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Shamli News: रील देखकर किया उपचार, राहत के बजाए बढ़ गया मर्ज

Tue, 10 Mar 2026 12:12 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Tue, 10 Mar 2026 12:12 AM IST
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Treatment was done after watching the reel, but instead of getting relief, the disease increased.
शामली। सोशल मीडिया के नुस्खे जिले के लोगों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहे हैं। होली के बाद रंग हटाने और बीमारियों के घरेलू उपचार के नाम पर वायरल हो रही रील्स को देखकर लोग बिना चिकित्सकीय सलाह के प्रयोग कर रहे हैं, जिससे त्वचा संबंधी संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के मामले तेजी से बढ़े हैं।
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जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 150 त्वचा रोगी पहुंच रहे हैं। इनमें से करीब 30 मरीज ऐसे हैं, जिन्होंने इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर देखे गए नुस्खों को अपनाने के बाद त्वचा में जलन, सूजन और संक्रमण की शिकायत के साथ अस्पताल का रुख किया। वहीं, सांस संबंधी रोगों से पीड़ित कई लोग भी रील्स में बताए गए घरेलू उपचार अपनाकर अपनी हालत बिगाड़ बैठे हैं। ऐसे करीब 60 मरीज रोजाना अस्पताल पहुंच रहे हैं।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. किशोर कुमार आहूजा ने बताया कि पिछले तीन दिनों में त्वचा संबंधी मामलों में बढ़ोतरी हुई है। अस्पताल की ओपीडी में आए करीब 550 मरीजों में से 90 ऐसे थे, जिन्होंने सोशल मीडिया पर देखे गए नुस्खों के आधार पर रंग छुड़ाने या इलाज करने की कोशिश की और उनकी समस्या और बढ़ गई।
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चिकित्सकों के अनुसार ऐसे प्रयोगों से कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस, स्किन पीलिंग (त्वचा का उतरना), परमानेंट स्कारिंग (स्थायी दाग) और हाइपरपिग्मेंटेशन जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। कई मामलों में त्वचा झुलसने तक की शिकायत सामने आई है। सांस रोगियों की संख्या भी बढ़ी हैं। हर रोज 150 सांस रोगी उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।

केस स्टडी
केस-1:
रेलपार क्षेत्र निवासी समीर ने सोशल मीडिया पर रील देखकर चेहरे से रंग हटाने के लिए पेट्रोल और केरोसिन का प्रयोग कर लिया। इससे उसके चेहरे पर स्थायी दाग पड़ गए और अब उसे उपचार के लिए अस्पताल आना पड़ रहा है।

केस-2:
मिल रोड निवासी पंकज कुमार ने एक रील देखकर चेहरे पर टूथपेस्ट और बेकिंग सोडा का लेप लगा लिया। कुछ ही मिनटों में उसे तेज जलन महसूस हुई और उसकी त्वचा झुलस गई। फिलहाल उसका जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है।

केस-3:
माजरा रोड निवासी सावित्री ने सांस की समस्या के इलाज के लिए सोशल मीडिया पर देखे गए नुस्खे अपनाए। करीब दस दिन तक खुद ही उपचार करने के बाद उनकी तबीयत और बिगड़ गई। अब उनका इलाज जिला अस्पताल में डॉ. समद अली की देखरेख में चल रहा है।

चिकित्सकों की सलाह
सीएमएस डॉ. किशोर कुमार आहूजा ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर दिखाए जा रहे नुस्खों पर भरोसा कर स्वयं उपचार शुरू न करें। यदि किसी को त्वचा या सांस संबंधी समस्या हो तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। रंग हटाने के लिए ठंडे पानी, माइल्ड क्लींजर और नारियल तेल का उपयोग करना सुरक्षित है। यदि रंग तुरंत न निकले तो घबराने की आवश्यकता नहीं है, त्वचा की नई कोशिकाएं बनने के साथ रंग स्वतः उतर जाता है।


ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी
जिला अस्पताल की ओपीडी में भी मरीजों की संख्या बढ़कर 1200 के पार पहुंच गई है। इनमें लगभग 400 मरीज बुखार, वायरल और खांसी के, 150 त्वचा रोग के, 200 महिला रोग से संबंधित और करीब 450 अन्य बीमारियों के मरीज शामिल हैं। चिकित्सकों का कहना है कि मौसम परिवर्तन और लापरवाही के कारण मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
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