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आखिर वृद्ध पुन्नालाल की मौत का जिम्मेदार कौन
Sun, 28 Apr 2019 11:59 PM IST
NAVEEN GUPTA
ब्यूरो, अमर उजाला/शामली
ब्यूरो, अमर उजाला/शामली
Published by: NAVEEN GUPTA
Updated Sun, 28 Apr 2019 11:59 PM IST
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थानाभवन कस्बे में मृतक पुन्नालाल के मकान पर लगा ताला।
- फोटो : अमर उजाला
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शामली के थानाभवन के खैल मोहल्ले में 70 वर्षीय वृद्ध पुन्नालाल ने बंद मकान में दम तोड़ दिया। पीड़ित अशोक ने वृद्ध के सगे भाई और उसी की बेटी पर पुश्तैनी मकान कब्जाने की नीयत से उन्हें मकान में बंदकर भूखा-प्यासा रखकर मारने का आरोप लगाया है। पुलिस और प्रशासन का कहना है कि वृद्ध के मौत की सही वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। थानाभवन प्रशासन और पुलिस की निष्क्रियता के कारण सवाल उठता है कि आखिर वृद्ध की मौत का जिम्मेदार कौन है। इस मामले में परिवार, आसपड़ोस और पुलिस तीनों ने ही कहीं न कहीं अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से नहीं निभाई।
मुजफ्फरनगर के नई मंडी निवासी अशोक कुमार ने 27 फरवरी को थानाभवन थाने में तहरीर देकर बताया था कि वो अपने परिवार के साथ मुजफ्फरनगर में रहता है। उसका पुश्तैनी मकान थानाभवन कस्बे के खैल मोहल्ले में है। वृद्ध का एक भाई सुनील और उसकी बेटी लता थानाभवन में ही उसके पिता पुन्नालाल के पास रहते हैं। 19 फरवरी से तीनों के लापता होने की तहरीर उसने थाने में दी।
पुलिस ने तहरीर पर नहीं दिखाई गंभीरता
इस केस में पुलिस की लापरवाही भी कम नहीं रही। मृतक के पुत्र अशोक के मुताबिक उसके पिता पुन्नालाल 19 फरवरी से लापता थे। घर पर ताला लगा था। उनके साथ रहने वाला उनका भाई और बेटी भी गायब थी। उसने थाने में उनकी गुमशुदगी की तहरीर भी दी थी । अब सवाल उठता है कि जब अशोक ने पुलिस को गुमशुदगी की तहरीर दे दी थी तो पुलिस ने उसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया। उनकी तलाश शुरू क्यों नहीं की। करीब दो महीने तक पुलिस ने क्या किया। ये बड़ा सवाल है। दो महीने बाद अब जब बंद मकान में पुन्नालाल का शव मिला। उसके बाद पुलिस ने बेटे से नए सिरे से तहरीर लेकर केस दर्ज किया। यदि पुलिस तहरीर आने पर ही इसे गंभीरता से लेती तो शायद पुन्नुलाल के साथ ऐसा ना होता और शायद उसे बचा लिया जाता।
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भोजन को भी मोहताज रहता था वृद्ध
पुन्नालाल के मोहल्ले में आसपास के लोगों से बात की गई तो पता चला कि एक साल पहले तो वह चल फिर सकता था, लेकिन अब काफी दिन से वो परेशान सा रहता था। शायद उसे समय पर खाना पीना भी नही मिलता हो। उसके पास रहने वाली उसके पौत्री ओर बेेटा भी समय पर सुबह ही चले जाते और रात तक आते। एक व्यक्ति ने तो बताया कि एक दिन वह जमीन पर घिसटते हुए उनके दरवाजे पर आया और खाना मांगा। इस पर उन्होंने पुन्नालाल को खाना दे दिया। इस बात पर भी उसकी पौत्री और बेटे उसने ही झगड़ने लगे। एक दो बार ऐसा हुआ तो उन्होंने उसी से किनारा कर लिया। इस मामले में पड़ोसियों ने भी अपना फर्ज सही ढंग से नहीं निभाया। ये भी सवाल है कि यदि शव इतने दिन से घर में बंद था तो आसपास के लोगों को दुर्गंध क्यों नही आई। यदि ये बात और पुन्नू के साथ होने वाली ज्यादती के बारे में मुजफ्फरनगर में रहने वाले अशोक को या पुलिस को दी होती तो शायद इतना बड़ा हादसा ना होता।
अपने ही घिरे आरोपों से
मृतक के बेटे अशोक के अनुसार उसने अपनी बेटी और भाई को पिता जी के पास उसकी देखभाल को छोड़ा था। वो घर खर्च भी उन्हें देता था, ताकि कोई परेशानी ना हो लेकिन उन्होंने भी ऐसा कर दिया। इससे बुरा ओर क्या हो सकता है। उसने दर्ज कराई रिपोर्ट में भी आशंका जताई कि पुश्तैनी मकान कब्जाने की वजह से ही उन्होंने ये कदम उठाया है।
