{"_id":"5c532da0bdec221239761730","slug":"41548955040-shravasti-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बदला-बदला नजर आ रहा मौसम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बदला-बदला नजर आ रहा मौसम
विज्ञापन
श्रावस्ती। तराई में मौसम का मिजाज अब बदला-बदला सा नजर आने लगा है। सुबह शाम घना कोहरा व दिन में निकलने वाली धूप से मौसम पूरी तरह खुशगवार हो गया है।
मगर बर्फीली पछुआ हवाओं के कारण ठिठुरन अब भी बरकरार है। जिससे लोगों की दुशवारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
जिले के मौसम में बार-बार बदलाव हो रहा है। कभी बदली, कभी धूप तो कभी धुंध से निकलने वाली धूप भी फीकी लग रही है। शाम को शुरू होने वाला घना कोहरा सुबह तक बना रहता है।
इसके बाद निकलने वाली धूप मौसम को खुशगवार बना रही है। गुरुवार को खिली चटक धूप भी धुंध के कारण लोगों को कोई खास राहत न दिला सकी। तेज पछुआ हवाओं के कारण धूप में बैठे लोगों को भी कंपकंपाती ठंड से जूझना पड़ा।
मौसम के मिजाज में आए इस परिवर्तन के बाद तापमान नौ डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। जिससे इंसान ही नहीं पशु-पक्षियों को भी मामूली राहत मिली।
मगर इस बीच बरसात की संभावना नजर न आने के कारण अन्नदाता परेशान हैं। माघ मास में अपेक्षित नमी न होने के कारण खेतों में लगी अरहर, सरसों, लाही, मसूर, अलसी आदि की पैदावार प्रभावित होने की संभावना को लेकर किसान परेशान हैं।
विज्ञापन
यदि एक सप्ताह बरसात और न हुई तो दलहनी व तिलहनी फसलों की पैदावार घटने की संभावना जताई जा रही है। इस बारे में फसल अनुसंधान केंद्र बहराइच के सीनियर रिसर्च असिस्टेंट डॉ. विनोद बताते हैं कि अभी कुछ दिन मौसम ऐसा ही बना रहने का अनुमान है।
विज्ञापन
मगर बर्फीली पछुआ हवाओं के कारण ठिठुरन अब भी बरकरार है। जिससे लोगों की दुशवारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
जिले के मौसम में बार-बार बदलाव हो रहा है। कभी बदली, कभी धूप तो कभी धुंध से निकलने वाली धूप भी फीकी लग रही है। शाम को शुरू होने वाला घना कोहरा सुबह तक बना रहता है।
इसके बाद निकलने वाली धूप मौसम को खुशगवार बना रही है। गुरुवार को खिली चटक धूप भी धुंध के कारण लोगों को कोई खास राहत न दिला सकी। तेज पछुआ हवाओं के कारण धूप में बैठे लोगों को भी कंपकंपाती ठंड से जूझना पड़ा।
विज्ञापन
मौसम के मिजाज में आए इस परिवर्तन के बाद तापमान नौ डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। जिससे इंसान ही नहीं पशु-पक्षियों को भी मामूली राहत मिली।
मगर इस बीच बरसात की संभावना नजर न आने के कारण अन्नदाता परेशान हैं। माघ मास में अपेक्षित नमी न होने के कारण खेतों में लगी अरहर, सरसों, लाही, मसूर, अलसी आदि की पैदावार प्रभावित होने की संभावना को लेकर किसान परेशान हैं।
विज्ञापन
यदि एक सप्ताह बरसात और न हुई तो दलहनी व तिलहनी फसलों की पैदावार घटने की संभावना जताई जा रही है। इस बारे में फसल अनुसंधान केंद्र बहराइच के सीनियर रिसर्च असिस्टेंट डॉ. विनोद बताते हैं कि अभी कुछ दिन मौसम ऐसा ही बना रहने का अनुमान है।