{"_id":"66317acab7d9e0ed430178d4","slug":"water-crisis-increases-in-eastern-yamuna-canal-in-scorching-heat-shamli-news-c-26-1-smrt1047-120334-2024-05-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shamli News: भीषण गर्मी में पूर्वी यमुना नहर में पानी का संकट बढ़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shamli News: भीषण गर्मी में पूर्वी यमुना नहर में पानी का संकट बढ़ा
Wed, 01 May 2024 04:42 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Wed, 01 May 2024 04:42 AM IST
विज्ञापन
शामली। टिहरी बांध के जलाश्य से 1100 क्यूसेक पानी की आपूर्ति बंद हो जाने से सिंचाई विभाग में अफरातफरी मची है। पूर्वी यमुना नहर समेत शामली, बागपत, गाजियाबाद, हरियाणा के यमुना नगर में सैकड़ों से ज्यादा रजबहे, माइनरों में पानी की संकट गहरा जाएगा। अब पूर्वी यमुना नहर में पानी की उपलब्धता के लिए सिंचाई विभाग के सहारनपुर मंडल के अफसरों ने यमुना नदी का पानी पूर्वी यमुना नहर में लाने के लिए हथनी कुंड बैराज के अफसरों से मांग शुरू कर दी है। इस बाबत पूर्वी यमुना नहर खंड के अफसरों की बुधवार को उत्तर प्रदेश और हरियाणा सीमा पर हथनी कुंड बैराज पर तैनात सिंचाई विभाग के अफसरों के साथ बैठक होगी।
एक हजार मेगावाट की क्षमता के टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट परियोजना से हरिद्वार में ऊपरी गंगा नहर, मध्य गंगा नहर और निचली गंगा नहर से कुल आठ हजार क्यूसेक पानी आता है। आठ हजार क्यूसेक पानी में से 1100 क्यूसेक पानी हरिद्वार से गंगा का पानी देवबंद चैनल के माध्यम से गंगा यमुना नहर लिंक गंदेवड़ा संगम नहर में पूर्वी यमुना नहर में आता है। इससे शामली, बागपत, और गाजियाबाद जिलों के नहरों-रजबहों और माइनरों में पानी की आपूर्ति होती है। मगर इस बार एक हजार मेगावाट की क्षमता का टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट परियोजना से हरिद्वार और देवबंद चैनल के माध्यम से गंदवेड़ा संगम के पास पूर्वी यमुना नहर में पानी नहीं आ पाएगा। आगामी 15 मई से लेकर 30 जून तक 45 दिन तक हरिद्वार से देवंबद चैनल के माध्यम से मिलने वाला 1100 क्यूसेक पानी पूर्वी यमुना नहर को नहीं मिलने से गंगा का पानी पूर्वी यमुना नहर में न मिलने से 18 जून को गंगा दशहरा के मौके पर गंदेवड़ा संगम में श्रद्धालु स्नान नहीं कर पाएंगे।
शामली, बागपत, गाजियाबाद जिले के हजारों किसानों के खेतोंं की सिंचाई प्रभावित होगी। पूर्वी यमुना नहर के अधिशासी अभियंता विवेक वाष्णZेय ने बताया कि एक हजार मेगावाट की क्षमता का टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट परियोजना की मरम्मत के चलते पानी न मिलने से संकट पैदा हो गया है। इस बाबत सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता ओपी वर्मा को अवगत करा दिया गया है। पूर्वी यमुना नहर खंड सहारनपुर डिवीजन के अधीक्षण अभियंता ओपी वर्मा ने टिहरी बांध के अफसरों से बात की। वह मात्र 400 क्यूसेक पानी देने की बात कह रहे हैं। बताया कि वह हथनी कुंड बैराज पर जाकर संबंधित अफसरों से बुधवार को बैठक कर यमुना नदी का पानी पूर्वी यमुना नहर में एक हजार क्यूसेक दिए जाने की मांग करेंगे।
विज्ञापन
सहारनपुर मंडल के पूर्वी यमुना नहर खंड के अधीक्षण ओपी वर्मा का कहना है कि हथनी कुंड बैराज में हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, हिमाचल राज्यों को जल मिलता है। जिसमें यूपी को एक तिहाई पानी मिलता है। हथनी कुंड बैराज से पूर्वी यमुना नहर का पानी मिलना संभव नहीं है।
23 हजार हेक्टेयर खरीफ की फसल पर पानी का संकट बना
