहना होगा। इसके बाद बाकी दो साल वह पहली व दूसरी कक्षा के लिए निर्धारित किए गए हैं। बाल मनोवैज्ञानिक की रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के मस्तिष्क का विकास छह वर्ष की आयु में 85 प्रतिशत हो जाता है। इसी को देखते हुए विभाग ने नई नीति तय की है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा सिंह ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री प्राइमरी स्कूल के रूप में संचालित करने की तैयारी लगभग पूरी हो गई है। बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रशिक्षण माड्यूल के साथ बैच तैयार कर लिया है। पूरा प्रशिक्षण फेस टू फेस प्रणाली पर आधारित होगा।