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महंगाई की मार से ठंडी पड़ गई उज्ज्वला योजना
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महंगाई की मार से ठंडी पड़ गई उज्ज्वला योजना
शामली, कैराना/ कांधला/ झिंझाना। हर रसोई तक गैस पहुंचाने के लिए शुरू की गई केंद्र सरकार की मुहिम महंगाई की भेंट चढ़ गई। गैस के बढ़ते दामों ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का दम निकाल कर रख दिया। एलपीजी की कीमतें लगभग दोगुनी हो जाने से उज्ज्वला कनेक्शन धारक सिलिंडर नहीं भरवा पा रहे हैं। ऐसे में महिलाओं को प्रदूषण मुक्त ईंधन उपलब्ध कराने का सपना अधूरा है। जिले के करीब 97 हजार परिवारों को निशुल्क गैस कनेक्शन दिए गए। इससे गरीब परिवारों की रसोई तक प्रदूषण मुक्त ईंधन पहुंच गया। लगातार गैस की बढ़ती कीमतों के चलते एक बार फिर ये परिवार चूल्हे पर धुएं के बीच खाना बनाने के लिए मजबूर हैं। जिले के करीब 30 फीसदी उज्ज्वला योजना के लाभार्थी फिलहाल चूल्हे पर लकड़ी और उपलों के ईंधन से खाना बना रहे हैं।
केस-1
कैराना की आर्यपुरी देहात बस्ती निवासी मजदूर परवेज की पत्नी जैनब ने बताया कि उनको करीब तीन साल पहले उज्ज्वला योजना के तहत फ्री रसोई गैस सिलिंडर मिला था। एक सिलिंडर 900 रुपये के आसपास भरा जाता है। उसका पति मजदूरी करता है। 900 रुपये में नौ दिन का घर खर्च निकलता है, इसलिए चूल्हे पर ही खाना बनाते हैं।
केस-2
कैराना की आर्यपुरी देहात बस्ती के कुर्बान की पत्नी जासमीन ने बताया कि रसोई गैस सिलिंडर बहुत महंगा हो गया है। सिलिंडर तो सरकार ने फ्री दिया था, लेकिन गैस के दाम बहुत ज्यादा है। इसलिए चूल्हे पर ही खाना बनाना पड़ रहा है। महंगाई के दौर में घर चलाना भी मुश्किल हो गया है।
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केस-3
कांधला के मोहल्ला रायजादगान निवासी सुशीला पत्नी अमित का कहना है कि जब प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन मिला था, उसके बाद केवल दो बार ही गैस सिलिंडर दोबारा भरवा पाया। बाद में कीमतें इतनी बढ़ गईं कि गैस से खाना बनाना संभव नहीं रहा।
केस-4
कांधला के मोहल्ला रायजादगान निवासी रूबी पत्नी नीरज का कहना है कि हर महीने घरेलू गैस पर दाम बढ़ जाते हैं। पहले खाते में रुपये वापस आ जाते थे, लेकिन अब तो वह भी बंद हो गया है। मजबूरी में लकड़ी से चूल्हे पर ही खाना बनाना पड़ता है।
केस-5
झिंझाना निवासी मिथलेश पत्नी रामनाथ का कहना है कि सरकार ने निशुल्क गैस चूल्हा और सिलिंडर तो दे दिया, लेकिन गैस के दाम बहुत ज्यादा बढ़ा दिए। ऐसे में गरीब परिवार गैस सिलिंडर भरवाने की सोच भी नहीं सकते हैं।
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शामली, कैराना/ कांधला/ झिंझाना। हर रसोई तक गैस पहुंचाने के लिए शुरू की गई केंद्र सरकार की मुहिम महंगाई की भेंट चढ़ गई। गैस के बढ़ते दामों ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का दम निकाल कर रख दिया। एलपीजी की कीमतें लगभग दोगुनी हो जाने से उज्ज्वला कनेक्शन धारक सिलिंडर नहीं भरवा पा रहे हैं। ऐसे में महिलाओं को प्रदूषण मुक्त ईंधन उपलब्ध कराने का सपना अधूरा है। जिले के करीब 97 हजार परिवारों को निशुल्क गैस कनेक्शन दिए गए। इससे गरीब परिवारों की रसोई तक प्रदूषण मुक्त ईंधन पहुंच गया। लगातार गैस की बढ़ती कीमतों के चलते एक बार फिर ये परिवार चूल्हे पर धुएं के बीच खाना बनाने के लिए मजबूर हैं। जिले के करीब 30 फीसदी उज्ज्वला योजना के लाभार्थी फिलहाल चूल्हे पर लकड़ी और उपलों के ईंधन से खाना बना रहे हैं।
केस-1
कैराना की आर्यपुरी देहात बस्ती निवासी मजदूर परवेज की पत्नी जैनब ने बताया कि उनको करीब तीन साल पहले उज्ज्वला योजना के तहत फ्री रसोई गैस सिलिंडर मिला था। एक सिलिंडर 900 रुपये के आसपास भरा जाता है। उसका पति मजदूरी करता है। 900 रुपये में नौ दिन का घर खर्च निकलता है, इसलिए चूल्हे पर ही खाना बनाते हैं।
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केस-2
कैराना की आर्यपुरी देहात बस्ती के कुर्बान की पत्नी जासमीन ने बताया कि रसोई गैस सिलिंडर बहुत महंगा हो गया है। सिलिंडर तो सरकार ने फ्री दिया था, लेकिन गैस के दाम बहुत ज्यादा है। इसलिए चूल्हे पर ही खाना बनाना पड़ रहा है। महंगाई के दौर में घर चलाना भी मुश्किल हो गया है।
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केस-3
कांधला के मोहल्ला रायजादगान निवासी सुशीला पत्नी अमित का कहना है कि जब प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन मिला था, उसके बाद केवल दो बार ही गैस सिलिंडर दोबारा भरवा पाया। बाद में कीमतें इतनी बढ़ गईं कि गैस से खाना बनाना संभव नहीं रहा।
केस-4
कांधला के मोहल्ला रायजादगान निवासी रूबी पत्नी नीरज का कहना है कि हर महीने घरेलू गैस पर दाम बढ़ जाते हैं। पहले खाते में रुपये वापस आ जाते थे, लेकिन अब तो वह भी बंद हो गया है। मजबूरी में लकड़ी से चूल्हे पर ही खाना बनाना पड़ता है।
केस-5
झिंझाना निवासी मिथलेश पत्नी रामनाथ का कहना है कि सरकार ने निशुल्क गैस चूल्हा और सिलिंडर तो दे दिया, लेकिन गैस के दाम बहुत ज्यादा बढ़ा दिए। ऐसे में गरीब परिवार गैस सिलिंडर भरवाने की सोच भी नहीं सकते हैं।

झिंझाना में चूल्हे पर खाना बनाती महिला।- फोटो : SHAMLI