{"_id":"5d028cf7bdec226d9265c9a0","slug":"ujhe-garv-hai-ki-mera-beta-desh-ke-liye-shaheed-hua","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुझे गर्व है मेरा बेटा देश के लिए शहीद हुआ है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुझे गर्व है मेरा बेटा देश के लिए शहीद हुआ है
Thu, 13 Jun 2019 11:21 PM IST
NAVEEN GUPTA
amarujala
amarujala
Published by: NAVEEN GUPTA
Updated Thu, 13 Jun 2019 11:21 PM IST
विज्ञापन
file
- फोटो : amarujala
शहीद के पिता मुनीराम ने कहा कि उसे बेटा खोने का गम तो है, लेकिन गर्व इस बात का है कि उसका बेटा देश के लिए शहीद हुआ है। वो चाहता है कि उसके दो बेटे हैं वे भी फौज में जाएं और आतंकियों का सफाया करें।
शहीद के पिता मुनीराम उर्फ मुन्ना का कहना था कि उनका बेटा बचपन से ही देशभक्ति की बातें करता था। देश पर बेटे कुर्बान करने वाले माता पिता खुशनसीब होते हैं। आज सतेंद्र की मां जिंदा नही है, लेकिन उन्हें बेटे की शहादत पर नाज है। वो चाहते हैं कि उनके दो ओर बेटे भी सेना में जाकर अपने भाई का बदला लें और आतंकवादियों को सबक सिखाएं। कश्मीर से धारा 370 हटाने की मांग भी उन्होंने की।
भाई बोला मैं भी सेना में जाऊंगा
शहीद के भाई केशव ने कहा कि प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह गांव में शहीद के नाम से एक स्मारक बनाएं, ताकि युवाओं में जोश भरे। शहीद के भाई का कहना है कि वह भी सेना में भर्ती होना चाहता है और देश के लिए काम आना चाहता है।
विज्ञापन
पाकिस्तान मुर्दाबाद के लगे नारे
सैकड़ों ग्रामीणों ने शहीद अमर जवान के नारे लगाए और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए। उनमें पाकिस्तान के खिलाफ इतना गुस्सा था कि वे पाक से दो दो हाथ करने की मांग सरकार से कर रहे थे।
मासूम बच्चों का क्या होगा
शहीद जवान सतेंद्र कुमार की धर्मपत्नी सोनिया और उसकी छोटी बहन का रो रोकर बुरा हाल है। दोनों बार - बार रोते रोते कई बार बेहोश हुई। सतेंद्र के दो मासूम बच्चे हैं। बड़ा बेटा दीपांशु साढ़े चार साल का है जबकि छोटा बेटा वासू दो साल का। परिवार की जिम्मेदारी सतेंद्र पर थी ऐसे में हर कोई यही कह रहा था कि आखिर सतेंद्र के मासूम बच्चों का क्या होगा।
विज्ञापन
शहीद के पिता मुनीराम उर्फ मुन्ना का कहना था कि उनका बेटा बचपन से ही देशभक्ति की बातें करता था। देश पर बेटे कुर्बान करने वाले माता पिता खुशनसीब होते हैं। आज सतेंद्र की मां जिंदा नही है, लेकिन उन्हें बेटे की शहादत पर नाज है। वो चाहते हैं कि उनके दो ओर बेटे भी सेना में जाकर अपने भाई का बदला लें और आतंकवादियों को सबक सिखाएं। कश्मीर से धारा 370 हटाने की मांग भी उन्होंने की।
विज्ञापन
भाई बोला मैं भी सेना में जाऊंगा
शहीद के भाई केशव ने कहा कि प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह गांव में शहीद के नाम से एक स्मारक बनाएं, ताकि युवाओं में जोश भरे। शहीद के भाई का कहना है कि वह भी सेना में भर्ती होना चाहता है और देश के लिए काम आना चाहता है।
विज्ञापन
पाकिस्तान मुर्दाबाद के लगे नारे
सैकड़ों ग्रामीणों ने शहीद अमर जवान के नारे लगाए और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए। उनमें पाकिस्तान के खिलाफ इतना गुस्सा था कि वे पाक से दो दो हाथ करने की मांग सरकार से कर रहे थे।
मासूम बच्चों का क्या होगा
शहीद जवान सतेंद्र कुमार की धर्मपत्नी सोनिया और उसकी छोटी बहन का रो रोकर बुरा हाल है। दोनों बार - बार रोते रोते कई बार बेहोश हुई। सतेंद्र के दो मासूम बच्चे हैं। बड़ा बेटा दीपांशु साढ़े चार साल का है जबकि छोटा बेटा वासू दो साल का। परिवार की जिम्मेदारी सतेंद्र पर थी ऐसे में हर कोई यही कह रहा था कि आखिर सतेंद्र के मासूम बच्चों का क्या होगा।