परिजनों ने उपलब्ध नहीं कराए फोटो
एसपी अजय कुमार के अनुसार थानाध्यक्ष ने बताया था कि परिजनों ने गुमशुदगी की सूचना दी थी उसने पुन्नूलाल के फोटो मांगे गए थे, लेकिन उन्होंने फोटो उपलब्ध नहीं कराए । संभवत: परिजनों ने उसे गंभीरता से नहीं लिया, इस वजह से गुमशुदगी दर्ज नहीं हो सकी थी। जाहिर है कि इस मामले में कहीं न कहीं परिजनों की ओर से थोड़ी चूक रही है।
अशोक और लता के पकड़े जाने पर खुला भेद
पुन्नालाल का पता ना चलने पर बेटे अशोक ने जब काफी दबाव बनाया तो पुलिस कुछ सक्रिय हुई। जब पुलिस ने दो दिन पहले लता और सुनील को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि पिताजी घर पर ही हैं। पुलिस घर पहुंची तो देखा पुन्नालाल के ऊपर रजाई पड़ी हुई है। पुलिस ने जब रजाई हटानी चाही तो दोनों ने यह कहते हुए मना कर दिया कि पिताजी सो रहे हैं, उनके उपर से रजाई मत हटाओ। लेकिन, जब पुलिस ने रजाई हटाई तो मौके पर पुन्नालाल का सड़ा गला शव पड़ा मिला।
तीन दिन में ना पोस्टमार्टम हुआ न फोरेंसिक जांच
पुन्नालाल की मौत के बाद अभी तक उसके शव का पोस्टमार्टम नहीं हुआ है। एसपी अजय कुमार ने बताया कि पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम को भेजा था, लेकिन चिकित्सकों ने शव की हालत देख उसे फोरेंसिक, सीएफएल भेजने की बात कही। सीएमओ ने उसके शव को लखनऊ फोरेंसिक जांच को भेजा है, लेकिन वहां भी अभी तक उसकी जांच नहीं हो सकी है। एसपी ने बताया कि संभवत: शव को दोबारा शामली लाया जाए और यहीं पर पोस्टमार्टम कराना पड़े।
जांच में खुलेगी मौत की असली वजह
एसपी के अनुसार सड़ी गली लाश होने पर उसका एक्सरे कराया जाता है। इसमें ये पता चलता है कि उसके शरीर में कहीं गोली तो नहीं मारी गई है। या उसका गला तो नहीं दबाया गया। उसकी ह़ड्डी में कहीं चोट या फ्रैक्चर तो नहीं है। इसलिए जांच के बाद ही उसकी मौत की वजह साफ होगी।
बोले अधिकारी
जानबूझकर किसी व्यक्ति को खाना नहीं दिया गया। इसी वजह से उसकी मौत हुई है। यह पूरा आपराधिक मामला है। इसमें कार्रवाई पुलिस के स्तर से होगी।--प्रीति सिंह, तहसीलदार
जब मेरे पास शिकायत आई तो हमने जांच की। कार्रवाई में पुन्नालाल का शव घर में बंद कमरे में मिला। पुलिस ने शव को फोरेंसिक जांच के लिए लखनऊ भेज दिया गया है। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। --- संदीप बालियान, थाना प्रभारी
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मुजफ्फरनगर के नई मंडी निवासी अशोक कुमार ने 27 फरवरी को थानाभवन थाने में तहरीर देकर बताया था कि वो अपने परिवार के साथ मुजफ्फरनगर में रहता है। उसका पुश्तैनी मकान थानाभवन कस्बे के खैल मोहल्ले में है। वृद्ध का एक भाई सुनील और उसकी बेटी लता थानाभवन में ही उसके पिता पुन्नालाल के पास रहते हैं। 19 फरवरी से तीनों के लापता होने की तहरीर उसने थाने में दी।
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पुलिस ने तहरीर पर नहीं दिखाई गंभीरता
इस केस में पुलिस की लापरवाही भी कम नहीं रही। मृतक के पुत्र अशोक के मुताबिक उसके पिता पुन्नालाल 19 फरवरी से लापता थे। घर पर ताला लगा था। उनके साथ रहने वाला उनका भाई और बेटी भी गायब थी। उसने थाने में उनकी गुमशुदगी की तहरीर भी दी थी । अब सवाल उठता है कि जब अशोक ने पुलिस को गुमशुदगी की तहरीर दे दी थी तो पुलिस ने उसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया। उनकी तलाश शुरू क्यों नहीं की। करीब दो महीने तक पुलिस ने क्या किया। ये बड़ा सवाल है। दो महीने बाद अब जब बंद मकान में पुन्नालाल का शव मिला। उसके बाद पुलिस ने बेटे से नए सिरे से तहरीर लेकर केस दर्ज किया। यदि पुलिस तहरीर आने पर ही इसे गंभीरता से लेती तो शायद पुन्नुलाल के साथ ऐसा ना होता और शायद उसे बचा लिया जाता।
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भोजन को भी मोहताज रहता था वृद्ध
पुन्नालाल के मोहल्ले में आसपास के लोगों से बात की गई तो पता चला कि एक साल पहले तो वह चल फिर सकता था, लेकिन अब काफी दिन से वो परेशान सा रहता था। शायद उसे समय पर खाना पीना भी नही मिलता हो। उसके पास रहने वाली उसके पौत्री ओर बेेटा भी समय पर सुबह ही चले जाते और रात तक आते। एक व्यक्ति ने तो बताया कि एक दिन वह जमीन पर घिसटते हुए उनके दरवाजे पर आया और खाना मांगा। इस पर उन्होंने पुन्नालाल को खाना दे दिया। इस बात पर भी उसकी पौत्री और बेटे उसने ही झगड़ने लगे। एक दो बार ऐसा हुआ तो उन्होंने उसी से किनारा कर लिया। इस मामले में पड़ोसियों ने भी अपना फर्ज सही ढंग से नहीं निभाया। ये भी सवाल है कि यदि शव इतने दिन से घर में बंद था तो आसपास के लोगों को दुर्गंध क्यों नही आई। यदि ये बात और पुन्नू के साथ होने वाली ज्यादती के बारे में मुजफ्फरनगर में रहने वाले अशोक को या पुलिस को दी होती तो शायद इतना बड़ा हादसा ना होता।
अपने ही घिरे आरोपों से
मृतक के बेटे अशोक के अनुसार उसने अपनी बेटी और भाई को पिता जी के पास उसकी देखभाल को छोड़ा था। वो घर खर्च भी उन्हें देता था, ताकि कोई परेशानी ना हो लेकिन उन्होंने भी ऐसा कर दिया। इससे बुरा ओर क्या हो सकता है। उसने दर्ज कराई रिपोर्ट में भी आशंका जताई कि पुश्तैनी मकान कब्जाने की वजह से ही उन्होंने ये कदम उठाया है।
परिजनों ने उपलब्ध नहीं कराए फोटो
एसपी अजय कुमार के अनुसार थानाध्यक्ष ने बताया था कि परिजनों ने गुमशुदगी की सूचना दी थी उसने पुन्नूलाल के फोटो मांगे गए थे, लेकिन उन्होंने फोटो उपलब्ध नहीं कराए । संभवत: परिजनों ने उसे गंभीरता से नहीं लिया, इस वजह से गुमशुदगी दर्ज नहीं हो सकी थी। जाहिर है कि इस मामले में कहीं न कहीं परिजनों की ओर से थोड़ी चूक रही है।
अशोक और लता के पकड़े जाने पर खुला भेद
पुन्नालाल का पता ना चलने पर बेटे अशोक ने जब काफी दबाव बनाया तो पुलिस कुछ सक्रिय हुई। जब पुलिस ने दो दिन पहले लता और सुनील को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि पिताजी घर पर ही हैं। पुलिस घर पहुंची तो देखा पुन्नालाल के ऊपर रजाई पड़ी हुई है। पुलिस ने जब रजाई हटानी चाही तो दोनों ने यह कहते हुए मना कर दिया कि पिताजी सो रहे हैं, उनके उपर से रजाई मत हटाओ। लेकिन, जब पुलिस ने रजाई हटाई तो मौके पर पुन्नालाल का सड़ा गला शव पड़ा मिला।
तीन दिन में ना पोस्टमार्टम हुआ न फोरेंसिक जांच
पुन्नालाल की मौत के बाद अभी तक उसके शव का पोस्टमार्टम नहीं हुआ है। एसपी अजय कुमार ने बताया कि पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम को भेजा था, लेकिन चिकित्सकों ने शव की हालत देख उसे फोरेंसिक, सीएफएल भेजने की बात कही। सीएमओ ने उसके शव को लखनऊ फोरेंसिक जांच को भेजा है, लेकिन वहां भी अभी तक उसकी जांच नहीं हो सकी है। एसपी ने बताया कि संभवत: शव को दोबारा शामली लाया जाए और यहीं पर पोस्टमार्टम कराना पड़े।
जांच में खुलेगी मौत की असली वजह
एसपी के अनुसार सड़ी गली लाश होने पर उसका एक्सरे कराया जाता है। इसमें ये पता चलता है कि उसके शरीर में कहीं गोली तो नहीं मारी गई है। या उसका गला तो नहीं दबाया गया। उसकी ह़ड्डी में कहीं चोट या फ्रैक्चर तो नहीं है। इसलिए जांच के बाद ही उसकी मौत की वजह साफ होगी।
बोले अधिकारी
जानबूझकर किसी व्यक्ति को खाना नहीं दिया गया। इसी वजह से उसकी मौत हुई है। यह पूरा आपराधिक मामला है। इसमें कार्रवाई पुलिस के स्तर से होगी।--प्रीति सिंह, तहसीलदार
जब मेरे पास शिकायत आई तो हमने जांच की। कार्रवाई में पुन्नालाल का शव घर में बंद कमरे में मिला। पुलिस ने शव को फोरेंसिक जांच के लिए लखनऊ भेज दिया गया है। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। --- संदीप बालियान, थाना प्रभारी