पूर्वी यमुना नहर के पानी से शामली, बागपत, गाजियाबाद जिले के किसानों की रबी- खरीफ और जायद की फसल की सिंचाई होती है। पूर्वी यमुना नहर से शामली जिले में रबी की 21345 हेक्टेयर भूमि, खरीफ की 23 हजार हेक्टेयर फसल की सिंचाई होती है। एक नवंबर से लेकर 30 अप्रैल तक रबी की फसल और एक मई से लेकर 30 अक्तूबर तक खरीफ की फसल की सिंचाई होती है। शामली, बागपत, गाजियाबाद जिलों में पूर्वी यमुना नहर के पानी से सिंचाई होती है। यदि हथनी कुंड से पूर्वी यमुना नहर को पर्याप्त एक हजार क्यूसेक पानी नहीं मिल पाया तो किसानों को अपनी खरीफ की फसलों की प्राइवेट और सरकारी बिजली के नलकूपों से अपनी फसलों को सिंचाई करनी होगी।
विज्ञापन
एक हजार मेगावाट की क्षमता के टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट परियोजना से हरिद्वार में ऊपरी गंगा नहर, मध्य गंगा नहर और निचली गंगा नहर से कुल आठ हजार क्यूसेक पानी आता है। आठ हजार क्यूसेक पानी में से 1100 क्यूसेक पानी हरिद्वार से गंगा का पानी देवबंद चैनल के माध्यम से गंगा यमुना नहर लिंक गंदेवड़ा संगम नहर में पूर्वी यमुना नहर में आता है। इससे शामली, बागपत, और गाजियाबाद जिलों के नहरों-रजबहों और माइनरों में पानी की आपूर्ति होती है। मगर इस बार एक हजार मेगावाट की क्षमता का टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट परियोजना से हरिद्वार और देवबंद चैनल के माध्यम से गंदवेड़ा संगम के पास पूर्वी यमुना नहर में पानी नहीं आ पाएगा। आगामी 15 मई से लेकर 30 जून तक 45 दिन तक हरिद्वार से देवंबद चैनल के माध्यम से मिलने वाला 1100 क्यूसेक पानी पूर्वी यमुना नहर को नहीं मिलने से गंगा का पानी पूर्वी यमुना नहर में न मिलने से 18 जून को गंगा दशहरा के मौके पर गंदेवड़ा संगम में श्रद्धालु स्नान नहीं कर पाएंगे।
विज्ञापन
शामली, बागपत, गाजियाबाद जिले के हजारों किसानों के खेतोंं की सिंचाई प्रभावित होगी। पूर्वी यमुना नहर के अधिशासी अभियंता विवेक वाष्णZेय ने बताया कि एक हजार मेगावाट की क्षमता का टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट परियोजना की मरम्मत के चलते पानी न मिलने से संकट पैदा हो गया है। इस बाबत सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता ओपी वर्मा को अवगत करा दिया गया है। पूर्वी यमुना नहर खंड सहारनपुर डिवीजन के अधीक्षण अभियंता ओपी वर्मा ने टिहरी बांध के अफसरों से बात की। वह मात्र 400 क्यूसेक पानी देने की बात कह रहे हैं। बताया कि वह हथनी कुंड बैराज पर जाकर संबंधित अफसरों से बुधवार को बैठक कर यमुना नदी का पानी पूर्वी यमुना नहर में एक हजार क्यूसेक दिए जाने की मांग करेंगे।
विज्ञापन
सहारनपुर मंडल के पूर्वी यमुना नहर खंड के अधीक्षण ओपी वर्मा का कहना है कि हथनी कुंड बैराज में हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, हिमाचल राज्यों को जल मिलता है। जिसमें यूपी को एक तिहाई पानी मिलता है। हथनी कुंड बैराज से पूर्वी यमुना नहर का पानी मिलना संभव नहीं है।
23 हजार हेक्टेयर खरीफ की फसल पर पानी का संकट बना
पूर्वी यमुना नहर के पानी से शामली, बागपत, गाजियाबाद जिले के किसानों की रबी- खरीफ और जायद की फसल की सिंचाई होती है। पूर्वी यमुना नहर से शामली जिले में रबी की 21345 हेक्टेयर भूमि, खरीफ की 23 हजार हेक्टेयर फसल की सिंचाई होती है। एक नवंबर से लेकर 30 अप्रैल तक रबी की फसल और एक मई से लेकर 30 अक्तूबर तक खरीफ की फसल की सिंचाई होती है। शामली, बागपत, गाजियाबाद जिलों में पूर्वी यमुना नहर के पानी से सिंचाई होती है। यदि हथनी कुंड से पूर्वी यमुना नहर को पर्याप्त एक हजार क्यूसेक पानी नहीं मिल पाया तो किसानों को अपनी खरीफ की फसलों की प्राइवेट और सरकारी बिजली के नलकूपों से अपनी फसलों को सिंचाई करनी होगी।