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महिलाएं अपने घरों में पोषण वाटिका विकसित करके सब्जियां उगाएं
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। कृषि विज्ञान केंद्र और इफ्को के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें बनत नगर पंचायत के चेयरमैन राजीव कुमार और कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. सतीश कुमार ने आंवले का पौधरोपण किया। महिलाओं को पोषण वाटिका में सब्जियों के उत्पादन के लिए बीज की मिनी किट और नैनो यूरिया वितरित किया।
केंद्र प्रभारी ने किसानों को पौधे के महत्व की जानकारी दी। वैज्ञानिक काम्या सिंह ने कहा कि किसान महिलाएं घरों में पोषण वाटिका बनाकर दैनिक जीवन की आवश्यकता के लिए सब्जियां उगाकर पोषक तत्वों की पूर्ति कर सकते हैं। यदि पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं है तो पोषण वाटिका छत, बालकनी व गमलों आदि में भी विकसित कर सकते हैं। संचालन कर रहे कृषि वैज्ञानिक डॉ. विकास मलिक ने गेहूं, धान व सरसों आदि की बायोफोर्टिफाइड प्रजातियों की जानकारी दी।
उद्यान वैज्ञानिक डॉ. ओमकार सिंह ने किसानों को पोषण वाटिकाएं मौसम के अनुसार विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि फलदार आम, अमरूद, आंवला, पपीता, केला, नींबू, बेल आदि पौधे व सब्जियों की किस्म उगा सकते हैं। सागौन, पॉपुलर, यूकेलिप्टिस के पौधे लगाने की सलाह दी। वैज्ञानिक अजय कुमार ने धान, गन्ना एवं सब्जियों में लगने वाले विभिन्न कीट और बीमारियों के लक्षण व उनके नियंत्रण की जानकारी दी। इस मौके पर कृषि वैज्ञानिक साकिब परवेज ने पोषण वाटिका की स्थापना की विभिन्न विधियों एवं सरंक्षित खेती के बारे में बताया। इफ्को के क्षेत्रीय प्रबंधक सतीश कुमार ने किसानों को इफ्को के विभिन्न उत्पादों नैनो यूरिया के उपयोग के बारे में अवगत कराया। ग्राम प्रधान जलालपुर अरविंद शर्मा ने किसानों का आभार जताया।
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शामली। कृषि विज्ञान केंद्र और इफ्को के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें बनत नगर पंचायत के चेयरमैन राजीव कुमार और कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. सतीश कुमार ने आंवले का पौधरोपण किया। महिलाओं को पोषण वाटिका में सब्जियों के उत्पादन के लिए बीज की मिनी किट और नैनो यूरिया वितरित किया।
केंद्र प्रभारी ने किसानों को पौधे के महत्व की जानकारी दी। वैज्ञानिक काम्या सिंह ने कहा कि किसान महिलाएं घरों में पोषण वाटिका बनाकर दैनिक जीवन की आवश्यकता के लिए सब्जियां उगाकर पोषक तत्वों की पूर्ति कर सकते हैं। यदि पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं है तो पोषण वाटिका छत, बालकनी व गमलों आदि में भी विकसित कर सकते हैं। संचालन कर रहे कृषि वैज्ञानिक डॉ. विकास मलिक ने गेहूं, धान व सरसों आदि की बायोफोर्टिफाइड प्रजातियों की जानकारी दी।
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उद्यान वैज्ञानिक डॉ. ओमकार सिंह ने किसानों को पोषण वाटिकाएं मौसम के अनुसार विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि फलदार आम, अमरूद, आंवला, पपीता, केला, नींबू, बेल आदि पौधे व सब्जियों की किस्म उगा सकते हैं। सागौन, पॉपुलर, यूकेलिप्टिस के पौधे लगाने की सलाह दी। वैज्ञानिक अजय कुमार ने धान, गन्ना एवं सब्जियों में लगने वाले विभिन्न कीट और बीमारियों के लक्षण व उनके नियंत्रण की जानकारी दी। इस मौके पर कृषि वैज्ञानिक साकिब परवेज ने पोषण वाटिका की स्थापना की विभिन्न विधियों एवं सरंक्षित खेती के बारे में बताया। इफ्को के क्षेत्रीय प्रबंधक सतीश कुमार ने किसानों को इफ्को के विभिन्न उत्पादों नैनो यूरिया के उपयोग के बारे में अवगत कराया। ग्राम प्रधान जलालपुर अरविंद शर्मा ने किसानों का आभार जताया।
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