{"_id":"628bd7af2e0b631cd6705f98","slug":"yoga-practiced-in-the-camp-shamli-news-mrt589880848","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिविर में साधकों को योग का कराया अभ्यास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिविर में साधकों को योग का कराया अभ्यास
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शामली। क्रीड़ा भारती द्वारा शामली राइफल क्लब पर आयोजित मासिक योग प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन साधकों को कई आसनों का अभ्यास कराया गया।
सोमवार को शिविर का शुभारंभ डॉ. योगेंद्र सिंह ने किया। कहा कि हमें जीवन भर जिज्ञासु बने रहना चाहिए। जिज्ञासु व्यक्ति ही स्वयं को समय के साथ जोड़कर चलने में सक्षम हो पाता है। योगाचार्य डॉ. श्रीपाल धामा ने योग साधकों को एक पाद शिरासन, उष्ट्रासन, धनुरासन का अभ्यास कराया। योगाचार्य ने आसनों की व्याख्या करते हुए बताया कि एक पाद शिरासन उदर के दोनों भागों पर दबाव डालता है। आंतरिक अंगों की अच्छी मालिश करता है।
क्रमाकुंचन को उद्दीप्त करता है और कब्ज मिटाता है। यह प्रजनन अंगों को पुष्ट करता है और उनसे संबद्ध विकारों को दूर करता है। यह पैरों में रक्त संचार बढ़ाता है स्फीत शिरा में आराम पहुंचाता है और चक्रों में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाता है। इस योग से रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है, जिससे शरीर और मन की ओजस्विता में वृद्धि होती है।
अभ्यास के लिए पाचन की स्वाभाविक दिशा में आंतरिक अंगों की मालिश के लिए दाएं पैर को पहले उठाना चाहिए। शिविर में क्लब अध्यक्ष मुकेश चौधरी, विजयपाल आर्य, बबीता शर्मा, अंशु चौधरी, हिमांशु मलिक, विकल्प देशवाल, शोभित शर्मा, पार्थ वर्मा, मयंक मलिक, सागर, आयुष मोघा, निशांत बालियान, नक्षत्र अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
सोमवार को शिविर का शुभारंभ डॉ. योगेंद्र सिंह ने किया। कहा कि हमें जीवन भर जिज्ञासु बने रहना चाहिए। जिज्ञासु व्यक्ति ही स्वयं को समय के साथ जोड़कर चलने में सक्षम हो पाता है। योगाचार्य डॉ. श्रीपाल धामा ने योग साधकों को एक पाद शिरासन, उष्ट्रासन, धनुरासन का अभ्यास कराया। योगाचार्य ने आसनों की व्याख्या करते हुए बताया कि एक पाद शिरासन उदर के दोनों भागों पर दबाव डालता है। आंतरिक अंगों की अच्छी मालिश करता है।
क्रमाकुंचन को उद्दीप्त करता है और कब्ज मिटाता है। यह प्रजनन अंगों को पुष्ट करता है और उनसे संबद्ध विकारों को दूर करता है। यह पैरों में रक्त संचार बढ़ाता है स्फीत शिरा में आराम पहुंचाता है और चक्रों में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाता है। इस योग से रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है, जिससे शरीर और मन की ओजस्विता में वृद्धि होती है।
विज्ञापन
अभ्यास के लिए पाचन की स्वाभाविक दिशा में आंतरिक अंगों की मालिश के लिए दाएं पैर को पहले उठाना चाहिए। शिविर में क्लब अध्यक्ष मुकेश चौधरी, विजयपाल आर्य, बबीता शर्मा, अंशु चौधरी, हिमांशु मलिक, विकल्प देशवाल, शोभित शर्मा, पार्थ वर्मा, मयंक मलिक, सागर, आयुष मोघा, निशांत बालियान, नक्षत्र अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन