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Shamli News: फर्श और टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ाई कर रहे नौनिहाल
Sat, 16 Dec 2023 12:38 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sat, 16 Dec 2023 12:38 AM IST
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शामली क्षेत्र के गांव ताना प्राथमिक स्कूल में प्राथना के दोरान बिना जूते व जर्सी के खडे छा
शामली। माध्यमिक स्कूलाें में सर्दी के मौसम में भी बच्चे फर्श या फिर टाट-पट्टी पर बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। खातों में रुपया नही आने अथवा अभिभावकों द्वारा रुपया अपनी निजी जरूरतों पर खर्च करने के कारण कई बच्चे बिना स्वेटर, जूतों के स्कूलों में आ रहे हैं। सर्दी के मौसम में अमर उजाला की पड़ताल में सरकारी स्कूलाें का यह हाल मिला।
भदेव गांव का कंपोजिट स्कूल, सुबह 9 बजे
यहां पर स्कूल पर ताला लटका हुआ था, कई छात्र स्कूल के बाहर खड़े हुए थे। बच्चे अध्यापकों के पहुंचने का इंतजार कर रहे थे।
ताना गांव का पूर्व माध्यमिक विद्यालय, सुबह : 9:10 बजे
यहां पर कई बच्चे कड़ाके की ठंड में बिना जर्सी, स्वेटर और जूतों के ही स्कूल में आ रहे थे। कुछ बच्चों ने तो चप्पल पहनी हुई थी। पूछने पर बताया कि रुपया उनके अभिभावकों के खातो में नहीं पहुंचा, जिसके कारण सामान नहीं खरीद सके। यहां पर बच्चे टाट पट्टी पर बैठकर पढा़ई कर रहे थे। बच्चों ने बताया कि वह पहले से ही इसी तरह पढ़ाई करते आ रहे हैं।
ताना गांव का प्राथमिक विद्यालय , सुबह 9:20 बजे
यहां पर अध्यापक और बच्चे प्रार्थना के लिए जमा थे। आठ बच्चे ऐसे थे, जो न तो स्वेटर पहने हुए थे और न ही जूते
पूर्व माध्यमिक विद्यालय शामली, सुबह- 9:55 बजे
यहां पर फर्श पर बैठकर बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। अध्यापकों ने बताया कि फर्नीचर की मांग की गई है।
प्रोसेस चल रहा है
ताना के उप प्रधानाचार्य सुनील ने बताया कि उनके यहां पर 10 से 12 छात्रों के अभिभावकों के खातों में अभी राशि नहीं पहुंची है। प्रोसेस चल रहा है। जल्द ही राशि पहुंच जाएगी।
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नहीं मिली है धनराशि
बैंक खाता अपडेट कराया जा चुका है, मगर अभी तक धनराशि नहीं मिल सकी है। जिसके कारण बच्चों के लिए जूते, स्वेटर आदि नहीं खरीद सका हूं। पिछली बार भी परेशानी हुई थी।
-राजेश अभिभावक
पिछली बार तो धनराशि मिल गई थी मगर इस बार अभी तक नहीं मिल सकी है। जिसके कारण दो बच्चों को बिना स्वेटर, जूतों के जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।, सतीश कुमार, अभिभावक
बच्चों के खातों से रुपये निकालकर खर्च कर देते हैं कई अभिभावक
भले ही कुछ छात्रों के अभिभावकों के खातों में ड्रेस, स्टेशनरी आदि का रुपया नहीं पहुंचा हो मगर कुछ ऐसे भी अभिभावक हैं, जो बच्चों के पैसे को निजी खर्च कर चुके हैं। बीएसए कोमल ने बताया कि कांधला ब्लॉक में ऐसे 30 प्रतिशत अभिभावक सामने आए थे, जिन्हें जागरूक कर खातों में रुपया जाते ही छात्र के लिए सामान खरीदवाया जा रहा है। बिना ड्रेस स्कूलों में छात्रों के आने पर खंड शिक्षा अधिकारी को भी नोटिस जारी किए जाते हैं।
60876 खातों में धनराशि भेजी जा चुकी है। 22 हजार खातों की धनराशि अभी अपडेट होना बाकी है।
स्कूलों के समय पर नहीं खुलने का मामला संज्ञान में नहीं है। जिन स्कूलाें में फर्श पर बैठकर बच्चे पढ़ रहे हैं, उनमें जल्द ही फर्नीचर की व्यवस्था कराई जाएगी। इसके लिए 16 लाख का बजट जारी किया गया है। दूसरे चरण में डीबीटी के माध्यम से 22 हजार से अधिक बच्चों के अभिभावकों के खातों में रुपया भेजा जाना है, जिसकी डिटेल अभी पोर्टल पर अपडेट नहीं की गई है। लखनऊ से डिटेल ली जा रही है। प्रयास रहेगा कि जल्द से जल्द सभी छात्रों का रुपया उनके अभिभावकों के खातों में भेजा जाए। मैं खुद भी स्कूलों का जायजा लेकर लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई करुंगी।
- कोमल, बीएसए शामली
ये भी है खातों में रुपये नहीं आने के कारण
बैंक खाता एक्टिव नहीं होना
आधार कार्ड बैंक में अपडेट नहीं होना
आधार कार्ड में मोबाइल नंबर अपडेट नहीं होना
आधार कार्ड और बैंक खातों में नाम अलग हेाना
एक छात्र को दिए जाते हैं 1200 रुपये
परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को दो जोड़ी यूनिफार्म, स्वेटर, जूते, मौजे, स्कूल बैग, और स्टेशनरी के लिए डीबीटी के माध्यम से 1200 रुपये की धनराशि अभिभावकों के खातों में भेजी जाती है। कुछ अभिभावकों के खातों में गड़बड़ी के कारण राशि नहीं पहुंच पा रही है। शिक्षा विभाग के अधिकारी ऐसे अभिभावकों को खातों को सही कराने के लिए जागरूक कर रहा है।
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भदेव गांव का कंपोजिट स्कूल, सुबह 9 बजे
यहां पर स्कूल पर ताला लटका हुआ था, कई छात्र स्कूल के बाहर खड़े हुए थे। बच्चे अध्यापकों के पहुंचने का इंतजार कर रहे थे।
ताना गांव का पूर्व माध्यमिक विद्यालय, सुबह : 9:10 बजे
यहां पर कई बच्चे कड़ाके की ठंड में बिना जर्सी, स्वेटर और जूतों के ही स्कूल में आ रहे थे। कुछ बच्चों ने तो चप्पल पहनी हुई थी। पूछने पर बताया कि रुपया उनके अभिभावकों के खातो में नहीं पहुंचा, जिसके कारण सामान नहीं खरीद सके। यहां पर बच्चे टाट पट्टी पर बैठकर पढा़ई कर रहे थे। बच्चों ने बताया कि वह पहले से ही इसी तरह पढ़ाई करते आ रहे हैं।
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ताना गांव का प्राथमिक विद्यालय , सुबह 9:20 बजे
यहां पर अध्यापक और बच्चे प्रार्थना के लिए जमा थे। आठ बच्चे ऐसे थे, जो न तो स्वेटर पहने हुए थे और न ही जूते
पूर्व माध्यमिक विद्यालय शामली, सुबह- 9:55 बजे
यहां पर फर्श पर बैठकर बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। अध्यापकों ने बताया कि फर्नीचर की मांग की गई है।
प्रोसेस चल रहा है
ताना के उप प्रधानाचार्य सुनील ने बताया कि उनके यहां पर 10 से 12 छात्रों के अभिभावकों के खातों में अभी राशि नहीं पहुंची है। प्रोसेस चल रहा है। जल्द ही राशि पहुंच जाएगी।
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नहीं मिली है धनराशि
बैंक खाता अपडेट कराया जा चुका है, मगर अभी तक धनराशि नहीं मिल सकी है। जिसके कारण बच्चों के लिए जूते, स्वेटर आदि नहीं खरीद सका हूं। पिछली बार भी परेशानी हुई थी।
-राजेश अभिभावक
पिछली बार तो धनराशि मिल गई थी मगर इस बार अभी तक नहीं मिल सकी है। जिसके कारण दो बच्चों को बिना स्वेटर, जूतों के जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।, सतीश कुमार, अभिभावक
बच्चों के खातों से रुपये निकालकर खर्च कर देते हैं कई अभिभावक
भले ही कुछ छात्रों के अभिभावकों के खातों में ड्रेस, स्टेशनरी आदि का रुपया नहीं पहुंचा हो मगर कुछ ऐसे भी अभिभावक हैं, जो बच्चों के पैसे को निजी खर्च कर चुके हैं। बीएसए कोमल ने बताया कि कांधला ब्लॉक में ऐसे 30 प्रतिशत अभिभावक सामने आए थे, जिन्हें जागरूक कर खातों में रुपया जाते ही छात्र के लिए सामान खरीदवाया जा रहा है। बिना ड्रेस स्कूलों में छात्रों के आने पर खंड शिक्षा अधिकारी को भी नोटिस जारी किए जाते हैं।
60876 खातों में धनराशि भेजी जा चुकी है। 22 हजार खातों की धनराशि अभी अपडेट होना बाकी है।
स्कूलों के समय पर नहीं खुलने का मामला संज्ञान में नहीं है। जिन स्कूलाें में फर्श पर बैठकर बच्चे पढ़ रहे हैं, उनमें जल्द ही फर्नीचर की व्यवस्था कराई जाएगी। इसके लिए 16 लाख का बजट जारी किया गया है। दूसरे चरण में डीबीटी के माध्यम से 22 हजार से अधिक बच्चों के अभिभावकों के खातों में रुपया भेजा जाना है, जिसकी डिटेल अभी पोर्टल पर अपडेट नहीं की गई है। लखनऊ से डिटेल ली जा रही है। प्रयास रहेगा कि जल्द से जल्द सभी छात्रों का रुपया उनके अभिभावकों के खातों में भेजा जाए। मैं खुद भी स्कूलों का जायजा लेकर लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई करुंगी।
- कोमल, बीएसए शामली
ये भी है खातों में रुपये नहीं आने के कारण
बैंक खाता एक्टिव नहीं होना
आधार कार्ड बैंक में अपडेट नहीं होना
आधार कार्ड में मोबाइल नंबर अपडेट नहीं होना
आधार कार्ड और बैंक खातों में नाम अलग हेाना
एक छात्र को दिए जाते हैं 1200 रुपये
परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को दो जोड़ी यूनिफार्म, स्वेटर, जूते, मौजे, स्कूल बैग, और स्टेशनरी के लिए डीबीटी के माध्यम से 1200 रुपये की धनराशि अभिभावकों के खातों में भेजी जाती है। कुछ अभिभावकों के खातों में गड़बड़ी के कारण राशि नहीं पहुंच पा रही है। शिक्षा विभाग के अधिकारी ऐसे अभिभावकों को खातों को सही कराने के लिए जागरूक कर रहा है।