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गेहूं में पीला रतुआ, सरसों में माहू व सफेद गेरुई रोग का खतरा बढ़ा
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शामली। मौसम में बदलाव के चलते ही गेहूं में पीला रतुआ और सरसों की फसल में माहू और सफेद गेरुई रोग का खतरा बढ़ गया है।
जिले में गेहूं और सरसों किसान पैदावार करता है। इस बार गन्ने के बाद गेहूं और सरसों की ज्यादा बुआई हुई है। पिछले डेढ़ माह में बादल-कोहरा और बारिश होने के बाद मौसम में आए बदलाव आया है। मौसम में बदलाव के चलते गेहूं में पीला रतुआ, सरसों में माहू और सफेद गेरुई कीट का प्रभाव देखने में आया है। कृषि विभाग के अफसरों के मुताबिक सरसों की फसल में फूलों पर झुंड के रूप में दिखाई पड़ता है। वह बहुत तेजी से बढ़कर पुष्प व फली का रस चूसकर हानि पहुंचाता है। सरसों में सफेद गेरुई रोग प्रारंभ में पत्तों पर सफेद दाग के रूप में दिखाई पड़ता है, बाद में फली के स्थान पर एक मोटी आकृति दिखाई पड़ती है जिसमें फलियां नहीं बनती है। उप कृषि निदेशक शिव कुमार केसरी ने बताया कि गेहूं में पीला रतुआ सरसों में माहू और सफेद गेरुई रोग क्षति पहुंचा सकता है।
रोग के बचाव के लिए किसानों को सुझाव दिए हैं कि वह रोग के रोकथाम के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रति मिली की 100 मिली प्रति एकड़ अथवा डाइमेथोऐट 30 ईसी 400 मिली थायोमिथाक्सान 25 प्रति 80 ग्राम प्रति एकड़ का 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। सरसों में सफेद गेरुई रोग के बचाव के लिए मैंकोजेब 75 प्रति एकड़ की 2.00 किग्रा मात्रा को 600 से 750 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करें। शामली कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि विज्ञान डॉ. विकास मलिक के मुताबिक शामली जिले में पछेती गेहूं की बुआई 60 से लेकर 70 प्रतिशत होती है। जनवरी के बाद फरवरी के प्रथम सप्ताह में मौसम में बदलाव आना शुरु हुआ तो दिन और रात का तापमान बढ़ने से पछेती गेहूं की बुवाई के बाद जल्दी बाली बनना शुरू हो जाएगी। जल्दी बाली बनने से गेहूं के दाने में फुटाव कम होगा।
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जिले में गेहूं और सरसों किसान पैदावार करता है। इस बार गन्ने के बाद गेहूं और सरसों की ज्यादा बुआई हुई है। पिछले डेढ़ माह में बादल-कोहरा और बारिश होने के बाद मौसम में आए बदलाव आया है। मौसम में बदलाव के चलते गेहूं में पीला रतुआ, सरसों में माहू और सफेद गेरुई कीट का प्रभाव देखने में आया है। कृषि विभाग के अफसरों के मुताबिक सरसों की फसल में फूलों पर झुंड के रूप में दिखाई पड़ता है। वह बहुत तेजी से बढ़कर पुष्प व फली का रस चूसकर हानि पहुंचाता है। सरसों में सफेद गेरुई रोग प्रारंभ में पत्तों पर सफेद दाग के रूप में दिखाई पड़ता है, बाद में फली के स्थान पर एक मोटी आकृति दिखाई पड़ती है जिसमें फलियां नहीं बनती है। उप कृषि निदेशक शिव कुमार केसरी ने बताया कि गेहूं में पीला रतुआ सरसों में माहू और सफेद गेरुई रोग क्षति पहुंचा सकता है।
रोग के बचाव के लिए किसानों को सुझाव दिए हैं कि वह रोग के रोकथाम के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रति मिली की 100 मिली प्रति एकड़ अथवा डाइमेथोऐट 30 ईसी 400 मिली थायोमिथाक्सान 25 प्रति 80 ग्राम प्रति एकड़ का 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। सरसों में सफेद गेरुई रोग के बचाव के लिए मैंकोजेब 75 प्रति एकड़ की 2.00 किग्रा मात्रा को 600 से 750 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करें। शामली कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि विज्ञान डॉ. विकास मलिक के मुताबिक शामली जिले में पछेती गेहूं की बुआई 60 से लेकर 70 प्रतिशत होती है। जनवरी के बाद फरवरी के प्रथम सप्ताह में मौसम में बदलाव आना शुरु हुआ तो दिन और रात का तापमान बढ़ने से पछेती गेहूं की बुवाई के बाद जल्दी बाली बनना शुरू हो जाएगी। जल्दी बाली बनने से गेहूं के दाने में फुटाव कम होगा।
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