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वैक्सीन की कमी, टीकाकरण की रफ्तार पड़ी धीमी
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शामली। कोरोना की तीसरी लहर का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन कोरोनारोधी वैक्सीन की कमी के चलते जिले में टीकाकरण अभियान रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। जबकि लोगों में टीका लगवाने के लिए जागरूकता आई है। वैक्सीन की कमी के कारण जिले में वृहद अभियान शुरू नहीं हो सका। इसके साथ ही कलस्टर प्रणाली के तहत गांवों में होने वाला टीकाकरण भी प्रभावित हो रहा है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. आरके सागर ने बताया कि जिले में 16 जनवरी को कोरोनारोधी टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था। इस को शुरू हुए सात माह होने जा रहे हैं। अभी तक लगभग 2.46 लाख लोगों को टीके लगे हैं। इनमें करीब 40 हजार लोगों को दूसरी डोज का टीका लगा है। जिले की आबादी लगभग साढ़े 15 लाख हैं। जनसंख्या के हिसाब से देखा जाए तो अभी टीकाकरण से वंचित लोगों की संख्या बहुत अधिक है। शुरूआत में लोग टीका लगवाने से बच रहे थे, लेकिन अब स्थिति बदली हुई है।
अब लोग टीके को लेकर जागरूक है, लेकिन अब वैक्सीन की कमी बाधक बनी है। 18 से 44 साल के उम्र वाले बूथों पर टीका लगवाने वालों की ज्यादा भीड़ रहती है। उन्होंने बताया कि वैक्सीन की कमी के कारण एक जुलाई से शुरू होने वाला वृहद टीकाकरण अभियान भी शुरू नहीं हो सका। इसके अलावा 21 जून से सभी ब्लाकों में कलस्टर प्रणाली के तहत टीकाकरण शुरू नहीं हो सका। मात्र दो ब्लाक के गांवों में कलस्टर प्रणाली से टीकाकरण शुरू किया गया। वैक्सीन कम होने के कारण पांच दिन बाद ही कलस्टर टीकाकरण बंद करना पड़ा।
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जुलाई माह में मात्र दो दिन ही कलस्टर प्रणाली से टीकाकरण किया गया। शनिवार को वैक्सीन कम होने के कारण नौ बूथों पर ही टीकाकरण किया गया। इस तरह से देखा जाए तो जिले में वैक्सीन की लगातार कमी बनी हुई है। अगर वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो तो कोरोना की तीसरी लहर से पहले बड़ी आबादी को टीकाकरण किया जा सकता है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने बताया कि रविवार को कोविशील्ड वैक्सीन की साढ़े तीन हजार डोज मिली है। सोमवार को कलस्टर प्रणाली के तहत गांवों में टीकाकरण नहीं होगा। 20 बूथों पर 45 प्लस के लोगों को और 18 से 44 साल के लोगों के लिए 11 बूथों पर टीकाकरण होगा।
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जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. आरके सागर ने बताया कि जिले में 16 जनवरी को कोरोनारोधी टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था। इस को शुरू हुए सात माह होने जा रहे हैं। अभी तक लगभग 2.46 लाख लोगों को टीके लगे हैं। इनमें करीब 40 हजार लोगों को दूसरी डोज का टीका लगा है। जिले की आबादी लगभग साढ़े 15 लाख हैं। जनसंख्या के हिसाब से देखा जाए तो अभी टीकाकरण से वंचित लोगों की संख्या बहुत अधिक है। शुरूआत में लोग टीका लगवाने से बच रहे थे, लेकिन अब स्थिति बदली हुई है।
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अब लोग टीके को लेकर जागरूक है, लेकिन अब वैक्सीन की कमी बाधक बनी है। 18 से 44 साल के उम्र वाले बूथों पर टीका लगवाने वालों की ज्यादा भीड़ रहती है। उन्होंने बताया कि वैक्सीन की कमी के कारण एक जुलाई से शुरू होने वाला वृहद टीकाकरण अभियान भी शुरू नहीं हो सका। इसके अलावा 21 जून से सभी ब्लाकों में कलस्टर प्रणाली के तहत टीकाकरण शुरू नहीं हो सका। मात्र दो ब्लाक के गांवों में कलस्टर प्रणाली से टीकाकरण शुरू किया गया। वैक्सीन कम होने के कारण पांच दिन बाद ही कलस्टर टीकाकरण बंद करना पड़ा।
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जुलाई माह में मात्र दो दिन ही कलस्टर प्रणाली से टीकाकरण किया गया। शनिवार को वैक्सीन कम होने के कारण नौ बूथों पर ही टीकाकरण किया गया। इस तरह से देखा जाए तो जिले में वैक्सीन की लगातार कमी बनी हुई है। अगर वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो तो कोरोना की तीसरी लहर से पहले बड़ी आबादी को टीकाकरण किया जा सकता है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने बताया कि रविवार को कोविशील्ड वैक्सीन की साढ़े तीन हजार डोज मिली है। सोमवार को कलस्टर प्रणाली के तहत गांवों में टीकाकरण नहीं होगा। 20 बूथों पर 45 प्लस के लोगों को और 18 से 44 साल के लोगों के लिए 11 बूथों पर टीकाकरण होगा।